भाई बहन के बीच का रिश्ता बहुत खास होता है. दोस्ती आती जाती रहती है लेकिन आप अपने भाई या बहन के साथ उम्र भर बंधे रहते हैं. यह रिश्ता अक्सर किसी व्यक्ति के जीवन में सब से लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों में से एक होता है. आप एक ही माहौल में बड़े होते हैं, एक ही मातापिता से पैदा होते हैं और समान यादें और समान अनुभव साझा करते हैं.

इंटरनेशनल जर्नल औफ बिहेवियर डवलपमेंट में प्रकाशित एक नए शोध में यह दावा किया गया है कि चरित्र निर्माण में भाई बहन का अच्छा रिश्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया है कि भाई-बहन से अच्छा रिश्ता मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करता है और किशोरावस्था में जोखिम भरे व्यवहार के खतरे को कम करता है. इसी तरह अमेरिका की यूनिवर्सिटी आफ मिसौरी के मानव विकास एवं परिवार विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक शोधकर्ता सारा किल्लोरेन के मुताबिक अपने भाई-बहनों के साथ रिश्तों के आधार पर लोग सीखते हैं कि दूसरों से कैसे व्यवहार किया जाए. ऐसे भाई बहन जो एक दूसरे के विरोधी और नकारात्मक होते हैं वे अपने समकक्षों के साथ भी उसी प्रकार का व्यवहार करते हैं.

यह सच है कि विकास और आधुनिकता की तीव्र लहर ने सब से ज्यादा असर अगर किसी पर डाला है तो वे हमारे रिश्ते ही हैं. इंटरनेट, तकनीक, एक्सपोजर और लड़कियों की बढ़ती महत्वाकांक्षाएं ये तमाम ऐसे पहलू हैं जिन्होंने इंसान की सोच को बदलाव की ओर उन्मुख किया है. आज लड़कियां हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर आगे बढ़ रही हैं, वे आत्मनिर्भर हो रही हैं, माबाप का नाम रोशन कर रही हैं, घरों में बच्चों की संख्या कम होने लगी है, जीवन के प्रति लोगों की सोच बदली है, आगे बढ़ने के नए रास्ते खुले हैं और इस बदलती जीवन शैली का प्रभाव हमारे रिश्तों पर भी पड़ा है. एक ही कोख से जन्म लेने वाले भाई-बहन का रिश्ता भी इस बदलाव से अछूता नहीं रहा है.

ये आए हैं परिवर्तन :

खौफ की जगह दोस्ती को मिली है जगह

पहले भाई एक खौफ का नाम हुआ करता था. खासकर छोटी बहनें भाइयों से बहुत डरा करती थीं. रिश्ते में मधुरता तो होती थी फिर भी वे भाइयों से डरती थीं. भाई का नाम ही खौफ माना जाता था.

दिल्ली के लक्ष्मी नगर में रहने वाली निभा बताती हैं, ” हम तीन भाई बहन हैं. जब मैं छोटी थी तो बड़े भाई का रौब पापा जैसा था. जैसे पापा से डर लगता था वैसे ही बड़े भैया भी डरा कर रखते थे. उनसे कोई जरूरी बात करने के लिए कई-कई दिन सोचना पड़ता था. लेकिन आज इस रिश्ते में डर की जगह दोस्ती ने जगह ले ली है. मेरी खुद की बेटी 16 और की और बेटा 18 साल का है. दोनों में दोस्तों जैसा रिश्ता है. वे दोनों आपस में ऐसी बातें भी शेयर कर लेते हैं जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. मेरी बेटी अपने बड़े भाई के साथ कॉलेज लाइफ की हर बात शेयर कर लेती है. ऐसा ही भाई की तरफ से भी है. कोई भी काम करना हो दोनों एक-दूसरे की सलाह जरूर लेते हैं. यहाँ तक कि वे आपस में गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड की बातें भी करते हैं. एक दुसरे के साथ ठहाके लगाते हैं और सारे सीक्रेट्स भी शेयर करते हैं. ”

भाई अब बहन की निगरानी रखने के बजाए फ्रेंडली हुए हैं. वैसे भी अब घर में कई भाई बहन नहीं होते. ले दे कर अगर एक बहन है तो भाई उसी से हर तरह से जुड़ जाता है. रिश्ता अधिक गहरा और दोस्ताना हो जाता है.

बहनें भी करने लगी हैं भाई की आर्थिक मदद

भाई बहन का रिश्ता महज भावनाओं से जुड़ा ही नहीं रहा. ये व्यवहार में भी मजबूत हुआ है. महिलाओं की स्थिति समाज में पहले से सुदृढ़ हुई है. इसलिए जरूरत पड़ने पर बहनें अब आर्थिक तौर पर भी भाई की मदद करने में सक्षम हुई हैं. जबकि पहले यह सोच थी कि कैसी भी स्थिति हो भाई को ही बहन को कुछ देना है. अब ऐसी सोच में बदलाव आया है. महिला की पुरुषों पर कम हुई निर्भरता भी इसका कारण है.

निर्भरता की कमी

इसी तरह पहली भाई को बहन का रक्षक माना जाता था. बहनों को कहीं जाना हो तो भाई साथ जाते थे. कई दफा भाई को साथ चलने के लिए बहनों को मिन्नतें करनी पार्टी थीं क्योंकि उन्हें पता होता था कि पेरेंट्स अकेले नहीं जाने देंगे, इसलिए भाई भाव खाते थे. मगर अब बहनें इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि वे खुद कहीं भी अकेली जा सकती हैं. यहाँ तक कि दुसरे शहर या दूसरे देश जा कर भी अकेली रह लेती हैं. इस से बहनों की भाइयों पर निर्भरता कम हुई है.

बराबरी का रिश्ता

आज भाई बहन का रिश्ता बराबरी का रिश्ता बन चुका है. यह एक ऐसा रिश्ता है जिस में बराबरी भी है और दोस्ती भी, जिस में प्यार भी है और तकरार भी. दोनों एक दूसरे के सुख को बांटते हैं और परेशानी में ढाल बनकर खड़े रहते हैं. इस रिश्ते में वो मर्म है जो इंसान के दिल को छूता है. आज बहन जहां अपने भाई में पिता, दोस्त और सहायक की छवि देखती है वहीं भाई भी अपनी बहन में माँ और दोस्त के अहसास साथ साथ एक इमोशनल सपोर्ट को महसूस करता है. उसके लिए बहन वह है जिससे कभी प्यार से, कभी लड़ कर, कभी रूठ कर तो कभी घूस देकर अपना हर काम करवाया जा सकता है. बहन ही है जो उसे समझती है और माता पिता की डांट से भी बचाती है. वहीं भाई भी अपनी बहन के साथ हर सुख -दुःख में खड़ा रहता है. उसके लिए पूरी दुनिया से भी लड़ने से नहीं डरता.

भाईबहन के बीच संपत्ति विवाद

संपत्ति को लेकर झगड़ा तकरीबन हर तीसरे परिवार में देखने को मिलता है. खासकर आजकल भाई बहनों के बीच भी संपत्ति विवाद होने लगे हैं. किसी-किसी जगह यह बगैर कानून के हस्तक्षेप के हल हो जाता है तो कहीं बात कोर्ट कचहरी तक पहुंच जाती है.

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 पैतृक संपत्ति में बेटों के साथ ही बेटियों को भी बराबर अधिकार दिया गया है. कानून में संशोधन से पूर्व केवल परिवार के पुरूषों को ही उत्तराधिकारी का दर्जा दिया जाता था. हिंदू उत्तराधिकार कानून के मुताबिक संपत्ति दो तरह की होती है. एक संपत्ति पिता द्वारा खरीदी गई संपत्ति और दूसरी पैतृक संपत्ति होती है जो पिछली 3 पीढ़ियों से परिवार को मिलती आई है. कानून के मुताबिक बेटा हो या बेटी पैतृक संपत्ति पर दोनों का जन्म से बराबर का अधिकार होता है. इस तरह की संपत्ति को कोई पिता अपने मन से किसी को नहीं दे सकता यानी किसी एक के नाम पर वसीयत नहीं कर सकता और ना ही बेटी को उसका हिस्सा देने से वंचित कर सकता है. अगर पिता ने कोई संपत्ति खुद अपनी आय से खरीदी है तो उसे अपनी इच्छा से किसी को भी ये संपत्ति देने का अधिकार है. कानून के मुताबिक अगर पिता की मौत हो गई और उसने खुद अर्जित संपत्ति की वसीयत मृत्यु से पहले नहीं बनाई थी तो ऐसी स्थिति में उसकी संपत्ति उसके बेटे और बेटियों में बराबर बराबर बांटी जाएगी.

अकसर भाई घर की लड़कियों को पैतृक संपत्ति का हिस्सेदार मानने से बचते हैं. यही वजह है कि कई बहनें आज भी अपने हक से वंचित रह जाती हैं पर बहनों को यह पता होना चाहिए कि पिता एवं भाई के साथ आप भी पैतृक संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार हैं. सिर्फ भाई के साथ रिश्ता खराब होने के डर से आप को अपने इस अधिकार से वंचित रहने की जरुरत नहीं है. रिश्ता अपनी जगह है और आप का हक़ अपनी जगह.

इसलिए यदि भाई पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने से इन्कार कर दें तो आप अपने अधिकार के लिए कानूनी नोटिस भेज सकते हैं. आप संपत्ति पर अपना दावा पेश करते हुए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर सकते हैं. मामले के विचाराधीन होने के दौरान प्रापर्टी को बेचा न जाए यह सुनिश्चित करने के लिए आप उस मामले में कोर्ट से रोक लगाने की मांग कर सकते हैं. मामले में अगर आपकी सहमति के बिना ही संपत्ति बेच दी गई है तो आपको उस खरीदार को केस में पार्टी के तौर पर जोड़कर अपने हिस्से का दावा ठोकना होगा.

पर कानूनी लड़ाई के बावजूद बहनों को भाई के साथ रिश्ता सामान्य बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए. जब आपस में मिलें तो रिश्ते की गर्माहट बरकरार रखें.

जिनके भाई या बहन नहीं वे होते हैं स्वार्थी

कुछ सर्वेक्षणों में भाई बहनों के बारे में रोचक तथ्य सामने आए हैं. हाल ही में हुए एक सर्वे में सामने आया है कि जो बच्चे अकेले होते हैं वे बड़े होकर स्वार्थी प्रवृत्ति के निकलते हैं. ये अध्ययन चीन के एक विश्वविद्यालय की ओर से कराया गया. इसमें कहा गया है कि जिन बच्चों का बचपन अकेलेपन में गुजरता है उनका दिमाग भी सामान्य बच्चों से अलग हटकर विकसित होता है. यह अध्ययन विश्वविद्यालय में पढ़ रहे 250 छात्र-छात्राओं पर किया गया. इनमें आधे वो लोग थे जिनके कोई भाई बहन नहीं था. जो बच्चे परिवार में अकेले थे वैज्ञानिकों ने उनके मस्तिष्क का अध्ययन किया और फिर इस आधार पर उनके व्यक्तित्व से जुड़ी आदतों का पता चला. जो बच्चे अकेले होते हैं उनकी दिमागी बनावट सामान्य बच्चों के मुकाबले अलग होती है और यही उन्हें स्वार्थी बनाती है.

यह रिश्ता बहुत अमूल्य और अनोखा है. इसे संभाल कर रखिए. इसे सहेजिए क्योंकि इस रिश्ते की बराबरी कोई नहीं कर सकता.

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