मन की शांति की तलाश में सुजय अपने एक दोस्त के कहने पर बाबा सेवकानंद के आश्रम पहुंचा. 2-3 घंटे बाबा का प्रवचन सुनने के बाद उस ने तय किया कि यहां हर सप्ताह आया करेगा. उस ने यही किया. हर सप्ताह वह बाबा के दर्शन के लिए पहुंचने लगा. बाबा की तेज नजर सुजय पर पड़ी तो उन्हें सम झ आ गया कि एक मोटा मुरगा फंसा है. मुरगे को हलाल करने के लिए थोड़ी तैयारी की जरूरत होती है. बाबा ने अपना पासा फेंकने की सोची और सुजय को पास बुलाया.
सुजय ने अपनी समस्या बताई. उस के समाधान के लिए बाबा ने उसे एक अनुष्ठान कराने की सलाह दी. यह अनुष्ठान आश्रम में होना तय हुआ और इस की तैयारी के लिए सुजय को क्व20 हजार की रकम लाने को कहा गया. सुजय ने रुपए दिए तो काम शुरू हुआ. हवन की सामग्री के साथ कुछ और चीजें मंगाई गईं. अनुष्ठान के दौरान भी उस से काफी रुपए खर्च कराए गए और फिर दानदक्षिणा के नाम पर भी बाबा ने काफी रुपए ऐंठे.
तय दिन हवन और अनुष्ठान संपन्न हुआ. बाबा ने बताया था कि अनुष्ठान वाली रात उसे सफेद कपड़े पहन कर एक कमरे में आश्रम में ही ठहरना होगा.
सुजय ने ऐसा ही किया. आधी रात को उस के कमरे में बाबा की 2 दासियों ने प्रवेश किया. उन्होंने अपनेअपने तरीके से सुजय को लुभाने और हमबिस्तर होने की कोशिश की तो सुजय का दिमाग चकरा गया. वह सम झ नहीं पा रहा था कि आश्रम की औरतें उस से इस तरह का व्यवहार करेंगी. वह रात में ही अपना सामान और बची इज्जत ले कर दफा हो गया.
इस घटना के कुछ दिन बाद एक बार जब सुजय औफिशियल मीटिंग के लिए शहर से बाहर गया हुआ था तो नेहा संजय के पास पहुंच गई. संजय को तो ऐसे ही मौकों का इंतजार रहता था. उस ने नेहा को बांहों में भर लिया.
तब नेहा शिकायती लहजे में बोली, ‘‘ऐसा कब तक चलेगा संजय. तुम मु झे प्यार करते हो तो अपना बनाते क्यों नहीं? इस तरह छिपछिप कर कब तक मिलते रहेंगे?’’
‘‘जब तक तुम्हारे बेवकूफ पति को पता न चले,’’ संजय ने कहा.
‘‘वह बेवकूफ नहीं और उसे सब पता चल चुका है.’’
‘‘तो ठीक है उस ने कुछ कहा तो नहीं न,’’ संजय ने पूछा.
‘‘कहा नहीं मगर मु झे लगता है जैसे वह बच्चे को ले कर इस शक में है कि वह उस का है या नहीं,’’ नेहा कुछ सोचती हुई बोली.
‘‘वह पति है तो बच्चा तो उसी का होगा न,’’ कह कर संजय बेशर्मी से हंसने लगा.
नेहा खुद को उस की गिरफ्त से आजाद करती हुई बोली, ‘‘दिल के हाथों मजबूर नहीं होती न, तो कभी तेरे पास नहीं आती. तु झे पता है वह बच्चा तेरा है मगर तू जिम्मेदारियां लेना ही नहीं चाहता. कहीं तू मेरे जज्बातों के साथ खेल तो नहीं रहा?’’
‘‘नहीं माई डियर. सैटल होते ही तु झ से शादी करूंगा और अपने बच्चे को अपना नाम भी दूंगा. अब तो खुश है,’’ कह कर संजय ने नेहा की आंखों में झांका तो वह फिर से उस के सीने से लग गई.
‘‘इसी आस में तो सबकुछ सह रही हूं. तू बस एक बार कह दे मैं सब कुछ छोड़ कर हमेशा के लिए तेरे पास आ जाऊंगी,’’ नेहा ने भावुक होते हुए कहा.
इसी तरह समय गुजरता रहा. नेहा के पेट में एक बार फिर संजय का बच्चा था. नेहा फिर से सुजय के ज्यादा करीब आने लगी ताकि बच्चे को ले कर उसे कोई शक न हो. इधर सुजय अपने दिल के हाथों मजबूर था. वह नेहा का सामीप्य पा कर उस से नाराज नहीं रह पाता था. दूसरी बार नेहा को बेटी हुई. फूल सी बच्ची को गोद में ले कर सुजय संजय का चैप्टर भूल गया और अपने परिवार के कंपलीट होने की खुशी मनाने लगा.
नेहा के बच्चे अब थोड़े बड़े हो गए थे. दोनों स्कूल जाने लगे थे. बच्चों को स्कूल और पति को औफिस भेज कर नेहा संजय से बातें करने में मशगूल हो जाती.
पीछे से जब सुजय फोन करता तो उसे नेहा का फोन व्यस्त मिलता. सुजय जब इस बात को ले कर टोकता तो नेहा बहाने बना देती कि वह मायके वालों से बातें कर रही थी. कई बार नेहा मायके जाने की बात कह कर संजय के साथ कहीं भी निकल जाती.
एक दिन नेहा ने संडे को ऐसा ही बहाना बनाया और चली गई. इधर सुजय ने अपना शक दूर करने के लिए नेहा के मायके फोन लगाया तो उसे पता चला कि नेहा वहां नहीं है. सुजय सम झ गया कि नेहा उस से अभी भी चीट कर रही है. वह फिर से परेशान रहने लगा.
इधर एक दिन जब नेहा सजधज कर संजय से मिलने पहुंची तो देखा कि संजय के घर से कोई और खूबसूरत लड़की निकल रही है.
यह देख कर नेहा संजय पर भड़क उठी, ‘‘यह क्या था संजय. अब मैं सम झी कि तुम मु झे आजकल इग्नोर क्यों करने लगे हो. तुम मेरे पीछे किसी और के साथ…’’
‘‘तो इस में कौन सी बड़ी बात हो गई नेहा. तुम भी तो किसी और मर्द के साथ रहती हो. मैं ने तो कभी कुछ नहीं कहा,’’ संजय बोला.
‘‘मैं मजबूरी में रहती हूं क्योंकि तुम ने मु झ से अब तक शादी नहीं की.’’
‘‘अब तक क्या नेहा. तुम भी पता नहीं किस मुगालते में जीती हो. 2 बच्चे की शादीशुदा महिला से मैं एक अविवाहित, हैंडसम, वैल सैटल लड़का शादी क्यों करेगा. उस पर तुम्हारी जाति अलग होने का पंगा भी है.’’
‘‘मगर तुम मु झ से प्यार करते हो न. शादी करने के लिए क्या यही एक वजह काफी नहीं?’’ नेहा ने पूछा.
‘‘नहीं माई डियर बिलकुल नहीं और फिर प्यार खत्म कहां हो रहा है. तुम जब चाहो आ सकती हो मेरा प्यार पाने के लिए.’’
‘‘डिसगस्टिंग संजय. मैं सोच भी नहीं सकती थी कि तुम इतना गिर सकते हो. मौम ने मु झे पहले ही आगाह किया था मगर मैं तुम्हारे प्यार में पागल बनी रही,’’ नेहा अपने किए पर पछता रही थी.
‘‘तो फिर एक बात और सुन लो डार्लिंग, मैं अगले महीने हिना से शादी करने वाला हूं,’’ संजय ने उसे हकीकत से अवगत कराया तो वह तड़प उठी.
‘‘शादी के वादे मु झ से और शादी किसी और से. तुम इतने निष्ठुर कैसे हो सकते हो संजय?’’ नेहा की आंखों में आंसू आ गए.
संजय हंसता हुआ बोला, ‘‘क्या यार तुम इतने सालों में यह नहीं सम झ सकी कि मेरी तुम से शादी करने में रुचि नहीं है. अब तो मैच्योर बनो और इस मामले को अच्छे से हैंडल करो.’’
‘‘बिलकुल अब मैं सबकुछ अच्छे से हैंडल करूंगी. तुम्हारे लिए मैं ने अपने पति से चीट किया, तुम्हारी हर गलती इग्नोर की, तुम्हारे धोखे को महसूस ही नहीं कर सकी. मगर अब सब क्लीयर हो गया,’’ कहते हुए उस ने दरवाजा खोला और जोर से बंद करती हुई बाहर निकल गई.
घर आ कर नेहा काफी देर तक रोती रही. संजय की तरफ से उस का मन पूरी तरह से खट्टा हो चुका था. उसे महसूस हो रहा था जैसे संजय ने उस के प्यार को मजाक बना दिया हो. उस के साथ संजय ने विश्वासघात किया था. उसे धोखा दिया था.
2-3 घंटे वह इस धोखे को याद कर सुबकती रही. पुरानी यादें जेहन में तीखे तीर बन कर चुभ रही थीं. उस ने संजय का फोटो निकाला जिसे उस ने कालेज के समय से संभल कर रखा था. फिर उस के छोटेछोटे टुकड़े कर डस्टबिन में फेंक दिए. अपने मोबाइल से संजय की सभी तसवीरें डिलीट कर दीं. इतने में भी सुकून नहीं मिला तो उस का नंबर भी ब्लौक कर दिया.