हाल ही में अमेरिका के सब से अधिक उम्र (78 साल) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महिला अधिकारों की वकालत करने वाली अपनी प्रतिद्वंद्वी कमला हैरिस (Kamala Harris) को हरा दिया. यह हार क्या सिर्फ हैरिस की है या फिर इस के पीछे पूरी महिला जाति की हार छिपी हुई है? दुनिया के सब से शक्तिशाली देश की महिलाएं अपनी पसंद के प्रतिनिधि को राष्ट्रपति बनाने में नाकाम रहीं और अब आने वाले 4 साल डरडर कर जीने को विवश रहेंगी.

उन में इतनी कूबत नहीं थी कि वे एक लंपट, महिला अधिकारों को नजरअंदाज करने वाले, रंगभेदनस्लभेद का हिमायती, सनकी और विलासी वृद्ध व्यक्ति को इस गद्दी पर काबिज होने से रोक पातीं और महिलाओं के लिए काम करने वाली महिला प्रतिनिधि को अपना राष्ट्रपति चुन पातीं.

सुप्रीम कोर्ट के रो बनाम वेड फैसले और गर्भपात को ले कर संवैधानिक अधिकार के निर्णय को पलटने के बाद अमेरिका के पहले राष्ट्रपति चुनाव में जीत मिली कट्टरपंथी और औरतों को एक वस्तु सम?ाने वाले ट्रंप को. गर्भपात के मुद्दे को ले कर महिलाएं बड़ी संख्या में हैरिस का समर्थन करती दिखी थीं. मगर हैरिस के पहली महिला राष्ट्रपति बनने की संभावना को ?ाटका लग गया.

जीत के लिए उम्मीदवार को 270 इलैक्टोरल वोटों की जरूरत थी और ट्रंप को 312 इलैक्टोरल वोट मिले. डैमोक्रेट हैरिस को सिर्फ 226 वोट ही मिले. रिपब्लिकन ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में जीत हासिल की.

गर्भपात से बैन हटाने के लिए चल रहा संघर्ष

अमेरिकी चुनाव अभियान के दौरान अबौर्शन यानी गर्भपात एक बड़ा मुद्दा था. अमेरिका में कई लोग अबौर्शन की मांग कर रहे हैं. कई लोग गर्भपात को महिला अधिकार से जोड़ कर देख रहे हैं. कमला हैरिस ने दावा किया था कि उन की सरकार आएगी तो गर्भपात को कानूनी तौर पर देशभर में मंजूरी दी जाएगी लेकिन ट्रंप के आने से गर्भपात की मांग करने वालों की चिंता अब बढ़ गई है.

दरअसल, 2022 के जून महीने में सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात को मंजूरी देने वाले लगभग 5 दशक पुराने फैसले को पलट दिया था. गर्भपात को नैतिक और धार्मिक रूप से कोर्ट ने गलत करार दिया था. कोर्ट ने ऐंटीअबौर्शन ला को अपने अनुसार और कड़ा करने की बात भी कही थी. इसके बाद कई राज्यों में अबौर्शन क्लीनिकों पर ताला लगा दिया गया. क्लीनिक बंद होने की वजह से कई महिलाएं  मजबूरन घर पर असुरक्षित तरीके से अबौर्शन कराने को मजबूर हैं.

अबौर्शन के अधिकार का विरोध

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की पहली बहस में डोनाल्ड ट्रंप ने अबौर्शन पर स्पष्ट रुख अपनाने से इनकार किया था और इसे राज्यों पर छोड़ने की बात कही थी. ट्रंप का प्रशासन अमेरिका के अबौर्शन विरोधी आंदोलन के समर्थन में स्पष्ट रूप से खड़ा रहा. राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने एक ‘प्रोलाइफ’ राष्ट्रपति होने का दावा किया और अबौर्शन के खिलाफ कई प्रतिबंधों का समर्थन किया. ट्रंप ने 3 सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों को नियुक्त कर के अबौर्शन विरोधी आंदोलन को बल दिया जिस ने अबौर्शन के अधिकार को समाप्त कर दिया.

ट्रंप ने फेडरल जजों की नियुक्ति करते समय ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जो अबौर्शन के खिलाफ थे जिस के कारण महिला अधिकार संगठनों और अबौर्शन समर्थक कार्यकर्ताओं ने इस पर आपत्ति भी जताई थी. अबौर्शन का अधिकार महिलाओं के लिए एक व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकार का विषय होने के बावजूद ट्रंप की नीतियों के कारण इन्हें कानूनी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

अबौर्शन पर ट्रंप का सब से विवादास्पद कदम ‘मैक्सिको सिटी पौलिसी’ को रीवाइव करना था जिस में उन अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को आर्थिक सहायता नहीं दी जाती जो अबौर्शन सेवाएं प्रदान करते हैं या इस के पक्ष में हैं. यह नीति उन महिलाओं के लिए भी हानिकारक रही जिन्हें स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों पर निर्भर रहना पड़ता था.

ट्रंप का महिलाओं के प्रति नीचा नजरिया

ज्यादातर लोगों का मानना है कि ट्रंप एक रक्षक नहीं बल्कि एक भक्षक हैं. अमेरिकी इतिहास में यह एक अजीब मोड़ लगता है कि 2 राष्ट्रपति चुनावों में 2 महिला उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ने वाला एकमात्र व्यक्ति वह है जिस का महिलाओं को नीचा दिखाने का एक लंबा और स्पष्ट रिकौर्ड है. डोनाल्ड जे. ट्रंप ने बारबार अपने रास्ते में खड़ी महिलाओं पर हमला करने, उन्हें शर्मिंदा करने और धमकाने की कोशिश की है.

ट्रंप ने महिलाओं को डराने के लिए अपनी शारीरिक उपस्थिति और शारीरिक भाषा का इस्तेमाल किया है, परोक्ष रूप से धमकियां दी हैं और उन की योग्यताओं को इस तरह से कमतर आंका है जिसे कई महिलाएं खुले तौर पर लैंगिक भेदभाव मानती हैं.

ट्रंप के ट्विटर अकाउंट पर महिलाओं के लुक्स के बारे में कई अपमानजनक टिप्पणियाँ हैं. ट्रंप ने एक बार ‘सैलिब्रिटी अप्रैंटिस’ में एक प्रतिभागी से कहा था, ‘उसे घुटनों के बल देखना एक सुंदर तसवीर होगी.’ क्या आपको ऐसा लगता है कि यह उस व्यक्ति का स्वभाव है जिसे एक राष्ट्रपति के रूप में चुना जाना चाहिए था?

हिलेरी क्लिंटन ने एक किताब में लिखा, ‘‘उन्हें महिलाओं को अपमानित करना पसंद है, हम कितने घृणित हैं इस बारे में बात करना पसंद है. वे मु?ो डराने की कोशिश कर रहे थे.’’

सार्वजनिक और निजी जीवन में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि महिलाएं उन के लिए इंसान के रूप में नहीं बल्कि सैक्स औब्जैक्ट के रूप में माने रखती हैं. यहां तक कि जिन महिलाओं को वे पसंद करते हैं और जिन की प्रशंसा करते हैं उन के साथ भी उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे उन की खूबसूरती को सब से ज्यादा महत्त्व देते हैं.

उन्होंने अपने व्यवहार को अपने दफ्तरों, अपने रिसौर्ट्स और अपने टीवी शो में भेदभावपूर्ण नीतियों में बदल दिया. जो महिलाएं उन्हें आकर्षक लगीं उन्हें परेशान किया और अपने कर्मचारियों से उन महिलाओं को नौकरी से निकालने का आग्रह किया जिन्हें वे आकर्षक नहीं मानते थे.

ट्रंप का कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव करने का भी लंबा रिकौर्ड है. जब ट्रंप किसी महिला को नापसंद करते हैं तो उन की प्रवृत्ति उस के शारीरिक रूप का अपमान करने की होती है. जब वे किसी महिला को पसंद करते हैं तो वे इस के विपरीत करते हैं और तुरंत उस की सुंदरता की प्रशंसा करते हैं. अगर ट्रंप महिलाओं का सम्मान करते तो उन्हें इस बात की परवाह होती कि वे क्या सोचती हैं.

इवाना ट्रंप (ट्रंप की पहली पत्नी) ने तलाक के बयान में कहा था कि ट्रंप ने उन के साथ बलात्कार किया.

एक बार उन्होंने अपनी बेटी इवांका के क्बारे में कहा था, ‘‘मेरी बेटी इवांका 6 फुट लंबी है, उस की बौडी अच्छी है और उस ने मौडल के रूप में बहुत पैसा कमाया है. अगर इवांका मेरी बेटी नहीं होती तो शायद मैं उस से डेटिंग कर रहा होता.’’

विरोध में शुरू किया 4बी मूवमैंट

डोनाल्ड ट्रंप के हाल ही में पुन: निर्वाचित होने से महिला अधिकारों और लैंगिक समानता पर बहस फिर से शुरू हो गई है जिस से पूरे अमेरिका में ‘4बी मूवमैंट’ की नई लहर पैदा हो गई है. मूल रूप से दक्षिण कोरिया से उभरने वाला 4बी मूवमैंट महिलाओं को पुरुषों के साथ डेटिंग, विवाह, यौन संबंध और बच्चे पैदा करने से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करता है. इसे अमेरिका में विवादास्पद चुनाव के बाद अपनाया जा रहा है जहां गर्भपात के अधिकार जैसे मुद्दों ने केंद्रीय भूमिका निभाई. आंदोलन के अधिवक्ताओं का तर्क है कि विभिन्न सामाजिक नीतियों पर ट्रंप के रुख, विशेष रूप से अबौर्शन अधिकारों के प्रति उन के दृष्टिकोण ने महिलाओं को अपने निजी जीवन में अधिक कठोर रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया है.

ट्रंप के फिर से चुने जाने के बाद से एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफौर्म पर ‘4बी’ बैनर के तहत पोस्ट में उछाल देखा गया है जिस में कई महिलाएं विरोध के रूप में पुरुषों के साथ संबंधों से बचने के लिए रैली कर रही हैं. इस मूवमैंट का सार है कि अगर वे हमारे शरीर पर कब्जा करना चाहते हैं तो हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे.

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