जीएसटी यानी वस्तु और सेवाकर से होने वाली परेशानियों को ध्यान में न रखते हुए केंद्र सरकार ने कारोबारियों के लिए नई ई-वे बिल व्यवस्था लागू कर दी है, जिस में बहुत से ऐसे नियम हैं जो व्यापारियों के लिए सुविधाजनक नहीं हैं. व्यापारियों का कहना है कि अभी हम जीएसटी के जंजाल से जूझ ही रहे थे कि ई-वे बिल के रूप में नई मुसीबत सामने खड़ी हो गई है. हालात यह है कि कारोबारी को बजाय कारोबार करने के, औनलाइन खानापूर्ति करने में ही अपना समय लगाना होगा.

वहीं, सरकार का दावा है कि ई-वे बिल से कारोबारियों की मुसीबतें कम होंगी. उन को टैक्स औफिस के चक्कर नहीं लगाने होंगे. वे अपने फोन से ही ई-वे बिल बना सकेंगे. इस से वे पूरे देश में कहीं भी अपना माल भेजने के लिए स्वतंत्र होंगे.

उधर, कारोबारियों की परेशानी यह भी है कि ई-वे बिल के दायरे में अब 20 वस्तुओं को शामिल कर लिया गया है. इस से कारोबारियों के सामने और ज्यादा परेशानियां आई हैं.

जिन वस्तुओं को ई-वे बिल के दायरे में लाया गया है उन में सुपारी, लोहा, इस्पात, सभी प्रकार के खा• तेल, वनस्पति घी, कोलतार, कोल, सभी प्रकार की टाइल्स, अखबारी कागज, सभी तरह के दूसरे कागज, स्टोन, सिगरेट, सिगार, टायरट्यूब, कत्था, खैनी, जरदा, तंबाकू से बने प्रोडक्ट्स, लुंब्रीकेंट्स, स्किम्ड पाउडर, पेंट, वार्निश, सेनिटरी वेयर और फिटिंग, वुड और टिंबर शामिल हैं. ऐसे में करीबकरीब हर कारोबारी इस दायरे में आ गया. ई-वे बिल की परिधि में आई ज्यादातर चीजें रोजमर्रा की हैं. ऐसे में कारोबारियों की मुसीबतें तो बढ़ेंगी ही, ये चीजें महंगी भी हो जाएंगी.

कैसे बनेगा ई-वे बिल

सरकार ने ई-वे बिल के लिए जीएसटीएन पोर्टल से अलग वैबसाइट बनाई है. इस के जरिए देशभर के सभी कारोबारी और ट्रेडर्स इस वैबसाइट पर ई-वे बिल को जनरेट कर सकेंगे. सरकार ने व्यापारियों की सुविधा के लिए एंड्रौएड फोन के लिए ई-वे बिल का ऐप भी लौंच किया है. इस को मोबाइल के प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. इस ऐप के जरिए भी कारोबारी ई-वे बिल को जनरेट कर सकते हैं. इस ऐप को डाउनलोड करने पर कारोबारी को अपनी डिटेल और जीएसटीएन नंबर रजिस्टर करना होगा.

इधर, कारोबारी ई-वे बिल की खामियों से खासे परेशान हैं. पोर्टल और इंटरनैट की दिक्कतों के साथ ही साथ उन्हें कई तरह की अव्यावहारिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है.

सरकार कहती है कि ई-वे बिल लागू होने से कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों को किसी भी टैक्स औफिस या चैकपोस्ट पर जाने की जरूरत नहीं होगी. कारोबारी ई-वे बिल को इलैक्ट्रौनिकली स्वयं निकाल पाएंगे. कारोबारी औफलाइन भी एसएमएस के जरिए ई-वे बिल बनवा सकेंगे.

जिन कारोबारियों के पास इंटरनैट की सुविधा नहीं होगी और जिन को एक दिन में ज्यादा ई-वे बिल जनरेट नहीं करने हैं, वे एसएमएस के जरिए ई-वे बिल को जनरेट करवा सकते हैं. इस के लिए कारोबारी को अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर कराना होगा. इसी नंबर से एसएमएस के जरिए ई-वे बिल की रिक्वैस्ट डिटेल दे कर वे ई-वे बिल जनरेट करवा सकते हैं. ई-वे बिल जनरेट करने पर क्यूआर कोड जनरेट होगा. इस कोड के जरिए ही जीएसटी अधिकारी कभी भी व्हीकल की चैकिंग कर सकते हैं. इस के जरिए ही व्हीकल को ट्रैस भी किया जा सकेगा.

कारोबारियों को ई-वे बिल बनाने के लिए वैबसाइट पर जा कर जीएसटी का यूजर पासवर्ड डालना होगा. इस के बाद ही वे अपना ई-वे बिल जनरेट कर सकेंगे. अगर कारोबारी ने अपना ई-वे बिल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो उन्हें अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस के बाद ई-वे बिल पर रजिस्ट्रेशन क्लिक करना होगा. यहां पर जीएसटीएन नंबर भरने से पासवर्ड मिल जाएगा. इस से ही वे अपना ई-वे बिल बना सकेंगे.

हड़बड़ी में लिया गया फैसला

ई-वे बिल को ले कर कारोबारियों को पोर्टल के अलावा भी कुछ दिक्कतें हैं. कारोबारी चाहते हैं कि सरकार इस में संशोधन करे. अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष संदीप बंसल कहते हैं, ‘‘ई-वे बिल किसी भी तरह से कारोबार के हित में नहीं है. इस के लागू होने के बाद वे कारोबारी भी जीएसटीएन नंबर लेने के लिए मजबूर हो गए हैं जो जीएसटी के दायरे में नहीं आते. सरकार ने जीएसटी लागू करने में जिस तरह की हड़बड़ी दिखाई, वैसी ही हड़बड़ी उस ने ई-वे बिल के लिए भी दिखाई. बिना पूरी तैयारी के इस को लागू किया गया है. जीएसटी में रोज नए बदलाव हो रहे हैं, जिस से कारोबारी परेशान हो रहे हैं. इस तरह के बदलावों से यह लगता है कि सरकार कारोबारियों के हित के बजाय उन का अहित करने का काम कर रही है.’’

वे कहते हैं, ‘‘आज भी देश में तमाम ऐसे कारोबारी हैं जो इंटरनैट और कंप्यूटर की जटिलताओं से दूर हैं. वे मेहनत और ईमानदारी से कारोबार करते हैं, समय पर टैक्स देते हैं. वे चाहते हैं कि सरकार टैक्स को सरल करे, जिस से उन्हें इस झमेले से मुक्ति मिल सके.

केंद्र की भाजपा सरकार लगातार कारोबारियों को परेशान करने वाले कानून बना रही है. विपक्ष में रहते हुए कभी जिस एफडीआई का वह विरोध करती थी, आज खुद उस ने उसी को लागू कर दिया. महंगाई और पैट्रोलियम पदार्थों के दामों को ले कर वह पहले विरोध करती थी अब उस का समर्थन कर रही है. पूरे देश पर जीएसटी लागू किया पर पैट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी नहीं लगा रही है. अगर पैट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी लागू हो जाए तो ये काफी हद तक सस्ते हो जाएंगे.

बदलाव की मांग

कारोबारी ई-वे बिल के कुछ  प्रावधानों में बदलाव चाहते हैं.

• 30 किलोमीटर से ज्यादा दूर माल भेजने पर ई-वे बिल बनाना होगा.

—      कारोबारी चाहते हैं कि आज शहरों की घटती दूरी को देखते हुए यह कम है. इस में तो एक महल्ले से दूसरे महल्ले के बीच माल भेजने वाले को ई-वे बिल बनाना जरूरी हो जाएगा. ऐसे में ई-वे बिल के लिए कम से कम 60 किलोमीटर की दूरी का प्रावधान किया जाए.

  • 50 हजार रुपए से ज्यादा का माल भेजने के लिए ई-वे बिल बनाना होगा.

—     कारोबारी कहते हैं कि इस नियम से सभी के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो जाएगा. तब जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट की बात बेमानी होगी. इसलिए यह सीमा बढ़ा कर कम से कम 2 लाख रुपए की जाए.

  • माल भेजने के लिए ट्रक का नंबर देना होगा.

—      कारोबारी कहते हैं कि कई बार ट्रांसपोर्ट वाले माल भेजते समय ट्रक बदल देते हैं. कोई दूसरी परेशानी भी खड़ी हो सकती है. ऐसे में ट्रक का नंबर बाद में बदलने का प्रावधान शामिल किया जाए.

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