शीना ने अपनी दोस्त मीताली को भी मैसेज कर यह खबर दे दी थी कि अब वह कल से कालेज आएगी.
आज कालेज जाने के लिए शीना चहकते हुए उठी थी. चेहरे पर टोनर , मोइश्चराइजर, पाउडर, लाइनर, आईशैडो, मसकारा, लिपस्टिक और गालों पर ब्लश लगा वह कालेज जाने के लिए तैयार थी.
कालेज के गेट से कार अंदर ले जाने लगी तो उस के शरीर में उमंग दौड़ गई. कार पार्क कर वह मीताली को कौल करने लगी. मीताली क्लास में ही थी तो शीना भी क्लास की तरफ बढ़ गई. वह लिफ्ट की तरफ जा रही थी तो हर कोई उसे ऊपर से नीचे देखने लगा. लंबे घने बाल, सुंदर नैननक्श, स्टायलिश कपड़े और ब्रांडेड बैग. आमतौर पर कालेज के बच्चे बेफिक्र घूमने वालों में से होते हैं, लेकिन शीना सब से अलग दिख रही थी. वह क्लास में गई तो सभी उसे एकटक देखने लगे. उस ने दूसरे डेस्क पर मीताली को देखा और उस के पास जा कर बैठ गई.
“तू तो आते ही सब की नजर में चढ़ गई, सही है सही है,” मीताली बोली.
“अब सुंदर लड़की को देखने से लोग खुद को नहीं रोक पा रहे तो मेरी क्या गलती,” कह कर शीना हंसने लगी.
क्लास में इतिहास के टीचर आए तो सभी तन कर बैठ गए. शीना को देख कर सर ने कहा, “तुम पहली बार आई हो यहां?” सर यूपी के रहने वाले थे तो उन का बोलने का लहजा सुन सभी हंसने लगते थे क्योंकि वह सुनाई कुछ इस तरह दिया था- तुम्म पेहली बार आई… हो… यहां.
“येस सर,” शीना ने झेंपते हुए कहा.
“ऐसा क्या काम करती हो जो क्लास नहीं आ पाती. तुम बच्चों का बस यही है, मांबाप के भी पैसे खर्च कराते हो और कालेज की सीट भी खराब करते हो,” सर पूरी क्लास को सुनाते हुए कहने लगे. लगभग पूरी क्लास ही शीना का मजाक उड़ता देख चहक रही थी.
“तेरा तो बड़ा अच्छा वेलकम कर दिया सर ने,” मीताली शीना पर हंसते हुए बोली.
सर क्लास से गए तो एकएक कर कोई न कोई किसी न किसी बहाने से शीना को हायहैलो करने आता रहा. मीताली के दोस्त तो कायदे से शीना के दोस्त भी थे. शीना और मीताली बचपन से एक ही स्कूल में पढ़े थे इसलिए दोनों ने एक ही कालेज में एडमिशन भी लिया था.
लड़को के लिए तो शीना से आंख हटाना मुशकिल था. मीताली के तीन और दोस्त थे जो अब शीना के दोस्त भी बन गए थे (कायदे से), नैना, सुधीर और अक्षत.
नैना और सुधीर तो शीना के आगे पीछे होने लगे थे लेकिन अक्षत का शीना पर कुछ खास ध्यान नहीं गया था. वह अपनी किताबों और अपनी गर्लफ्रेंड विभा के साथ ही घूमता फिरता था.
शीना के लिए चीजें धीरेधीरे सामान्य होने लगी थीं. लेकिन, वह कालेज से सीधा डांस और सिंगिंग क्लास के लिए निकल जाया करती थी. जब भी घूमने की बात होती तो कहती ये क्लास है, वो क्लास है, घर पर काम है या मम्मी डाटेंगी. वैसे भी शीना की मम्मी उस के कालेज जाने से खुश नहीं थीं.
कालेज में शीना अपने ग्रुप के साथ गुट बना कर बैठी थी, मीताली, सुधीर, नैना और अक्षत के साथ. बातोंबातों में सभी को पता लगा कि अक्षत और विभा का ब्रेकअप हो गया है, नैना और सुधीर ने यूपीएससी की कोचिंग जौइन कर ली है, मीताली को टीचर्स पसंद करने लगे हैं और शीना को कई लड़के अप्रोच करने लगे हैं.
“शीना, तू किसी को डेट क्यों नहीं करती, हाय हैलो से आगे तो बढ़?” नैना ने कहा.
“कोई पसंद भी तो आना चाहिए,” शीना ने जवाब दिया.
“तुझे या तेरी मम्मी को,” मीताली ने चुटकी ली.
“क्या मतलब,” सुधीर ने पूछा.
“इस की मम्मी लड़कों को इस के आगे भटकने कहां देती हैं. स्कूल में इस के बौयफ्रेंड पीयूष का मैसेज देख कर प्रिन्सिपल को बता दिया था और ट्यूशन में जो लड़का मिला था, क्या नाम था उस का…हां, मयंक, उसे तो जो फटकार लगाई थी सब के सामने बेचारा आज तक पछताता होगा,” मीताली ने बताया.
यह सुन सब शीना पर हंसने लगे. कोई कहता कि वह भरी जवानी में मम्मी के आतंक से डेटिंग का मजा मिस कर रही है तो किसी ने कहा कि उसे कालेज में तो बौयफ्रेंड बना ही लेना चाहिए. आखिर में शीना को सब ने समझाया कि मम्मी को कुछ पता नहीं चलेगा अब जो मन आए कर ले.
शीना से हट कर सब अक्षत से उस के ब्रेकअप के बारे में पूछने लगे. शीना ने भी सवाल किया, “तुम विभा के साथ क्यों थे, मेरा मतलब तुम तो काफी स्मार्ट हो, दिखने में भी उस से चार ही हो, फिर रिलेशनशिप में कैसे?”
अक्षत ने हैरानी से पूछा, “तुम शक्ल से दोस्ती करती हो या इंसान से?”
“क्या मतलब,” शीना ने कहा.
“इंसान की पहचान उस की शक्ल से कही ज्यादा होती है, तुम्हारी शायद तुम्हारी शक्ल के अलावा और कुछ न हो पर बाकी सब का यह हाल नहीं है,” अक्षत ने गंभीरता से कहा.
“अक्षत यह क्या कह रहे हो,” मीताली ने अक्षत को घूरते हुए कहा.
“मेरी क्लास है मैं जा रहा हूं,” कहता हुआ अक्षत वहां से निकल गया.
शीना के लिए यह बेज्जती अप्रत्याशित थी. उसे लगा उस ने सचमुच बेवकूफी भरी बात की है, सो उठ कर चली गई. शाम को शीना हमेशा की तरह सब से पहले घर के लिए निकल रही थी तो उसे गेट के पास अक्षत मिला. अक्षत ने उसे देखा और कहा, “वो…. मुझे इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी, सौरी.”
“कोई बात नहीं, मैं ने लापरवाही से कुछ भी कह दिया था, मुझे नहीं कहना चाहिए था.”
“तुम्हें सुंदरता को समझना चाहिए, चेहरे से सुंदर होना ही सबकुछ नहीं होता. मैं तुम्हें इंसल्ट नहीं कर रहा तो ओफेंड मत होना, पर जो है सो है. मैं किताबों में मस्त रहने वाला इंसान हूं खूबसूरत चेहरे के ऊपर खूबसूरत दिमाग को महत्व देता हूं, शायद तुम्हें अपने पहले वाले प्रश्न का जवाब मिल गया है. चलता हूं.”
“अक्षत, सौरी,” शीना ने कहा तो अक्षत मुस्कराते हुए वहां से चला गया.
शीना एक दिन योंही व्हाट्सऐप पर सब की प्रोफाइल पिक्चर देख रही थी कि उस की नजर अक्षत की डीपी पर गई. शांत स्वभाव का अक्षत तस्वीर में सुंदर लग रहा था. शीना की नजर उस पर ही टिक गई. अक्षत की बड़ीबड़ी आंखें, घने बाल, निचले होंठ पर तिल और हल्की मुस्कराहट शीना को अच्छी लगी थी. लेकिन, अक्षत शीना को भाव ही कहां देता था जो वह उस के बारे में सोचे.
मम्मीपापा शीना को ले कर आज भी लड़ रहे थे. ऐसा भी तो नहीं था कि वह उन दोनों में से किसी से कुछ कह सके. वैसे भी उसे बचपन से ही इन झगड़ों को सुनने की आदत थी. उस ने फोन साइड टेबल पर रखा और सो गई.
ट्रिप का दिन नजदीक आ गया था. ट्रिप पर जाने का मतलब था 5 दिन तक घर और घर के सारे ड्रामे से दूर, किसी क्लास का कोई झंझट नहीं और न मम्मी की बातें.
ट्रिप पर जाने वाले दिन ही सुबह शोभा ने शीना को सख्त हिदायत दी थी कि वह सब से दूर रहे और सिर्फ मीताली के साथ ही घूमेफिरे. किसी लड़के के साथ ज्यादा भटकने की जरूरत नहीं है वरना उस का कालेज जाना बंद कर दिया जाएगा. शीना कभी समझ नहीं पाई कि आखिर उस की मम्मी को उस के लड़कों से दोस्ती करने पर इतनी परेशानी क्या है, आखिर इतनी मौडर्न होने के बाद भी उस का कोई बौयफ्रेंड नहीं है. शीना को समझ नहीं आता कि यह मम्मी की उस को ले कर चिंता है या क्या.