क्रिकेट की दुनिया में ‘आईसीसी क्रिकेट सुपर लीग’ नई लीग है. इसे विश्व क्रिकेट की नियामक संस्था इंटरनेशनल काउंसिल आफ क्रिकेट लेकर आयी है. इस लीग में आईसीसी के 12 फुलटाइम मेंबर के साथ 13 देश खेलेंगे. हर टीम को अगले दो सालों के भीतर 24 वन डे मैच खेलने होंगे. इस लीग का पहला वन डे 30 जुलाई 2020 को इंग्लैंड और आयरलैंड के बीच सम्पन्न हो चुका है, जिसमें इंग्लैंड बायें हाथ के तेज गेंदबाज डेविड विली के 30 रन पर पांच विकेट की तूफानी गेंदबाजी और सैम बिलिंग्स की 67 रनों की शानदार पारी की बदौलत जीत हासिल की.

क्रिकेट की यह सुपर लीग कई मायने में महत्वपूर्ण है. इससे जहां विश्व क्रिकेट का दायरा बड़ा होगा, दुनिया में क्रिकेट को गंभीरता से लिये जाने की कोशिश होगी, वहीं इससे क्रिकेट के उन उभरते हुए देशों को भी दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलेगा, जो देश और उनके खिलाड़ी क्रिकेट के ग्लोब में अपनी बड़ी जगह बनाना चाहते हैं, मसलन आयरलैंड, नीदरलैंड, अफगानिस्तान आदि. इस लगातार चलने वाली सुपर लीग के कारण अगले वल्र्ड कप क्रिकेट में वे 10 टीमें हिस्सा लेंगी जो लगातार बेहतर खेल रही होंगी और जो वास्तव में बाकी बची टीमों के मुकाबले ज्यादा अच्छी होंगी. एक तरह से यह लीग लगातार क्रिकेट की अच्छी टीमों को छांटेगी और अंत में दुनिया को विश्व कप क्रिकेट के रूप में शानदार और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का कौशल दिखायेगी.

क्रिकेट के जो 12 स्थायी सदस्य देश हैं उनमें- भारत, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, आॅस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, वेस्टंइडीज, अफगानिस्तान, आयरलैंड और जिम्बाब्वे शामिल हैं. इनमें एक और देश ने दस्तक दी है, वह है नीदरलैंड, जिसने साल 2017 में हुई वल्र्ड क्रिकेट लीग चैंपियनशिप जीती थी. इस तरह देखें तो अब आईसीसी के 12 नहीं बल्कि 13 फुलटाइम मेंबर देश हो गये हैं. लेकिन अभी नीदरलैंड को पूरी तरह से मान्यता नहीं मिली है, इसलिए क्रिकेट के फुलटाइम मेंबर 12 ही माने जाते हैं. सुपर लीग का जिस तरीके से ढांचा और कार्यक्रम निर्धारित किया गया है, उससे लीग की हर टीम 8 अन्य टीमों से 3-3 मैच की सीरीज खेलेगी.

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इन सीरीज में से 4 सीरीज घर में और 4 विदेश में खेली जायेंगी. कहने का मतलब यह है कि हर टीम को 24 वन डे खेलकर प्वाइंट जुटाने होंगे. इन्हीं प्वाइंट के आधार पर साल 2023 के वल्र्ड कप क्रिकेट की मेरिट बनेगी. यह वास्तव में वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप के तर्ज पर ही हो रही है. लीग के मैच आईसीसी के फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम का हिस्सा होंगे. कहने का मतलब इस लीग की सीरीज के लिए अलग से कोई स्लाॅट नहीं बनाया जायेगा. जहां तक इस सीरीज के चलते नंबर जुटाने की बात है तो जीतने पर हर टीम को 10 प्वाइंट मिलेंगे. अगर मैच टाइ हो जाता है या रद्द हो जाता है तो दोनो ही टीमों को 5-5 अंक बांट दिये जाएंगे. लेकिन किसी टीम को हारने पर एक भी अंक नहीं मिलेगा.

यह सुपर लीग भारत में सम्पन्न होने वाले 2023 के वल्र्ड कप क्रिकेट हेतु एक किस्म से बड़े स्तर पर चयन का जरिया है. लेकिन ध्यान रखिए इस वल्र्ड कप के लिए जो प्रारंभिक 8 टीमें तय होंगी, उनमें एक भारत होगा और भारत को चुने जाने की दरकार नहीं हैं. मतलब यह कि 7 टीमें चुनी जाएंगी, भारत को मेजबान होने के नाते 2023 के वल्र्ड कप में पहले ही पहुंच चुका है. प्वाइंट टेबल पर नीचे की पांच टीमों को एक बार फिर वल्र्ड कप क्रिकेट खेलने के लिए मौका मिलेगा, जब निचली पांच टीमों को क्वालीफाई टूर्नामेंट खेलना होगा. इस तरह 2023 के वल्र्ड कप में 8 मूल, 2 और कुल मिलाकर 10 टीमें टूर्नामेंट खेलेंगी. इस सुपर लीग के टाइम टेबल को देखकर आम क्रिकेट प्रेमियों के दिमाग में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अगले दो सालों मंे सिर्फ सुपर लीग के ही वन डे मैच होंगे? तो इस सवाल का जवाब है कि ऐसा नहीं है. कई टीमें सुपर लीग से अलग भी सीरीज खेलेंगी. यही नहीं ऐसा भी हो सकता है कि किन्हीं दो देशों के बीच खेली जाने वाली कोई सीरीज तीन मैचों से ज्यादा की हो और उसके महज तीन मैचों को ही आईसीसी लीग का हिस्सा माना जाए.

अब कई लोगों के जहन में एक सवाल यह पैदा हो रहा होगा कि जब 13 नियमित क्रिकेट खेलने वाले देशों में से 8 मुख्य टीमें टूर्नामेंट के लिए चुन ली जाएंगी तो नीचे की बची 5 टीमें किस तरह क्वालीफाइ करेंगी? ये क्वालीफाइ टूर्नामेंट खेलेंगे, इन पांच टीमों से खेलने के लिए पांच अन्य टीमें चैलेंजर और लीग टू से आएंगे. इनमें चैलेंजर से तीन और लीग टू से दो टीमें आएंगी. इन 10 टीमों में से 2 टीमें वल्र्ड कप के लिए क्वालीफाइ करेंगी. सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या आईसीसी के इस बहुनियोजित टूर्नामेंट को कोरोना की नजर तो नहीं लग जायेगी? तो कहना होगा कि ऐसा अभी तक के हिसाब से तो लगता है नहीं हो पायेगा. हालांकि इस लीग को 1 मई 2020 से शुरु होना था, लेकिन कोरोना के कारण 30 जुलाई 2020 को पहला मैच खेला गया है. बहरहाल कहने की बात ये है कि अभी तक दावे से यह नहीं कहा जा सकता कि कोरोना का इसमें फर्क पड़ेगा या नहीं.

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हां, नियमों के हिसाब से इसमें कई बदलाव होंगे. फ्रंट फुट, नो बौल इस टूर्नामेंट में इसे फील्ड अंपायर नहीं देंगे बल्कि यह थर्ड अंपायर का काम होगा. …और हां, दो चीजें और समझ लीजिए कोरोना के कारण अगर किसी टीम पर स्लो ओवर फेंकने का आरोप लगता है तो इससे उस टीम के प्वाइंट भी कटेंगे.

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