‘‘बेटा, इन अखबारों में तेरे और उस ऐक्टर के बारे में न जाने क्याक्या ऊटपटांग छपता रहता है,’’ इस बार मां ने बात छेड़ी थी, ‘‘अभी तेरी उम्र ही क्या है… और इन बदतमीजों को देखो कुछ भी छापते रहते हैं.’’
रूहानी चुप रही थी. भले ही उस की उम्र अभी केवल 19 वर्ष थी, किंतु सफलता और शोहरत का फल वह चखने लगी थी. फिर ऐसे में परिपक्वता जल्दी आ जाना क्या बड़ी बात है? सहकलाकार विनोद उसे बहुत पसंद था. हो सकता है उस की आंखों के भाव किसी पत्रकार ने पकड़ लिए हों. उड़ती चिडि़या के पंख गिनना कला जो होती है इन की. इन्हीं रिपोर्टों के चलते विनोद को रूहानी के मन की बात ज्ञात हो गई थी.
एक दिन मौका देख उस ने रूहानी को कौफी डेट पर बुलाया. दोनों को एकदूसरे का साथ पसंद आया. फिर तो अकसर वे शूटिंग के बाद मिलने लगे. कभी कौफी तो कभी डिनर, कभी पब तो कभी डिस्को. 35 की उम्र पार कर चुके विनोद के साथ एक कमसिन सुंदरी लग गई थी.
एक रात पांचसितारा होटल के डिस्को की भीड़ में नाचतेनाचते विनोद ने अचानक रूहानी के अधरों पर अपने होंठ अंकित कर दिए. इस अप्रत्याशित घटना से रूहानी कुछ कांप उठी. लेकिन विनोद ने उस की कमर पर अपनी बांहों के घेरे को और कस दिया. फिर लगातार एक…दो…तीन… चुंबनों के बाद रूहानी भी उसी लौ में बह गई. उसी होटल में पहले से बुक कमरे में विनोद ने रूहानी को अपना बना लिया.
फिर रूहानी को विनोद का भरी भीड़ में हाथ पकड़ने या हंस कर उस के कंधे पर झूल जाने में कोई आपत्ति न रहने लगी. धीरेधीरे मीडिया में इन दोनों के प्रसंग इन की तसवीरों के साथ उछलने लगे. एजेंट के ऐतराज करने पर भी रूहानी ने एक न सुनी. लेकिन मीडिया के पूछने पर दोनों यही कहते कि वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं. दोनों की नजदीकियों के किस्से लोग मजे लेले कर पढ़़तेसुनते. यूनिट के अन्य कलाकार भी उन की वैनिटी वैन के अंदर खिल रही उन की दास्तां ए मुहब्बत की कहानियां सुनाते.
इस विषय में मां का फोन आने पर रूहानी उन्हें भी झिड़क देती, ‘‘क्या मां, तुम भी इन प्रैस वालों की बातों में आ जाती हो. अच्छा अब रखती हूं… मेरी शूटिंग चल रही है.’’
‘‘सोनी चैनल पर चल रहे ‘तुम्हारे बिना जिया जाए न’ धारावाहिक की लीड अभिनेत्री मां बनने वाली है. अब ज्यादा दिन तक यह रोल नहीं निभा पाएगी. तुम कहो तो उस के डाइरैक्टर से इस विषय में तुम्हारी बात चलाऊं?’’ रूहानी के एजेंट ने उसे अंदर की खबर दी, तो रूहानी ने हामी भर दी. अपने कैरियर में आगे बढ़ने से वह खुश थी.
‘‘आज का अखबार पढ़ा तुम ने, रूहानी?’’ अचानक अपनी सहअभिनेत्री मिथिला का फोन आने पर रूहानी को आश्चर्य हुआ. आखिर मिथिला की उस से सिर्फ नाम की बनती थी, मीडिया के सामने या पार्टियों में एकदूसरे के गाल पर चुंबन अंकित करने के सिवा शायद ही इन में कोई बातचीत होती हो.
‘‘अभी नहीं, टाइम नहीं मिला. वह दरअसल मुझे सोनी चैनल पर चल रहे ‘तुम्हारे बिना जिया जाए न’ धारावाहिक की लीड अभिनेत्री का रोल औफर हुआ है न. उसी की तैयारी में व्यस्त थी. क्यों ऐसा क्या आया है अखबार में?’’
‘‘वह रोल तुम्हें औफर हुआ है?’’ मिथिला की हंसी की आवाज से रूहानी और भी हैरान हुई. यहां इस इंडस्ट्री में तो रोल छीनने की होड़ लगी रहती है. इस खबर से मिथिला को रोना चाहिए था, लेकिन मुझे लीड ऐक्ट्रैस का रोल मिलने पर वह हंस रही है…
‘‘शायद ‘तुम्हारे बिना जिया जाए न’ धारावाहिक में ‘तुम्हारे’ का किरदार विनोद की प्रेमिका के नाम ही आना लिखा है. वह दरअसल इस धारावाहिक की असली अभिनेत्री विनोद के बच्चे की मां बनने वाली है और दोनों शादी कर रहे हैं. मैं ने सोचा विनोद तुम्हारा इतना अच्छा दोस्त है, तो तुम्हें तो यह खुशखबरी पता ही होगी,’’ मिथिला ने आग में घी डाला.
रूहानी का मन धुड़क उठा कि उस के साथ इतना बड़ा धोखा, विश्वासघात. उस ने तेजी से फोन जमीन पर पटक मारा. उस का मन शोक, घृणा, संताप से भर उठा. वह वहीं जमीन पर पसर गई. न जाने कितने घंटे वहीं पड़ी रही.
देर शाम उस का एजेंट उस के घर के अंदर प्रविष्ट होते हुए बड़बड़ाया, ‘‘कहां हो यार रूहानी, कब से तुम्हारा फोन ट्राई कर रहा हूं,’’ फिर उस की दशा देख वह समझ गया कि खबर रूहानी तक पहुंच चुकी है. उसी ने रूहानी को वहां से उठाया, पानी पिलाया और फिर बिस्तर पर लिटाया.
अगली सुबह भी एजेंट वहीं था. गुड मौर्निंग कहते हुए उस ने रूहानी को चाय का कप थमाया, ‘‘क्या हुआ डार्लिंग… ऐसा तो होता रहता है. यू डोंट नीड टु गैट सो अप्सैट.’’
‘‘रियली? तुम्हें वाकई लगता है कि मुझे अप्सैट नहीं होना चाहिए? उस कुत्ते ने मेरे साथ…’’ रूहानी फुंफकार रही थी.
‘‘देखो रूहानी, बीत गई सो बात गई. यहां काम करना है, तो चमड़ी मोटी करनी पड़ेगी. टीवी की दुनिया लाजवाब है. रातोंरात प्रसिद्धि, रातोंरात कामयाबी… कल तक तुम एक छोटे शहर की अनजान जिंदगी जीने वाली लड़की थीं, लेकिन आज तुम घरघर में जानीमानी हस्ती बन चुकी हो. तुम्हारे पास पैसा है, शोहरत है, लोग तुम्हारे आगेपीछे दौड़ते हैं… उस पर तुम्हारी उम्र ही क्या है? अभी तुम्हें सालोंसाल काम करना है. इसलिए तुम्हें अपनेआप को बहुत ज्यादा तवज्जो देनी होगी. जितना तुम आगे बढ़ती जाओगी, उतना ही लोग तुम्हें कम समझ पाएंगे और यही तुम्हारे लिए अच्छा है. तुम्हारे निर्णय केवल तुम्हारे अपने हित में होने चाहिए… न कोई पारिवारिक निर्णय और न कोई भावनात्मक फैसला. पूरी दुनिया की नजर है तुम पर. ऐसे में कमजोर नहीं पड़ सकतीं तुम. इस का समय नहीं, तुम्हारे पास,’’ एजेंट ने रूहानी को खूब समझाया.
लेकिन हर इनसान अलग मिट्टी का बना है. सब का व्यक्तित्व अलग होता है. रूहानी को ऐसे फरेब की कतई उम्मीद नहीं थी. जनवरी की सर्द हवाओं के साथ बाहर फैला घना कुहरा उस के अंदर भी जमने लगा था. बाहर का उदास, रंगहीन मौसम उस के अंदर भी पसरने लगा था. रूहानी न ढंग से खाती, न किसी बातचीत में उस का मन लगता, न मुसकराती… कई दिन लग गए उसे सामान्य होने में. किंतु समय अपना चक्र घुमाते हुए सब को अपनी धुरी पर ले ही आता है.
लेकिन इस बीच उस के हाथ से वह लीड ऐक्ट्रैस का रोल जाता रहा. अब उस के पास कोई काम नहीं था. फिर भी वह थी तो एक टीवी अभिनेत्री ही. अपना रहनसहन उसे उसी हिसाब से बरकरार रखना था. पैसे भी खत्म होते जा रहे थे. इसी बीच उस ने जो हाथ आया, वही काम करने का निश्चय किया. एजेंट की मदद से उस ने एक रिऐलिटी शो में भाग लिया. शो देश के बाहर था. रूहानी प्रसन्न थी कि इस बहाने वह विदेश घूम आएगी और कुछ पैसे भी कमा लेगी.
शो में उस की मुलाकात रंजन से हुई जो उस का टीममेट था. रंजन भी एक छोटे शहर का लड़का था, जो इस रंगीली दुनिया में अपने को आजमाने आया था. अभी तक उसे सिर्फ धक्के ही मिले थे. यह उस का पहला शो था. रूहानी और रंजन की अच्छी पटने लगी. टूटे दिल को एक आसरा मिलने लगा था. रंजन और रूहानी का अच्छा तालमेल उन्हें जीत की ओर अग्रसर करता गया. आखिर उन दोनों की टीम जीत गई. अच्छाखासा पैसा मिला.
अपने देश लौटते समय हवाईजहाज में रंजन ने रूहानी का हाथ अपने हाथ में ले कर कहा, ‘‘अपनी टीम जारी रखोगी? क्या तुम मेरा प्यार स्वीकार करोगी, रूहानी?’’ रंजन ने रूहानी को प्रपोज कर दिया.
रूहानी बेहद खुश थी. एक तो जीत, उस पर पैसा और अब प्यार भी… और क्या चाहिए किसी 21 वर्षीया को.
रंजन अब तक पीजी में रहता था और रूहानी किराए के घर में रहती थी. दोनों मिलते, संगसाथ समय व्यतीत करते, फिर अपनेअपने घर लौट जाते.
‘‘रूहानी, ऐसे तो जो पैसा हम दोनों ने जीता है, वह खत्म होता चला जाएगा. इस से अच्छा है हम उसे अपने भविष्य के लिए कहीं निवेश कर दें.’’
रंजन की बात में तर्क था. अत: दोनों ने आपसी सहमति से एक घर बुक करा लिया.
‘‘तुम लोन की चिंता मत करना, तुम्हें इस झंझट में पड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है. कुछ राशि हमारे पास है ही और कुछ मैं पर्सनल लोन ले लूंगा. ईएमआई मैं भरता रहूंगा. बस, कागजी काररवाई करवा लेते हैं.’’
लोन लेने की आवश्यकता के कारण घर रंजन के नाम बुक हुआ.