हाल ही में एक धार्मिक नेता जिन्होंने गे मैरिज को कोरोना की वजह बताई उन्हें खुद कोरोना हो गया. 91 साल के पैट्रिआर्क फिलारेट को कोरोना से पीड़ित होने पर अस्पताल में एडमिट किया गया.

कीव के यूक्रेनियम ऑर्थोडॉक्स चर्च के हेड फिलारेट देश के जानेमाने धार्मिक गुरु हैं जिन के 15 मिलियन फॉलोअर्स हैं. कोरोनावायरस को ले कर उन के विचार बेहद हास्यास्पद हैं. एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि यह महामारी भगवान के द्वारा दिया गया है जो इंसानों को उन के द्वारा किए गए पापों की वजह से भोगना पड़ रहा है. पापों की फ़ेहरिस्त में उन्होंने सब से पहला नाम सेम सेक्स मैरिज यानी समलिंगी विवाह को रखा. जाहिर है कि उन के इस बयानबाजी के कारण इस समुदाय के लोगों के विरुद्ध सामान्य लोगों के मन में घृणा पैदा होगी और आवेश में आ कर लोग इन्हें नुकसान भी पहुंचा सकते हैं. दुनिया के और भी बहुत से धार्मिक गुरुओं ने एलजीबीटी समुदाय यानी( लेस्बियन गे बायोसेक्सुअल एंड ट्रांसजेंडर ) को इस महामारी का जिम्मेदार बताया है.

कोरोना महामारी को ले कर अक्सर हमारा सामना ऐसी बेवकूफी भरी सोचों से होता रहता है. लोग अपनीअपनी मानसिकता और दायरे के हिसाब से अफवाहें फैलाते रहते हैं.

हाल ही में यूके में सोशल मीडिया के जरिए एक खबर बड़ी तेजी से फैली कि कोरोना वायरस जैसी महामारी 5 जी इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण पनप रही है. इस के बाद वहां लोग घबड़ा कर 5जी टावर्स को आग के हवाले करने लगे. कोई वैज्ञानिक तथ्य मौजूद न होने के बावजूद इस अफवाह के फैलते ही लोगों ने 5जी मोबाइल टावर्स में आग लगाने के साथ 5जी इंस्टॉलेशन के लिए फाइबर ऑप्टिक केबल को बिछाने का काम कर रहे मजदूरों को भी प्रताड़ित किया. बहुत से दावों में यह कहा गया कि वायरस वुहान में इसलिए पैदा हुआ क्योंकि चीन के शहर ने पिछले साल 5G नेटवर्क को विस्तार दिया था.

ये भी पढ़ें- आत्महत्या का ख्याल दूर कैसे भगाएं

कुछ लोग तो कोरोना से बचने के लिए रामचरितमानस के पन्ने पलट बाल की खोजबीन में भी लग गए. हुआ यह कि कोरोना वायरस से बचने के लिए सोशल मीडिया में यह खबर तेजी से वायरल हुई कि रामायण के बाल कांड में बाल मिल रहा है. यह बाल पवित्र है और इस को साधारण पानी के साथ या फिर पानी में उबाल कर और गंगा जल मिला कर पीने से कोरोना वायरस ठीक हो जाता है या होता ही नहीं है. सोशल मीडिया में ऐसे कई वीडियो भी आ गए जिस में लोग दीप जला कर या हाथपैर धो कर पन्ने को पलटते हुए बाल कांड के पन्नों में पहुंच कर बाल मिलने का दावा करने लगे. बस बहुत से लोग बिना कुछ सोचेसमझे बालकांड के बाल की तलाश में लग गए.

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाने का एक नमूना यूपी के कुछ शहरों में दिखा है. यहां के मेडिकल स्टोर्स पर कोरोना शट आउट/गेट आउट कार्ड बिकता हुआ पाया गया. दावा यह किया गया कि इस कार्ड को गले में पहनने से कोरोना का संक्रमण नहीं होेता.
100 रुपये से ले कर 150 से 180 रुपये तक में बिकने वाले इस कार्ड के भीतर शक्कर के दाने के बराबर पत्थर जैसे भरे होने के साथ इन से एक गंध निकलती है. इसे बेचने वालों को भी इस की कंपनी का नाम नहीं पता मगर लोगों ने बड़ी संख्या में इस की खरीददारी की.

मध्य प्रदेश के रतलाम के नयापुरा में तो हद ही हो गई जब एक झाड़फूंक करने वाले बाबा द्वारा हाथ चूम कर कोरोना ठीक करने की अफवाह उड़ी तो लोगों का हुजूम वहां इकठ्ठा होने लगा. नतीजा यह हुआ कि हाथ चूम कर कोरोना ठीक करने का दावा करने वाले बाबा की कोरोना से ही मौत हो गई और दूसरे 19 लोग भी इस से संक्रमित हो गए. बाबा की मौत होने पर इस  अंधविश्वास का खुलासा हुआ पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

कोरोना के कारण अंधविश्वास और अफवाहों का बाजार भी लगातार गर्म रहा है. खासतौर पर यह अंधविश्वास का जाल महिलाओं पर इस कदर हावी रहा है कि वायरस भगाने के नाम पर वे रात दिन पूजापाठ लगी रहती है. बिहार के कैमूर और गोपालगंज में महिलाओं ने कोरोना को देवी मान कर पूजा की गुड़हल के नौ फूल, गुड़ की नौ डली, नौ लौंग और सिंदूर की नौ लकीर के साथ कोरोना माता को दूर करने के प्रयत्न किये.

उत्तर प्रदेश में अंधविश्वास का प्रकोप कुछ इस कदर दिखा कि लोगों ने दिये जला कर और कुएं में पानी डाल कर कोरोना महामारी के इलाज का दावा करना शुरू कर दिया. किसी ने कहा कि कोरोना से बचने के लिए गांव में जितने पुरुष हैं उतने आटे के दिये जलाएं तो किसी ने  दियों को शाम के समय घर की देहरी पर रखना शुरू किया.

कई जगह तो मोदी के तर्ज पर घर की बड़ीबूढ़ी औरतें अब भी हर रोज थालियां बजाती हैं और कोरोना को भगाने का प्रयास करती हैं. कई लोगों ने कोरोना से बचने के लिए घर में हर रोज नियमित पूजा पाठ करना, नीम के पेड़ के पास दिया जलाना और पेड़ को दो लोटा जल चढ़ाना शुरू किया हुआ है .

कोरोना को ले कर फिरोजाबाद में एक अलग ही अंधविश्वास नजर आया. वहां यह अफवाह उड़ी कि जितना हो सके हल्दी का पानी कुंए में डाले इस से कोरोना जैसी बीमारी पर नियंत्रण किया जा सकता है. इस के बाद बिना कुछ सोचे समझे सैकड़ों महिलाओं ने बंद पड़े कुओं में हल्दी का पानी डालना शुरू कर दिया

वहीँ मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में यह अफ़वाह भी फैली कि हरी चूड़ी पहनने और घर के बाहर गोबर व लेप का पंजा बनाने से कोरोना नहीं आएगा और परिवार सुरक्षित रहेगा.

गांव के कुछ लोगों ने इस बीमारी के इलाज के तरहतरह के नुस्खे बताने भी शुरू किये हैं. लोगों का विश्वास है कि गुड़ की चाय पीने और उस में एक जोड़ा लौंग की फलियां डाल कर पीने से कोरोना खत्म हो जाता है.

गावों के कुछ लोगों ने कोरोना का कारण सूर्यग्रहण भी माना उन के मुताबिक़ सूर्यग्रहण की वजह से सभी नक्षत्र बिगड़े हैं और यह सब शनि का प्रकोप है. कुछ लोगों ने कोरोना से बचने के लिए आटे के दिए जलाने भी शुरू किये.

इन सब के साथ कोरोना के नाम पर ठगी का धंधा भी चालू है. कई जगह लोगों ने कोरोना के नाम पर चंदा उगाहना शुरू किया. लोगों को डराया गया कि जो लोग चंदा नहीं देंगे उन्हें कोरोना मार देगा. कुछ लोग सुबहशाम पीपल में जल दे रहे हैं क्यों कि उन का मानना है कि सभी देवता इस में बसते हैं और ये देवता सब ठीक कर देंगे.

दरअसल हमारे समाज में तर्कशील बौद्धिक चेतना का विकास नहीं हो पाया है जिस का कारण एक तो धार्मिक अंधविश्वासों का मौजूद होना है और दूसरा कारण है लोगों का अशिक्षित होना. लोग बहुत आसानी से पाखंडियों, जालसाजों और ठगों की जाल में फंस जाते हैं और यह सोचने का प्रयास भी नहीं करते कि ऐसा वे कर क्यों रहे हैं.

ये भी पढ़ें- वर्क आउट की कोई उम्र नहीं होती – सोनाली स्वामी

पूरी दुनिया इस समय भी कोरोना वायरस की चपेट में है और इस का केवल एक ही इलाज है और वह है घर पर रहना यानी सामाजिक दूरी को बना कर रखना. कोरोना पूरी तरह तभी भागेगा जब इस की वैक्सीन आएगी. तब तक जितने भी पापपुण्य या अंधविश्वासों के चक्कर में पड़े रहो कुछ होने वाला नहीं सिवा अपनी आर्थिक मानसिक और शारीरिक  क्षति के. यही नहीं यदि अंधविश्वास के नाम पर ऐसे ही लोगों का मजमा लगना कायम रहा तो कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ती ही जाएगी.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...