‘‘हैप्पी बर्थडे माई जान,’’ मेरे माथे को चूमते हुए मेरे पतिदेव अमित ने बड़े प्यार से मुझे जगाया, तो मैं अंगड़ाई लेते हुए उसे ‘थैंकयू’ बोल कर उठ बैठी.
तभी मेरे दोनों बच्चे ‘हैप्पी बर्थडे मौम… हैप्पी बर्थडे मौम…’ कहते हुए मेरे गले से झूल गए तो मैं धन्यधान्य हो गई कि हाय, मैं कितनी भाग्यवान हूं जो मेरे पति और बच्चों को मेरा बर्थडे याद रहा.
‘‘मम्मा… इस बर्थडे, आप 40 की हो जाएंगी न?’’ मेरी 18 साल की बेटी नियति बोली, तो अमित हंस पड़े और बोले, ‘‘हां, बर्थडे के बाद हमारी उम्र 1 साल आगे भाग जाती है पर तुम्हारी मौम की पीछे भाग रही है.’’
अमित की बातों पर बच्चों ने जोर का ठहाका लगाया. मैं ने अमित को घूर कर देखा, तो वे सकपकाते हुए बोले कि उन के कहने का मतलब है कि मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता.
‘‘इस बार मम्मा के ‘बर्थडे’ पर हम ग्रेट सैलिब्रेशन करेंगे, हैं न पापा?’’ मेरे 16 साल के बेटे अंकुर ने पूछा, ‘‘बर्थडे पर हम किसकिस को बुलाएंगे?’’
‘उस कामिनी को तो बिलकुल भी नहीं’ मैं मन ही मन बड़बड़ाई. ‘लेकिन बताना तो पड़ेगा उसे कि मैं अपना बर्थडे, होटल रीजेंटा में मनाने वाली हूं. देखना कैसे वह जलभुन कर खाक हो जाएगी. बहुत दिखाती रहती है न कि अपना बर्थडे वह हमेशा बड़ेबड़े होटलों में मानती है. तो इस बार मैं भी उसे दिखा ही दूंगी कि देख, मैं भी तु झ से कोई कम नहीं हूं,’’ मुंह ऐंठते हुए बोली.
सोचा पहले फोन कर के उसे अपने बर्थडे के बारे में बता ही देती हूं, तभी मेरे दिल को चैन पड़ेगा. लेकिन तभी मेरी सोच पर डंक मारते हुए अमित बोल पड़े, ‘‘क्यों न पार्टी अपने घर पर ही रखी जाए?’’
‘‘नहीं पापा, घर पर नहीं, पार्टी होटल में रखो,’’ अंकुर बोला.
मेरा भी यही मन था. अब घर में किस को क्या पता चलेगा. होटल में पार्टी करेंगे तो 10 लोग जानेंगे और फिर फेसबुक पर मु झे अपने बर्थडे के फोटो भी तो अपलोड करने हैं. अत: तय हुआ कि अमित औफिस जाते समय पहले होटल जा कर बात कर लेंगे और नियति केक और्डर कर लेगी. लेकिन आज 31 दिसंबर को होटल रीजेंटा में शायद ही ऐंट्री मिले.
सोच लिया था कि आज अपने बर्थडे, पर मैं क्या पहनूंगी. वही, रैड कलर की वनपीस ड्रैस, जो मैं ने औनलाइन और्डर कर के मंगवाई थी अपने लिए. अरे, अमित की पसंद कहां इतनी अच्छी है, तभी तो अपनी शौपिंग मैं खुद ही करती हूं. मेरे पिछले बर्थडे, पर वे इतने फीके रंग की ड्रैस उठा लाए थे कि क्या कहें. इसलिए तो इस बार मैं ने खुद ही अपने लिए औनलाइन ड्रैस मंगवा रखी थी. साथ में मैचिंग इयररिंग्स और ब्रेसलेट भी था. चप्पलें भी मैं मार्केट जा कर खुद ले आई थी.
‘‘आज मम्मा के बर्थडे पर चौकलेट ट्रफल केक आएगा. आप को पसंद है न मम्मा?’’ मुंह से लार टपकाते हुए अंकुर बोला.
‘‘नहीं, चौकलेट नहीं, ब्लू बैरी चीज केक आएगा क्योंकि मम्मा को वही पसंद है.’’
नियति की बात पर अंकुर भड़कते हुए बोला, ‘‘नहीं, मम्मा को यानी मु झे चौकलेट ट्रफल केक ही पसंद है, तो आज वही केक आएगा बस.’’
इसी बात पर दोनों झगड़ने लगे. एकदूसरे पर तकिया फेंकाफेंकी शुरू हो गई. एक चौकलेट ट्रफल केक की जिद पर अड़ा था तो दूसरी ब्लू बैरी चीज केक पर. लेकिन सच कहें तो मु झे इन दोनों केक में से कोई भी पसंद नहीं था. मु झे तो हमेशा से वैनिला केक ही पसंद आता है. लेकिन इन दोनों को पागलों की तरह झगड़ते देख मेरा मन खीज उठा. मन तो किया कहूं कि बेशर्मो… बर्थ डे मेरा है या तुम लोगों का, जो अपनी ही चला रहे हो तुम सब.
‘‘अच्छाअच्छा, अब झगड़ना बंद करो,’’ दोनों को शांत कराते हुए अमित बोले, ‘‘एक काम करते हैं, दोनों केक मंगवा लेते हैं. आखिर आज मेरी प्यारी बीवी का बर्थडे जो है,’’ मेरी ठुड्डी को हिलाते हुए अमित ने आंख मारी तो मैं शरमा कर लाल हो गई और अपना दुपट्टा संभालते हुए उठ कर चाय बनाने जाने ही लगी कि अमित ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बड़े ही रोमांटिक अंदाज में गुनगुनाने लगे कि हुजूर इस कदर भी न इतरा के चलिए… खुलेआम आंचल न लहरा के चलिए…’’
‘‘अरे, पापा को तो देखो कितने रोमांटिक हो रहे हैं,’’ अपनी गोलगोल आंखें घुमाते हुए अंकुर बोला, तो नियति भी खीखी कर कहने लगी कि हां, देखो न मम्मी भी कैसे पुरानी हीरोइन की तरह शरमा रही हैं.
बच्चों की बातें सुन झट से मैं ने अपना हाथ छुड़ा लिया और डपटते हुए बोली,
‘‘जा कर पढ़ाई करो दोनों. सुबह से बस बर्थडे, बर्थडे किए जा रहे हो. कोई कामधाम नहीं है क्या तुम लोगों को?’’
मगर जिद्दी अंकुर तो अपने पापा के पीछे ही पड़ गया, ‘‘बोलो न पापा, आज मम्मा को आप क्या गिफ्ट दोगे?’’
अंकुर की बात पर अमित आंख मारते हुए बोले, ‘‘आज रात मम्मा को एक स्पैशल गिफ्ट दे कर खुश कर देंगे.’’
पापा की बात पर दोनों बच्चे ‘हाईफाई कर जोर से हंस पड़े. गुस्से से मैं ने अमित की तरफ देखा कि क्या जरूरत थी बच्चों के सामने इतने रोमांटिक बनने की. आदत है अमित की, बच्चों के सामने ही शुरू हो जाते हैं. लेकिन सम झते नहीं कि आज के बच्चे, बच्चे नहीं रहे, बड़ों के कान काट रहे हैं. उन्हें क्या नहीं पता यह तो पूछो? और गूगल बाबा तो हैं ही ज्ञान बांटने के लिए, फिर किसी से कुछ पूछनेजानने की क्या जरूरत. लेकिन अमित हैं कि अपने इमोशन पर कंट्रोल ही नहीं रख पाते. सच कहती हूं, बच्चों के सामने मैं शर्मिंदा हो जाती हूं और अमित बच निकलते हैं.
खैर, मैं चाय बनाने जाने ही लगी कि नियति ने फिर यह कह कर मु झे रोक दिया कि आज मैं ‘बर्थडे गर्ल’ हूं तो मु झे कोई काम नहीं करना है.
‘‘बिलकुल, आज मेरी बीवी ‘बर्थडे गर्ल है इसलिए आज तुम स्पैशल फील करो. खाना, हम बापबेटी मिल कर बना लेंगे, ओके…,’’ बड़ा सा मुंह खोल कर जमहाई लेते हुए अमित बोले.