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अक्षत ने शीना का हाथ पकड़ा और उसे किस करने के लिए आगे बढ़ा. शीना ने उसे मना नहीं किया और पहली बार किसी लड़के के स्पर्श को महसूस कर खुशी से भर गई.

ट्रिप के अगले 2 दिन शीना के लिए किसी सपने से कम नहीं थे. वह अक्षत को कभी बेबी कह कर बुलाती, कभी उसे गले लगाती, कभी बिना बात उस के साथ कपल डांस करने लगती. अक्षत के साथ उस के लिए यह ट्रिप कई कारणों से यादगार हो चुकी थी. लेकिन, शीना की मम्मी दिन में 5 बार उसे फोन करतीं थीं जिस से वह खीझ उठती थी. फोन उठाती तो मम्मी उसे कोई न कोई हिदायत देती रहती थीं.

शीना वापस घर आई तो मम्मी ने उस के सामने पहले से तैयार बातों की लिस्ट रख थी, “तुम ने इतना समय बर्बाद किया है कि दो प्रौडक्ट के शूट हाथ से निकल गए, यह क्या बिना मेकअप लगाए घूम रही हो, कोई देखेगा तो क्या कहेगा, इसीलिए बस इसीलिए मैं नहीं चाहती थी कि ट्रिप पर जाओ, 5 दिनों में जैसे सब कुछ ही भूल गई.”

“मम्मी सांस तो लेने दो, अभी ठीक से बैठी भी नहीं हूं मैं कि आप शुरू हो गई हो,” कह कर शीना अपने कमरे की तरफ चली गई.

“मुझ से जबान लड़ाने की कोशिश मत करो और ट्रैक पर वापस आ जाओ. एक बाप है जिसे घर की सुध नहीं है और एक बेटी है जिसे अपना कैरियर बर्बाद करने की पड़ी है,” शोभा बड़बड़ाने लगी.

अगले दिन से शीना के लिए कालेज पहले जैसा नहीं रहा था, अब अक्षत उस का बौयफ्रेंड था और वह उस की गर्लफ्रेंड. जिंदगी में रोमांस की कमी थी और वह आखिर मिल ही गया था. शीना को अब न मेकअप करने का शौक रहा था न उस का डांस क्लास या शूट्स पर जाने का मन होता था. वह कालेज पर और अक्षत पर फोकस करना चाहती थी. अक्षत के कहने पर उस ने अब नोवल्स पढ़ना भी शुरू कर दिया था. लिखने का भी शौक होने लगा था अब उसे. सब उस के आर्टिकल्स पढ़ कर तारीफ किया करते थे. उसे लगा जैसे सुकून तो अब मिला है उसे इतने सालों में.

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