उस दिन कमर दर्द की वजह से तन्वी की तबीयत कुछ ढीली थी. सो औफिस से लौट कर उस ने पदम से कहा, ‘‘पदम, आज मेरी कमर बहुत दुख रही है. आज जरा खाना बाहर से मंगवा लेते हैं.’’
‘‘यह क्या मजाक है तन्वी? यह रोजरोज तुम खाना नहीं बनाने के बहाने बना कर बैठ जाती हो. मैं आए दिन होटलों का खाना नहीं खा सकता. चलो, उठो और खाना बनाओ.’’
पदम की बातें सुन कर तन्वी को बहुत जोर से गुस्सा आ गया और वह झंझलाते हुए बोली, ‘‘तुम्हें क्या लगता है, मैं खाना बनाने से बचने के लिए बहाना बना रही हूं? मेरी कमर में असहनीय दर्द हो रहा है. मैं ने आज बैंक में कैसे ड्यूटी दी है, मैं ही जानती हूं. और हां, ये रोज रोज की चिकचिक मुझे बिलकुल पसंद नहीं. मैं बाहर
से खाना मंगा रही हूं. तुम मुझ पर यों अपनी मरजी नहीं थोप सकते. मैं तुम्हारी कोई जरखरीद गुलाम नहीं.’’
मगर पदम एक बेहद निरंकुश स्वाभाव का रोबीला इंसान था जो अपनी पत्नी से हर वक्त हुक्मउदूली की अपेक्षा रखता था. सो तन्वी के खाना बनाने से इनकार पर वह बुरी तरह से
भड़क गया और उस पर गुस्से में बरसने लगा, ‘‘अपनी ड्यूटी की धौंस तो दो मत. तुम्हारे जैसे 10 क्लर्क मेरे अंडर काम करते हैं. हो क्या तुम? आखिर तुम्हारी औकात क्या है? तुम लोगों का काम कोई काम है? मेरे ऊपर पूरी ब्रांच की जिम्मेदारी है. मुझे पूरे स्टाफ से काम लेना होता है. एक दिन भी मेरी तरह मैनेजरी करनी पड़े तो नानी याद आ जाए.’’
दोनों में खूब बहस हुई और आखिरकार तन्वी को रात का खाना बनाना ही पड़ा.
वक्त के साथ दोनों के मतभेद गहराने लगे. आए दिन पदम उस से उल?ाता और घर में कलहकलेश करता. उसे नीचा दिखाता. बातबात पर अपने ऊंचे पद का रोब गांठता और उस की नौकरी का मजाक उड़ाता. बेबस तन्वी को यह सबकुछ झेलना पड़ता. उसे समझ न आता कि क्या करे.
उस दिन छुट्टी का दिन था. पिछले कई दिनों से तन्वी पदम के साथ ऊनी कपड़ों की
शौपिंग के लिए बाजार जाने का प्रोग्राम बना रही थी. सो उस ने पदम से कहा, ‘‘मेरे ऊनी कपड़ों का स्टौक एकदम खत्म हो गया है. आज शाम को बाहर चलते हैं.’’
इस पर पदम ने उसी समय अपने एक घनिष्ठ मित्र के परिवार को घर पर डिनर के
लिए यह कहते हुए इन्वाइट कर लिया कि वह फ्रैंड बहुत दिनों से उस के घर डिनर पर आने
के लिए पीछे पड़ा हुआ है. उस ने तन्वी से कहा कि वह उसे अगले संडे शौपिंग पर जरूर ले जाएगा.
जाहिर है, पदम की इस बात से तन्वी बहुत आहत हुई और वह उस पर यों अचानक बिना किसी प्लानिंग के उस के दोस्त को घर पर आमंत्रित करने पर बहुत ?ाल्लाई. उस दिन उस
ने बहुत ?ांकते खाना बनाया और मेहमानों को अटैंड किया.
आगंतुकों के जाने के बाद मन का असंतोष आंखों की राह बह निकला.
रोतेसुबकते उस ने पदम को खूब सुनाया
कि उसे उस की बिलकुल परवाह नहीं और वह एक बेहद इंसैंसिटिव हसबैंड साबित हो रहा है, जिस के साथ हंसीखुशी जिंदगी बिताना लगभग असंभव है. उस दिन उस ने पदम को पहली बार चेतावनी दी कि यदि उस ने उस के प्रति अपना रवैया नहीं बदला तो मजबूरन उसे उस से अलग हो कर जिंदगी बिताने के बारे में सोचना पड़ेगा, लेकिन पौरुषवादी तानाशाह स्वाभाव वाले पदम पर इस बात का कोई असर नहीं हुआ.
अगले संडे शौपिंग पर जाने पर एक मौल में गरम कपड़ों की शौपिंग करते वक्त उन में मामूली सी ?ाड़प हुई और दोनों के मध्य उस मामूली सी बहस ने देखतेदेखते उग्र रूप धारण कर लिया, जिस की परिणति पदम के तन्वी को मौल में अकेला छोड़ कर आने में हुई. रात के 9 बजे तन्वी बड़ी मुश्किल से अकेली घर पहुंची.
इस बार तन्वी की सहनशक्ति जवाब दे
गई और उस ने भी पदम को कस कर खरीखोटी सुनाई.
रात का 1 बज रहा था, लेकिन आज उस की आंखों में नींद नहीं थी. आज पदम के इस
रवैये ने उस के जेहन में खतरे की घंटी बजा दी. वह बैड पर करवटें बदल रही थी. पछता रही थी क्यों उस ने पदम जैसे बड़बोले, बातबात पर रोब जमाने वाले इंसान को अपनी शौपिंग में शामिल किया? उस के स्वाभाव को जानतेबूझते उसे अपना लाइफपार्टनर बनाया. इस से तो अच्छा होता सजल के शादी से इनकार करने पर वह कुंआरी ही रह जाती.
आज तन्वी को सजल के साथ बीता वक्त शिद्दत से याद आ रहा था. कितना केयरिंग था वह. उस की हर ख्वाहिश को पूरा करने में
जीजान लगा देता था. उस ने कभी उसे भूल कर भी अपमानित नहीं किया. सदैव उस का मान किया. उस की कद्र की. पदम की तरह कभी
उसे नीचा नहीं दिखाया और न कभी उस पर पदम की तरह रोब जमाया. सजल के बारे में सोचतेविचारते कब उस की आंख लग गई, उसे पता न चला.
पदम के साथ इस रोजरोज की अशांति से तन्वी बेहद परेशान रहने लगी. आए दिन के ?ागड़े उस की मानसिक शांति भंग करने लगे और इस का प्रभाव उस के स्वास्थ्य पर पड़ने लगा. वह अवसाद से घिरने लगी.
एक दिन तो हद ही हो गई. वे दोनों बैंक के किसी बड़े फंक्शन में गए हुए थे. खानेपीने का दौर चल रहा था. उन के बैंक के एक उच्च पदाधिकारी बहुत शौकीन मिजाज इंसान थे. पदम और बैंक के कुछ अन्य उच्च पदाधिकारियों के साथ पैग पर पैग चढ़ाए जा रहे थे. तभी उन की नजर एक कोने में बैठी तन्वी पर पड़ी. सुरुचिपूर्ण सोबर सजधज में वह बेहद खूबसूरत और कमनीय लग रही थी. अपनी रंगीनमिजाजी से मजबूर उन्होंने तन्वी से पूछा, ‘‘मैडम आप का परिचय?’’
‘‘जी मैं बैंक में कार्यरत हूं.’’
‘‘ओह, तब तो आप अपनी ही बिरादरी
की हैं.’’
अपने बौस को तन्वी से बात करते देख पदम दौड़ादौड़ा उन के पास गया और उस ने पत्नी का परिचय उन से कराया, ‘‘सर, यह मेरी वाइफ है.’’
‘‘ओह, ये आप की बैटरहाफ हैं? आई मस्ट से, यू आर इंडीड वैरी लकी तो हैव सच अ ब्यूटीफुल वाइफ यंग मैन.’’
फिर तन्वी की ओर मुखातिब होते हुए उन्होंने उस से कहा, ‘‘आप यहां अकेली कोने में बैठीबैठी क्या कर रही हैं… आइए हमारे साथ बैठिए. ड्रिंक्स बगैरा लीजिए. कुछ अपनी कहिए, कुछ हमारी सुनिए.’’