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हैरी ने गौरव का इन्विटेशन खुशीखुशी स्वीकार कर लिया. नेहा ने बड़ी मेहनत से स्पैशल इंडियन डिशेज तैयार कीं, मटरपनीर, मलाई कोफ्ता, भरवां भिंडी, दहीबड़े के साथ पूरियां और कचौडि़यां बनाईं. मेवा डाल कर चावल की खीर भी तैयार कर डाली.

हैरी दंपती ने ठीक 6 बजे कालबैल बजाई. दरवाजा खोल गौरव ने स्वागत किया. ‘‘गुड ईवनिंग, हमारे घर में आप का स्वागत है.’’

‘‘नमस्ते…’’ कुछ अटकते हुए मिसेज हैरी ने हिंदी में अभिवादन कर गौरव को विस्मित कर दिया.

‘‘अरे, आप हिंदी बोल सकती हैं?’’ पीछे से आई नेहा ने आश्चर्य से कहा.

‘‘हां, मेरा स्कूल में थोड़ा इंडियन स्टूडैंट्स हैं, वो सिखाया है.’’

‘‘यह तो बहुत अच्छी बात है, आइए, अंदर चलें,’’ नेहा की आंखों में प्रशंसा थी. सब के बैठने पर गौरव ने कुछ संकोच से कहा, ‘‘हमारा यह छोटा सा अपार्टमैंट है.’’

‘‘ओह, यह तो सुंदर घर है. अभी तुम्हारा स्ट्रगल पीरियड है. इस्टैब्लिश होने के बाद बड़ा घर लोगे,’’ हैरी ने गौरव को बढ़ावा दिया.

‘‘आप लोग क्या लेना पसंद करेंगे? सौरी, हमारे पास ड्रिंक का लिमिटेड स्टाक है, मैं ड्रिंक कम करता हूं.’’

‘‘अरे, नेहा की कंपनी में तो सौफ्ट ड्रिंक में भी सुरूर आ जाएगा, पर पहले इंट्रोडक्शन तो हो जाए, यह मेरी स्वीटहार्ट एलिजाबेथ, यानी क्वीन औफ माई हार्ट और डार्लिंग, यह गौरव और उस की चार्मिंग वाइफ नेहा,’’ हंसते हुए हैरी ने नेहा को देखा.

‘‘यू नो, हैरी ऐसा ही है, हर टाइम हंसता है.’’

‘‘हंसना तो बहुत अच्छी बात है. हंसने वाले इनसान हमेशा यंग दिखते हैं. देखो न, हैरी कितने यंग दिखते हैं,’’ गौरव ने नेहा से कहा.

‘‘यह तो असल में भी यंग मैन ही है, मैं इस से 7 साल बड़ी हूं. क्यों हैरी, ठीक कह रही हूं न?’’ एलिजाबेथ के चेहरे पर मुसकान थी.

एलिजाबेथ की बात सुन कर नेहा ने सोचा, ‘अपनी उम्र के बारे में इतनी सचाई से ऐसी बात स्वीकार करने के लिए साहस होना चाहिए. भारत में पत्नी का उम्र में बड़ा होना कोई सामान्य बात नहीं मानी जाती. वैसे भी वहां लड़कियां अकसर अपनी सही उम्र कम ही बताती हैं. कभीकभी मातापिता भी 1-2 साल कम कर के ही बताते हैं.’

‘‘अरे, तुम्हारी उम्र कुछ भी हो, मेरे लिए तो तुम स्वीट सिक्सटीन ही हो,’’ हैरी हंस रहा था.

‘‘हैरी सब को ऐसे ही प्यार करता है, तुम दोनों का तो फैन हो गया है. तुम को लाइक किया, इसलिए यहां आया है, नहीं तो इसे अपने गिटार और म्यूजिक के अलावा कुछ नहीं चाहिए,’’ एलिजाबेथ ने मुसकरा कर हैरी को देखा.

‘‘यह तो हैरी का बड़प्पन है. कोई और होता तो…’’

‘‘तो वह भी वही करता,’’ गौरव की बात काट कर हैरी ने कहा.

‘‘आई विश, आज टीना भी हमारे साथ आई होती,’’ एलिजाबेथ ने कहा.

‘‘टीना कौन?’’ नेहा ने पूछा.

‘‘एलिजाबेथ का पहले हसबैंड से डिवोर्स हो गया. टीना एलिजाबेथ के पहले हसबैंड से एलिजाबेथ की बेटी है, वह अपने फादर के साथ रहती है. वीकैंड में हमारे पास आती है. आज वह अपनी ग्रैनी (नानी) के पास गई हुई है वरना हम उसे भी साथ लाते.’’

‘‘क्या टीना के फादर उसे आप के पास आसानी से आने देते हैं?’’ अनजाने में नेहा पूछ बैठी.

‘‘हां, इस में क्या प्रौब्लम होगी? टीना हमारी भी तो बेटी हुई, आखिर एलिजाबेथ उस की मदर है. एलिजाबेथ का पहला हसबैंड मेरा अच्छा दोस्त है, हम सब मिल कर पार्टी करते हैं,’’ नेहा के सवाल पर हैरी विस्मत था.

‘‘माफ कीजिए, असल में भारत में पतिपत्नी के अलग होते समय बच्चों के बंटवारे को ले कर झगड़े उठ खड़े होते हैं इसीलिए मैं सवाल कर बैठी.’’

नेहा को याद हो आया, उस की कजिन गीता को अपने दुश्चरित्र पति से तलाक लेते समय 5 वर्ष के राहुल को कस्टडी में लेने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़े थे.

ऐसा नहीं कि उस के पति को बेटे से बहुत  प्यार था, पर पुरुष का अहं और गीता को तड़पाना उस का मकसद था. अकसर कानूनी अड़चनें भी मां के विरुद्ध फैसला देने को विवश होती हैं.

‘‘अमेरिका में दूसरी शादी के लिए मर्द या औरत को बराबरी का अधिकार है. जब दोनों को महसूस होता है, वे साथ नहीं रह सकते तो आपसी समझौते से अलग हो जाते हैं. तलाक से बच्चों पर ज्यादा असर नहीं पड़ता. यहां तलाक सामान्य बात है. बच्चे भी इसे आसानी से स्वीकार करते हैं. हो सकता है, इंडिया में हमारी मैरिज को बेमेल कहा जाए, पर यहां यह कोई नई बात नहीं है,’’ हैरी ने गंभीरता से कहा.

‘‘हां, पहले तो इंडिया में बच्चे वाली विधवा या परित्यक्ता स्त्री का विवाह मुश्किल होता था, पर आजकल समाज बदल रहा है. मीडिया के कारण लोगों में तेजी से चेतना आ रही है. हमारा समाज उदार होता जा रहा है,’’ जानकारी देते हुए गौरव को मीडिया पर आने वाली कई घटनाएं याद हो आईं, जब पीडि़त स्त्री को न्याय दिलाने के लिए मीडिया आगे आया था.

कोल्ड ड्रिंक देती नेहा ने कहा, ‘‘इफ यू डौंट माइंड, एक बात पूछ सकती हूं?’’

‘‘जरूर, हमें खुशी होगी. आप क्या जानना चाहती हैं?’’

‘‘आप दोनों की मुलाकात कैसे हुई थी?’’

‘‘एलिजाबेथ अपने स्कूल के बच्चों के साथ एक कोरस गीत के आर्केस्ट्रा के लिए मदद लेने हमारे म्यूजिक स्कूल आई थी. मजे की बात यह थी कि एलिजाबेथ को म्यूजिक

की एबीसीडी भी नहीं आती. कोरस गीत के साथ जब मेरी आर्केस्ट्रा टीम ने साथ दिया तो लोगों की तालियां देर तक हाल में गूंजती रहीं. उस दिन के बाद से हर म्यूजिक प्रोग्राम के लिए यह मेरी मदद लेने आने लगी. बस, पहले हम दोनों दोस्त थे, बाद में हसबैंडवाइफ,’’ बात खत्म करता हुआ हैरी, एलिजाबेथ को देख कर मुसकरा दिया.

‘‘लेकिन अब तो मैं काफी कुछ समझती हूं न, हैरी?’’

‘‘हां, अब तुम गलत नोटेशन पर हंस लेती हो. वैसे तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूं, नेहा ने इंडियन क्लासिकल म्यूजिक में मास्टर्स की डिग्री ली है.’’

‘‘वाऊ, दैट्स ग्रेट. हैरी, तुम अपने स्कूल में इंडियन क्लासिकल म्यूजिक की क्लासेज क्यों नहीं शुरू कर लेते? मैं ऐसे बहुत से इंडियन पेरैंट्स को जानती हूं, जो अपने बच्चों को इंडियन म्यूजिक सिखाना चाहते हैं,’’ एलिजाबेथ ने सुझाव दिया.

‘‘ओह यस, गुड आइडिया. नेहा, क्या तुम मेरे स्कूल में म्यूजिक टीचर की जौब लेना चाहोगी?’’ हैरी ने पूछा.

‘‘जी, मैं ने संगीत सीखा है, पर किसी को सिखाया नहीं है,’’ संकोच से नेहा ने कहा.

‘‘वह कोई प्रौब्लम नहीं है. एक बार सिखाना शुरू करोगी तो बहुत आसान लगेगा,’’ एलिजाबेथ ने उत्साहित किया.

‘‘मैं सोचती हूं, पहले गौरव को कोई जौब मिल जाए फिर…’’

‘‘गौरव के के लिए भी कोशिश की जाएगी. वह क्वालिफाइड है. उसे जरूर अच्छी जौब मिल जाएगी. जौब लेने से तुम्हें सैलरी के साथ मैडिकल इंश्योरेंस भी मिलेगा. अभी तुम लोग जो प्रौब्लम फेस कर रहे हो, उस से छुटकारा पाना जरूरी है. बी प्रैक्टिकल नेहा.’’

‘‘तुम्हें कोई औब्जेक्शन तो नहीं है, गौरव?’’ गौरव को चुप देख एलिजाबेथ ने पूछा.

‘‘नहीं, अगर नेहा की इच्छा है तो काम करे,’’ विक्षुब्ध हो कर गौरव ने कहा.

‘‘ठीक है, तुम दोनों सोच लो. मेरा औफर रहेगा. हां, नेहा को जौब पर रखने के लिए कुछ फौरमैलिटीज पूरी करनी होंगी. नेहा को आसानी से वर्कपरमिट मिल जाएगा, उस के साथ जौब करने की परमिशन हो जाएगी.’’

छोटी सी डाइनिंग टेबल पर डिनर सजा देख, एलिजाबेथ चौंक गई, प्रशंसा में बोली, ‘‘माई गौड, लगता है मैरिज पार्टी की तैयारी है. इतनी मेहनत क्यों की, नेहा? हम तो सिर्फ 2 ही गेस्ट हैं या कोई और भी आने वाला है?’’

‘‘यह तो कुछ नहीं है. हमारे देश में अतिथि को देवता यानी गौड कहा जाता है. उन के सत्कार में जो भी किया जाए कम है. आज आप हमारे गैस्ट यानी अतिथि हैं,’’ हंसते हुए गौरव ने बताया.

एलिजाबेथ और हैरी को खाना बहुत पसंद आया. एलिजाबेथ हर डिश की रैसिपी पूछ रही थी. हैरी ने उसे चिढ़ाया, ‘‘माई डियर, अपनी कुकिंग बेकिंग तक ही रहने दो. यह मजेदार स्पाइसी फूड बनाना तुम्हारे बस का नहीं. नेहा, तुम्हें हमारे घर में बेक्ड केक, पाई या टिन में पैक्ड खाना ही मिलेगा.’’

‘‘हैरी ठीक कहता है, हमारी कुकिंग बिलकुल अलग किस्म की होती है. शायद तुम्हें हमारा खाना उबला हुआ लगेगा,’’ एलिजाबेथ ने सचाई से कहा.

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. हर देश और जगह का खानपान अलग होता है. हमारे देश में तो अलगअलग स्टेट्स का खाना अलग तरह का होता है. हमारी नेबर मंगलाजी साउथ की हैं, उन की और हमारी नौर्थ इंडियन डिशेज अलग होती हैं, पर हम दोनों एकदूसरे की डिशेज खूब ऐंजौय करते हैं,’’ मुसकराती नेहा ने कहा.

स्वीट डिश के रूप में मेवा पड़ी खीर ने तो उन्हें मुग्ध ही कर दिया.

‘‘व्हाट ए लवली स्वीट डिश. मजा आ गया,’’ डिनर खत्म होने पर हैरी और एलिजाबेथ को अपनी प्लेटें धोने के लिए जाने की कोशिश करते देख नेहा ने रोक दिया, ‘‘नहीं, प्लीज आप ऐसा न करें. हमारे यहां गैस्ट से यह काम अपेक्षित नहीं है. यह उन का अपमान माना जाता है.’’

‘‘पर अमेरिका में मेजबान पर सारा काम छोड़ कर नहीं जाया जाता. मेहमान अपनी डिशेज खुद धो कर डिशवाशर में लगाते हैं. इस तरह से मेजबान का काम भी हलका हो जाता है,’’ हैरी ने बताया.

‘‘हो सकता है, अगर हम यहां रहने लगें तो यहां की लाइफस्टाइल अपना लें, पर अभी तो हमारे संस्कार भारतीय ही हैं. हमें क्षमा करें,’’ नेहा ने उन के हाथों से प्लेटें ले कर सिंक में रख दीं.

उन के जाने के बाद गौरव चुपचाप लेट गया. डिशवाशर में बरतन लगाती नेहा सोचने लगी, ‘यह अच्छा देश है, इस देश में हर छोटे से छोटे अपार्टमैंट में भी मूल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. डिशवाशर, कपड़े धोने, सुखाने के लिए वाशिंग मशीन और ड्रायर, माइक्रोवेव और फ्रिज के रहने से

सारा काम कितना आसान हो जाता है.’

काम खत्म कर, कमरे में आ कर गौरव को लेटा देख नेहा ने खुशी से कहा, ‘‘क्या थक गए? वैसे आज की शाम बड़ी अच्छी बीती. दोनों पतिपत्नी कितने अच्छे हैं. एलिजाबेथ को हमारा बनाया खाना बहुत पसंद आया.’’

‘‘हां, तुम्हारे लिए तो जौब का औफर भी आ गया. तुम्हारी शाम तो अच्छी होनी ही थी,’’ कुछ तल्खी से गौरव ने कहा.

‘‘अरे, मैं कौन सी नौकरी करने जा रही हूं. उन्होंने कहा और मैं ने सुन लिया,’’ गौरव की आवाज की तल्खी नेहा पहचान गई थी.

‘‘सोचता हूं, हम इंडिया वापस क्यों न चलें. यहां का जो हाल देख रहा हूं, उस में अच्छी जौब का मिलना कठिन ही होगा.’’

‘‘इंडिया की अपनी जौब भी तो छोड़ कर आए हो.’’

‘‘तो क्या दूसरी जौब नहीं मिलेगी,

वहां के हालात यहां के मुकाबले में बहुत अच्छे हैं.’’

‘‘वह बात यहां भी तो संभव हो सकती है. तुम्हारे पास ऊंची डिग्री है, काम का अनुभव भी है, तुम्हें जरूर कोई अच्छी जौब मिल जाएगी. हिम्मत रखो. इंडिया में सारा सामान बेच कर घर खाली कर आए हैं.

वहां जा कर फिर से गृहस्थी जमाना भी तो इतना आसान नहीं होगा. लोग क्या हमारी हंसी नहीं उड़ाएंगे?’’

नेहा की बात में दम था. अमेरिका से जौब का औफर मिलने पर गौरव फूला न समाया था. आफिस में कितनी शान से कहा था, ‘‘इस दोटके की नौकरी में क्या रखा है? अमेरिका में जो सैलरी मिलेगी, उस से 1-2 साल में यहां एक शानदार बंगला बनवा लूंगा.’’

असल में आज नेहा के जौब औफर ने उसे विक्षुब्ध कर दिया. पत्नी नौकरी करे और पति घर में निकम्मा बैठा रहे, भारतीय पति की मानसिकता इसे सहज ही स्वीकार नहीं कर सकती. अभी तो परदेश से ठीक से परिचय भी नहीं हुआ था कि नौकरी चली जाने से असहायता की स्थिति बन गई. उस की अपेक्षा नेहा प्रसन्न लग रही थी. किसी तरह करवटें बदलते रात कट गई.

सुबहसुबह कालबैल सुन कर नेहा चौंक गई. दरवाजा खोलने पर मंगला खड़ी दिखीं.

‘‘अरे मंगला बहन, सब खैरियत तो है?’’

‘‘अइअइयो, अम्मा, बोत खुशी की बात है, नेहा. अम को काम मिलने का जी. ये लो, तुम्हारे लिए मैसूर पाक लाया है,’’ खुशी से मंगला का चेहरा चमक रहा था.

‘‘वाह, यह तो बहुत अच्छी खबर है. काम कहां मिला है?’’

‘‘वो जो पंजाबी होटल है ना, उस के मालिक ने बुलाया, मेरे को बोला कि

‘पुत्तर, तुसी बोत अच्छा इडलीडोसा बनाता, हमारे होटल में काम करो तो पैसा और नाम दोनों मिलेगा.’ मेरे को सुबह 8 से 1 बजे तक और शाम को 4 से 8 तक काम करने का जी.’’

‘‘तुम्हारे हसबैंड मान गए? मेरा मतलब अब तुम्हें काफी टाइम बाहर रहना होगा?’’

‘‘काए को नहीं मानेगा, हमारे पैसे से उस का भी तो फायदा होने का कि नईं? हम इंडिया जास्ती पैसा भेज सकने का,’’ मंगला के चेहरे पर आशा का उल्लास था.

‘‘हां, यह बात तो सच है, पर सब मर्द ऐसा नहीं सोचते.’’

‘‘क्या बोलता, नेहा, अमेरिका में हम देखा, सारी औरतें काम करने का,’’ अचानक पीछे खड़े गौरव पर निगाह पड़ते ही नेहा चुप हो गई. निश्चय ही उस ने नेहा की बात सुन ली थी.

 

‘‘बंधाई, हो मंगला बहन. मिस्टर रामास्वामी को भी कांग्रेचुलेट कीजिएगा.’’

‘‘थैंक्यू, अब हम को जाने का. आज से ही ड्यूटी करने का. रामास्वामी वेट करता जी,’’ उत्साहित मंगला चली गई.

‘‘हैरी का औफर स्वीकार कर लो, नेहा,’’ चाय पीते हुए गौरव ने कहा.

‘‘क्या?’’ नेहा चौंक गई.

‘‘हां, सोचता हूं, कम से कम कुछ समय के लिए तो समस्या से छुटकारा मिल ही जाएगा. बाद में जब मुझे जौब मिल जाएगी तब तुम आराम करना,’’ गौरव मुसकराया.

‘‘सच कहो, यह बात दिल से कह रहे हो, पर क्या मैं संगीत सिखा पाऊंगी?’’

‘‘क्यों नहीं, आखिर तुम ने संगीत में एम.ए. किया है. यहां तो सा रे गा मा से शुरू करना है. आज ही हैरी को तुम्हारी ऐक्सैप्टैंस भेज देता हूं,’’ गौरव ने उत्साहित किया.

‘‘तुम्हें परेशानी नहीं होगी?’’ नेहा ने गौरव का मन जानना चाहा.

‘‘कैसी परेशानी? दिन भर आराम से पैर फैला कर सोऊंगा. अभी तक काम की वजह से 8 की जगह 10-11 घंटे काम करना पड़ता था.’’

‘‘तुम घर पर रहोगे, मैं काम पर जाऊंगी तो लोग क्या कहेंगे?’’ नेहा शंकित थी.

‘‘हम भारत में नहीं हैं, जहां लोग अपने से ज्यादा दूसरों पर नजर रखते हैं. इतने दिनों में एक बात समझ गया हूं, इस देश में कोई किसी के बारे में नहीं सोचता. सब अपने काम से काम रखते हैं. हां, सामने पड़ने वाले अजनबी को भी हायहैलो जरूर करते हैं,’’ गौरव ने अपने 4 महीनों का अनुभव बताया.

‘‘थैंक्स, गौरव,’’ नेहा के चेहरे पर खुशी झलक आई.

एक घंटे में हैरी का फोन आ गया.

‘‘गुड, नेहा ने जौब करने का फैसला लिया है. मैं कल नेहा का वेट करूंगा,’’ हैरी की आवाज में खुशी स्पष्ट थी.

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