टैटू प्राचीन भारतीय परंपरा का हिस्सा है, लेकिन आज यह दुनियाभर में बड़े कारोबार के रूप में उभरा है. एक अनुमान के अनुसार, देश में 25 हजार से ज्यादा टैटू स्टूडियो हैं और टैटू इंडस्ट्री 1,300 करोड़ रुपए से ज्यादा की है.

एक जमाने में आदिवासी संस्कृति का प्रतीक रहा है टैटू आज दुनियाभर में लोकप्रिय है और इस का क्रेज दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. सैलिब्रिटीज से ले कर आमजन में टैटू की दीवानगी देखी जा सकती है. कुछ लोग तो इस के इस कदर दीवाने हैं कि उन्होंने अपना संपूर्ण शरीर ही टैटुओं के हवाले कर दिया है. आइए आप को ऐसे ही कुछ लोगों के बारे में बताते हैं, जिन के शरीर टैटुओं की नुमाइश के केंद्र बन गए हैं.

‘‘मेरा चेहरा मत पढ़ो. मेरी लाइफ की कहानी मेरी बौडी पर बने 51 टैटू बताते हैं,’’ ऐसा कहते हैं पूर्व ब्रिटिश फुटबौलर डेविड बेकहम. उन्हें टैटू का जनून इतना ज्यादा है कि उन के हाथों की उंगलियों से ले कर पैरों तक कई टैटू बने हैं. उन्होंने अपने जीवन की हर महत्त्वपूर्ण चीज अपने शरीर पर गुदवा दी है. चाहे वह पत्नी से पहली मुलाकात हो या फिर बच्चों से जुड़ी हुई कोई बात. उन्होंने हाल ही में अपने कुछ खास और इंस्पायरिंग टैटू से जुड़ी कहानी शेयर की.

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मैनचेस्टर यूनाइटेड टीम के पूर्व मिडफील्डर बेकहम के अनुसार, ‘‘मैं ने सब से पहले अपने बड़े बेटे ब्रूकलिन के नाम का टैटू बनवाया था. यह कमर के पिछले हिस्से में था. उस के बाद मैं ने अपने दोनों बेटों रोमियो और क्रूज का नाम भी पीठ पर गुदवाया. मेरे टैटू बनवाने का यह सिलसिला तभी से शुरू हो गया. ब्रूकलिन को मैं प्यार से ब्रस्टर भी कहता हूं. यह नाम भी मैं ने गरदन पर खुदवाया.’’ बेकहम का सब से पसंदीदा पक्षी है ईगल. उन्होंने गरदन पर ईगल का टैटू भी गुदवाया हुआ है. उन के पिता टेड भी टैटू के काफी शौकीन थे. उन के हाथ पर जहाज का टैटू था.

बेकहम ने भी हूबहू वैसा ही टैटू अपनी बांह के नीचे खुदवाया. इस टैटू को वे अपने पिता के प्रति प्यार व सम्मान का प्रतीक मानते हैं. बेकहम अपनी 5 साल की बेटी हार्पर को अपने चारों बच्चों से सब से ज्यादा प्यार करते हैं. इसलिए उन्होंने उस की एक ड्राइंग को अपनी हथेली पर उकेर दिया. वे कहते हैं, ‘‘एक दिन मैं ने देखा कि हार्पर ने ड्राइंग बनाई. यह उस की पहली ड्राइंग थी. मैं ने उसी वक्त फैसला कर लिया कि इसे हमेशा के लिए यादों में संजोना है तो इस का टैटू गुदवाना चाहिए.’’

41 वर्षीय बेकहम के लिए साल 1999 बहुत खास रहा. इसी साल उन की टीम मैनचेस्टर यूनाइटेड ने चैंपियंस लीग जीती और उन्होंने गर्लफ्रैंड विक्टोरिया से शादी की. इसलिए उन्होंने उंगली पर 99 नंबर का टैटू गुदवाया है.

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे टैटू बहुत खास हैं. हर टैटू कुछ न कुछ कहता है, लेकिन ये कुछ हैं, जो सब से फेवरेट हैं. इसलिए मैं ने इन से जुड़ी यादें शेयर की हैं. भविष्य में भी ऐसी प्यारी और इमोशनल यादें मैं अपनी बौडी पर उकेरना चाहूंगा.’’

चर्चा में फुटबौलर

फुटबौलर अपने टैटू को ले कर चर्चा में रहते ही हैं. चाहे वे 40 टैटू बनवा चुके पूर्व इंग्लिश फुटबौलर डेविड बेकहम हों या फिर बाएं पैर पर टैटू गुदवा चुके लियोनेल मेसी. इंग्लैंड के 26 साल के फुटबौलर आंदे्र ग्रे पीठ पर खुदवाए गए टैटू को ले कर चर्चा में हैं. इन में खास यह है कि उन्होंने ह्यूमन राइट्स ऐक्टिविस्ट की फोटो बनवाई है. उन्होंने मार्टिन लूथर किंग से ले कर मुहम्मद अली और नेल्सन मंडेला तक के टैटू बनवाए हैं. इस के अलावा उन्होंने इतिहास के कई पलों को भी शरीर पर गुदवाया है. उन्होंने 10 महान लोगों और घटनाओं के टैटू 72 घंटे में बनवाए. उन्होंने

8-8 घंटे के 9 सैशंस में ऐसा किया. इस में ऐथलीट टौमी स्मिथ और जौन कार्लोस के भी टैटू शामिल हैं. ये अफ्रीकनअमेरिकन ऐथलीट 1968 मैक्सिको ओलिंपिक में मैडल सेरेमनी के दौरान ब्लैक पावर सैल्यूट के लिए फेमस हुए थे.

मैनचेस्टर यूनाइटेड के फुटबौलर स्लादान ने वर्ष 2015 में पूरी दुनिया के लोगों का ध्यान भुखमरी जैसे गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करने के लिए अपने शरीर पर 15 ऐसे लोगों के नामों के टैटू गुदवाए जो भुखमरी से पीडि़त रहे थे. इस से उन्हें काफी सराहना मिली थी. इटली के लाइकांडो फैडरेशन ने इन्हें ब्लैकबैल्ट की मानद उपाधि से सम्मानित भी किया है.

मुंबई के जैसन जौर्ज ह्यूमन एडवरटाइजिंग बोर्ड नाम से फेमस हैं. इन्होंने अपने शरीर पर 380 ब्रैंड्स के लोगो के टैटूज गुदवाए हुए हैं. इन में गूगल, आरबीआई से ले कर कई अंतर्राष्ट्रीय ब्रैंड्स शामिल हैं. इस के रिकौर्ड के लिए उन्होंने गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स के लिए अप्लाई भी किया है. इस से पहले वे 2015 में एक ही महीने में 177 टैटू अपने शरीर पर गुदवाने का रिकौर्ड बना चुके हैं.

भारत में भी अनेक जानेमाने अभिनेता, अभिनेत्री, खिलाड़ी, मौडल, राजनेता आदि ने भी अपने शरीर पर टैटू गुदवाए हैं. उन की देखादेखी आमजन भी इस ट्रैंड को फौलो करते हैं.

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शिकागो की 80 वर्षीय हेलन लांबिन जब सुबह सैर पर निकलती हैं तो लोग उन्हें कौम्प्लीमैंट्स देते हैं. पिछले 5 वर्षों में उन्होंने 50 से ज्यादा टैटू बनवाए. उन्होंने पहले छोटा टैटू गुलबहार के फूल का बनाया. कुछ दिनों बाद बेकी डौल्फिन का. फिर सोचा उस की मां का भी होना चाहिए. तब तीसरा टैटू बना. उस के बाद पति की याद में गुलाबी रंग के खरगोश का टैटू बनवाया.

59 वर्ष के बिल पासमेन को दुनिया घूमने का शौक है. अब तक वे आधी दुनिया देख चुके हैं. उन्होंने अपनी पीठ पर दुनिया का नक्शा बनवाया है. वे जिस देश में जाते हैं वहां टैटू आर्टिस्ट के पास जा कर टैटू पर उस देश का रंग भरवा लेते हैं. अब तक उन के टैटू में 60 देशों का रंग भर चुका है. ल्यूजियाना के इस वकील ने 51 वर्ष की उम्र में ट्रैवलिंग शुरू की. तंजानिया जा कर उन्होंने अपने इस कभी खत्म न होने वाले सफर की शुरुआत की. ट्रैवलिंग को समय देने के लिए इन्होंने अपनी नौकरी भी छोड़ दी. 7 महाद्वीपों का सफर तय कर चुके बिल की पसंदीदा जगह ग्वाटेमाला है. उन्हें यह प्रेरणा एक युवती के ऐसे ही टैटू को देख कर मिली थी.

ब्रिटेन के जेक रेनौल्ड्स ने 104 वर्ष की आयु में 6 अप्रैल, 2016 में पहली बार टैटू गुदवाया है. इस के लिए उन का नाम टैटू गुदवाने वाले सब से बुजुर्ग के तौर पर गिनीज बुक में दर्ज किया गया है. वे इंग्लैंड के डर्बीशायर प्रांत के चेस्टरफील्ड में रहते हैं.

टैटू बनवाने का रिकौर्ड

फ्लोरिडा के चार्ल्स हेल्मके को हाल ही में गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स की ओर से सर्वाधिक टैटू वाले वरिष्ठ नागरिक (पुरुष) की मान्यता मिली थी. इस के बाद अब उन की जीवनसंगिनी शार्लोट गुटेनबर्ग ने भी सर्वाधिक टैटू वाली वरिष्ठ नागरिक (महिला) होने का वर्ल्ड रिकौर्ड बना लिया है. पेशे से लेखिका और प्रशिक्षक शार्लोट के शरीर के 915 फीसदी हिस्से पर रंगबिरंगे टैटू बने हैं. टैटू का रिकौर्ड बनाने की उन की यह यात्रा एक दशक पहले शुरू हुई थी. उन्होंने 2006 में पहला टैटू बनवाया था. इस के बाद टैटू बनवाने की उन की दीवानगी बढ़ती गई, जबकि उन के 75 वर्षीय जीवनसाथी के शरीर के 93.75 फीसदी भाग पर टैटू हैं. उन्होंने पहला टैटू 1959 में उस समय बनवाया जब वे अमेरिकी सेना में थे.

इस से पूर्व, उराग्वे के टैटू आर्टिस्ट विक्टर ह्यूगा और उन की पत्नी गोब्रिएला का नाम सब से ज्यादा टैटू बनवाने वाले दंपती के रूप में गिनीज बुक में दर्ज था.

लंदन की एक महिला इसोबेल वार्ले का नाम गिनीज बुक में शामिल किया गया था. जानते हैं  क्यों? क्योंकि उसे टैटू गुदवाने का इतना जबरदस्त शौक था कि उस ने अपने शरीर के 93 प्रतिशत हिस्से पर टैटू गुदवाया था. ऐसा कर के वह दुनिया में सब से अलग दिखना चाहती थी.

नई दिल्ली के हरप्रसाद ऋषि के टैटू उस की पहचान बन चुके हैं. वे अपने शरीर पर 185 देशों का मानचित्र तथा 366 झंड़ों के टैटू गुदवा कर विश्व रिकौर्ड बना चुके हैं. उन्होंने अपने माथे पर तिरंगे का टैटू गुदवाया.

इस के अलावा हरिप्रसाद ने बराक ओबामा और गिनीज बुक के अध्यक्ष जिम पैटीसन की तसवीरें भी  टैटू के रूप में शरीर में गुदवा रखी हैं. उन्होंने अपने शरीर पर इंग्लिश, हिंदी, जरमन, रूसी, ग्रीक, हिब्रू तथा इटैलियन भाषा के 3,985 अक्षर गुदवाए हैं. उन का कहना है, ‘‘मैं कुछ ऐसा करना चाहता हूं ताकि मरने के बाद भी जिंदा रहूं. इसलिए मैं एक तरफ से अपने शरीर पर ही पूरा म्यूजियम बनवाना चाहता हूं.’’ लोग उन्हें टैटू वाले दादाजी के नाम से जानते हैं.

इंग्लैंड के विलफ्रैड हार्डी को भी टैटू गुदवाने का बड़ा शौक था. उन्होंने अपने पूरे शरीर के 4 प्रतिशत हिस्से को छोड़ कर शेष सतह पर टैटू गुदवा रखे थे. यहां तक कि उन्होंने गाल के अंदरूनी हिस्सों, जीभ, मसूढ़ों और भौंहों तक को नहीं बख्शा.

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अमेरिका के वाल्टर स्टिग्लिट्स की पहचान भी टैटू की वजह से है. उन्होंने अपने शरीर पर 5,457 टैटू गुदवा रखे हैं. इस के लिए उन्होंने 6 कलाकारों की मदद ली.

शरीर पर कौर्पोरेट ब्रैंड

मुंबई के जैसन जौर्ज को आप कम मत समझिए. उन्होंने अपना शरीर दुनिया की जानीमानी कंपनियों के ब्रैंड के टैटू बनाने के लिए पेश कर दिया. 25 वर्षीय जौर्ज के शरीर पर मई 2015 में 189 कंपनियों के टैटू गुदे हुए थे. वे गिनीज रिकौर्ड बनाने के लिए कुल 321 टैटू बनाने के प्रयास में जुटे हैं. जौर्ज के टैटू अजीब भले ही लगते हों लेकिन इन टैटुओं ने उन की जिंदगी पर गहरी छाप छोड़ी है. वैसे वे खुद एक टैटू कलाकार हैं, लेकिन अपने शरीर पर वे दूसरों से टैटू बनवाते हैं. अपने इस शौक को पूरा करने के लिए वे 3 लाख रुपए खर्च कर चुके हैं. फिलहाल उन का नाम लिमका बुक में दर्ज है.

वर्ष 1981 मैं टैटू सुंदरी की विश्व प्रतियोगिता में ब्रिटेन की सूसन जेम्स सर्वप्रथम आई थीं. उन्हें गोदनायुक्त सुंदरी में सर्वाधिक सुंदर घोषित किया गया था.

अमेरिका के बर्नार्ड मोलर ने 4 दिसंबर, 1989 को अपने शरीर को 8,960 स्थानों पर गुदवाया.

एक सिरफिरे प्रेमी ने अपने हाथ पर अपनी प्रेमिका का नाम गुदवा रखा था. अपनी पूर्व प्रेमिका लीजा के नाम के साथ ही उस ने प्रेमिका के जन्म की तारीख का टैटू भी बनवाया था. पागलपन की हद तब हुई जब डोमिनिक रेडले ने लीजा की बेरहमी से हत्या करने के बाद उस की मौत की तारीख भी हाथ पर गुदवा ली. स्पेन पुलिस ने जब 20 वर्षीया लीजा एच की हत्या करने वाले भगोड़े प्रेमी को ढूंढ़ा, तब हाथ के टैटू से हत्या की पुष्टि की.

शहर की लड़कियों में टैटू का क्रेज ज्यादा देखा जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक हर 10 में से 9 लड़कियों को टैटू बनवाना बेहद पसंद है.

जब चरप पर होता है क्रेज

नवरात्र के अवसर पर युवाओं में टैटू का क्रेज चरम पर पहुंच जाता है. गरबा के साथ टैटू का क्रेज युवतियों में भी बढ़ रहा है. शाइनिंग टैटू का क्रेज अधिक है. लोग मैकेनिकल, फांट टैटू ज्यादा पसंद कर रहे हैं. मोरपंख, बाजूबंध, गरबा करती लड़कियां आदि टैटू की डिमांड भी बढ़ रही है.

दुनियाभर के लोगों में टैटू का क्रेज है. लोग इसे फैशन का प्रतीक मान रहे हैं. लेकिन कुछ देश ऐसे भी हैं जहां के लोगों के लिए टैटू किसी खास पृष्ठभूमि की पहचान है और इस वजह से वे कहीं काम भी नहीं कर पाते. दक्षिणी अमेरिका के अल सल्वाडोर में तो सरकार को वहां टैटू रिमूवल प्रोजैक्ट चलाना पड़ रहा है. वहां कई बड़े आपराधिक गैंग्स की खास पहचान उन के टैटू हैं और हर को यह गुदवाना जरूरी है. कभीकभी तो ये टैटू इतने बड़े होते हैं कि सिर से ले कर पांव तक इन लोगों को स्याही से रंग देते हैं, लेकिन यही पहचान इन लोगों की समस्या हो जाती है. ये लोग यदि अपराध की दुनिया छोड़ना भी चाहें तो यह पहचान आम दुनिया में उन की स्वीकार्यता नहीं होने देती. मानव तस्करी के पीडि़तों पर भी गैंग्स वाले टैटू बना देते हैं ताकि उन की पहचान बनी रहे. जापान में टैटू की छवि अच्छी नहीं रही है. वहां इसे आपराधिक गुटों से जुड़ा माना जाता है. कई जगहों पर स्विमिंग पूल, गरमपानी के कुंड आदि में टैटू वाले लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता.

पुलिस और सेना की भरती शर्तों के कारण लोग टैटू निकलवाने जाने लगे हैं

बड़े अस्पतालों में टैटू निकालने का काम क्विक स्विच लेजर मशीन से किया जाता है. इस के बावजूद यह 80 प्रतिशत ही निकल पाता है. बाकी त्वचा में रह जाता है.

परमानैंट टैटू की स्याही में मौजूद कैमिकल डार्मिक लेयर के नैनो कणों में इन्फैक्शन फैलाता है. इस से सामान्य इन्फैक्शन के अलावा एलर्जी, टीबी और कोढ़ जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है. इन्फैक्शन से शरीर में अन्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है.

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हो जाता है स्थायी

जापान में हुए एक शोध के अनुसार टैटू त्वचा की दूसरी परत, जिसे डार्मिक लेयर कहा जाता है, पर स्थायी हो जाता है. टैटू की स्याही में निकिल, क्रोमियम, मैगनीज कोबाल्ट, बैल्क कार्बन, टाइटेनियम डाईऔक्साइड जैसे कैमिकल्स मिले होते हैं. स्याही में मौजूद कैमिकल्स, नैनोकण के रूप में शरीर के अंदर फैलने लगते हैं. इस से प्रतिरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले लिम्फ नौड्स प्रभावित होते हैं.

कई लोगों को टैटू की जगह त्वचा पर लालिमा, सूजन, मवाद आने जैसी शिकायतें होती हैं. इस के अलावा, बैक्टीरियल इन्फैक्शन के मामले भी सामने आ रहे हैं.

टैटू के लिए उपयोग में लाई जाने वाली लाल स्याही में मौजूद टाइटेनियम डाइऔक्साइड सब से घातक कैमिकल होता है.

यूरोपीय कैमिकल्स एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टैटू बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली स्याही कैंसर का कारण बन सकती है. इस में भी लाल स्याही को सब से ज्यादा खतरनाक पाया गया है. नीली, हरी और काली स्याही भी सेहत के लिए खतरनाक हैं. स्याही के जहरीले प्रभाव के कारण वर्षों तक त्वचा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

कई बार टैटू बनाने वाले एक ही निडिलडाई का इस्तेमाल करते हैं. एड्स संक्रमित व्यक्ति में यह निडिलडाई इस्तेमाल हुई है तो उस से स्वस्थ व्यक्ति को भी एड्स फैल सकता है.

टैटू के कई डिजाइन ऐसे होते हैं जिन में निडिलडाई शरीर में गहराई तक चुभाई जाती है. इस में मांसपेशियों को काफी नुकसान पहुंचता है.

पहुंचाता है नुकसान

टैटू से अधिक प्रेम आप के इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरक्षातंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसा एक रिसर्च में सामने आया है. साइंटिफिक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, टैटू बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली स्याही में मौजूद खास तत्त्व, जैसे कार्बन, टाइटेनियम डाइऔक्साइड शरीर में रक्त के माध्यम से फैलते हैं और रोगों से लड़ने वाले इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं. इस से अन्य बीमारियां भी जकड़ने लगती हैं.

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दुनियाभर में अपने शरीर पर टैटू बनाने का फैशन चल रहा है. ज्यादातर लोग टैटू को कला मानते हैं, लेकिन जापान की कोर्ट ऐसा नहीं मानती. वहां इस के लिए डाक्टर की तरह मैडिकल प्रैक्टिशनर का लाइसैंस जरूरी है. यह फैसला ओसाका की कोर्ट में सुनाया गया. दरअसल, यहां टैटू स्टूडियो चलाने वाले ओसाका के ताइकी मसूदा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. लेकिन 29 साल के मसदा ने जुर्माना भरने के बजाय इसे चुनौती देने का फैसला कर लिया. हालांकि, 2 साल की लड़ाई के बावजूद उन्हें हार ही मिली. दरअसल, 2015 में पुलिस ने स्टूडियो पर छापा मार कर मसूदा को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस की दलील थी कि मसूदा बिना किसी मैडिकल शिक्षा के टैटू स्टूडियो चला रहा है. बाद में कोर्ट ने उस पर 3 लाख येन (करीब डेढ़ लाख रुपए) का जुर्माना भी लगा दिया था, लेकिन मसूदा ने टैटू बचाने का अभियान चला दिया और जुर्माने को ओसाका की कोर्ट में चुनौती दे दी. उन्होंने दलील दी कि टैटू एक आर्ट है और इसे बनाने वाला आर्टिस्ट. इस का मैडिकल साइंस से कोई लेनादेना नहीं है. उन्होंने दुनियाभर में टैटू बनवाने के उदाहरण भी दिए. लेकिन कोर्ट ने कोईर् दलील नहीं मानी और टैटू को मैडिकल प्रैक्टिस घोषित करते हुए लाइसैंस जरूरी कर दिया. साथ ही मसूदा पर 3 लाख येन करीब डेढ़ लाख रुपए का जुर्माना भी लगा दिया.

जज तकाकी नगासे के अनुसार, ‘‘टैटू बनाने वाले के पास मैडिकल लाइसैंस होना चाहिए, क्योंकि टैटू गोदते वक्त बैक्टीरिया और वायरस शरीर में दाखिल हो सकते हैं. इस से स्किन की बीमारी होने का खतरा भी है.’’

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