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ओनीर चुप रहा तो सहर को इस बात का दुख हुआ कि ओनीर ने यह नहीं कहा कि नहीं, मेरे लिए प्रेम ज्यादा जरूरी है. दोनों थोड़ी देर बाद एक जगह रेत पर बैठ गए. अंधेरा हो गया था. इतने में सहर का फोन बजा, ‘‘हां, मम्मी, आती हूं, ओनीर के साथ हूं. आप की मीटिंग कैसी रही? आती हूं, मम्मी. हां, अब सैलिब्रेट करेंगे.’’

ओनीर ने अंदाजा लगाया कि सहर और उस की मम्मी की बौंडिंग बहुत अच्छी है. वह जानता था कि कुछ साल पहले सहर के पिता नहीं रहे थे. उस की मम्मी वर्किंग थीं. सहर एक गहरी सांस ले कर चांद को देखने लगी. इस समय बीच पर बहुत ही खुशनुमा सा, कुछ रहस्यमयी सा माहौल होता है. छोटे बच्चे इधरउधर दौड़ते रहते हैं. इस समय जवान जोड़ों की बड़ी भीड़ होती है.

अंधेरे में दूर तक लड़केलड़कियां एकदूसरे से लिपटे, अपने प्रेम में खोए दुनिया को जैसे नकारने पर तुले होते हैं. ऐसा लगता है फेनिल लहरें हम से छिपमछिपाई खेल रही हैं, पास आती हैं, फिर अचानक चकमा दे

कर दूर हो जाती हैं. ओनीर ने कहा, ‘‘क्या सोचने लगी?’’

‘‘सितारों की गलियों में फिरता है तन्हा चांद भी,

किसी इश्क का मारा लगता है!’’

अब ओनीर से रुका न गया. उस ने सहर की हथेली अपने गीले से हाथ में पकड़ी और उस पर अपना प्यार रख दिया. सहर बस मुसकरा दी, शरमाई भी. कुछ पल यों ही गुजर गए. कोई कितना भी हाजिरजवाब हो, कुछ पल कभीकभी सब को चुप करवा देते हैं. सहर को भी कुछ सम?ा नहीं आ रहा था कि क्या कहे, बस,

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