‘‘तुम ने पूछा नहीं कि गौरिका यहां से क्यों चली गई?’’
‘‘पूछा था, पर वह तो आप को ही बुराभला कहने लगी, कहती है कि आप के कठोर अनुशासन में उस का दम घुटने लगा था.’’
‘‘स्वयं को सही साबित करने के लिए कुछ तो कहेगी ही. पर मैं तुम से कुछ नहीं छिपाऊंगा. आगे तुम्हें जो उचित लगे करना. हम बीच में नहीं पड़ेंगे,’’ श्याम बोले.
‘‘ऐसी क्या बात है भैया? मेरा दिल बैठा जा रहा है,’’ श्यामला घबरा उठी.
‘‘इस तरह कमजोर पड़ने की जरूरत नहीं है. तुम्हें युक्ति से काम लेना पड़ेगा.’’
‘‘पर बात क्या है भैया?’’
‘‘गौरिका यहां आई तो 2-3 सप्ताह तो सब ठीक रहा, पर फिर उस के ढेरों मित्र आने लगे. रात के 12-12, 1-1 बजे तक पार्टियां चलतीं, कानफोड़ू संगीत बजता. पहले तो हम ने कुछ नहीं कहा, पर जब पड़ोसी भी शिकायत करने लगे तो कहना पड़ा कि हमारी भी कोई मर्यादा है,’’ श्याम ने विस्तार से बताया.
‘‘आप से क्या छिपाना श्यामला दीदी. मैं ने स्वयं गौरिका के मित्रों को नशीली दवा तथा शराब लेते देखा है. इन युवाओं के व्यवहार के संबंध में क्या कहूं… उन्हें खुलेआम शालीनता की सभी सीमाएं लांघते देखा जा सकता था,’’ नीता ने भी अपनी बात कह डाली.
श्यामला को कुछ क्षण ऐसा लगा जैसे हवा भी थम गई हो. श्याम बाबू और नीता ने उन के चेहरे का रंग उड़ते और बदलते देखा.
‘‘श्यामला क्या हुआ? इस तरह चुप क्यों हो? कुछ तो कहो,’’ श्याम घबरा गए.
‘‘बोलूंगी भैया, अवश्य बोलूंगी, पर सब से पहले तो आप दोनों यह भलीभांति सम झ लीजिए कि मु झे गौरिका पर अटूट विश्वास है. आप को अपना सम झ कर उसे आप के साथ रहने को मनाया था. वह तो किसी संबंधी के साथ रहना ही नहीं चाहती थी,’’ श्यामला हर शब्द चबाचबा कर बोलीं.
‘‘क्या कह रही हो दीदी? गौरिका हमारी बेटी जैसी है. हम क्या उस पर झूठे आरोप लगा रहे हैं?’’ नीता ने कहा.
‘‘बेटी जैसी है न पर बेटी तो नहीं है. इसीलिए तो आप लोग जलते हैं उस से. है कोई लड़की मेरी गौरिका जैसी पूरी बिरादरी में? हर कक्षा में सर्वप्रथम रही है वह. आज इतनी सी आयु में इतनी ऊंची नौकरी कर रही है, इसीलिए सब बौखला गए हैं,’’ और फिर श्यामला रो पड़ीं.
श्याम बाबू सन्न रह गए. उन की छोटी बहन उन पर ऐसा आरोप लगाएगी,
उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था.
‘‘नीता, जाओ चायनाश्ते का प्रबंध करो. अब इस संबंध में हम कोई बात नहीं करेंगे,’’ किसी प्रकार श्याम के मुंह से निकला.
‘‘नहीं खूब बात कीजिए. मेरी गौरिका को बदनाम किए बिना आप को चैन नहीं मिलेगा. आप ने हमारी बहुत सहायता की है. पूरा हिसाबकिताब कर लीजिए हम पाईपाई चुका देंगे. गौरिका का विवाह इतनी धूमधाम से करूंगी कि सब की आंखें खुली की खुली रह जाएंगी,’’ श्यामला अब भी स्वयं को शांत नहीं कर पा रही थीं.
‘‘चलो, मान लिया तुम्हारी गौरिका जैसी कोई नहीं है. हमारी शुभकामनाएं हैं कि वह दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करे. तुम्हारा बड़ा भाई हूं. अब क्षमा भी कर दो,’’ श्याम बाबू ने हाथ जोड़ कर प्रार्थना की तो श्यामला ने किसी प्रकार स्वयं को संभाला.
चायनाश्ते और इधरउधर की बातों के बीच कब शाम हो गई और गौरिका श्यामला को लेने आ गई, पता ही नहीं चला.
‘‘अब क्या होगा श्याम? असली बात तो श्यामला दीदी को बताई ही नहीं,’’ श्यामला के जाते ही नीता ने चिंता जताई.
‘‘क्यों, अभी कुछ और सुनना बाकी है क्या? गांधीजी की शिक्षा का पालन करो. बुरा न देखो, न सुनो, न बोलो. हम कुछ कहें भी तो वह कब सुनने वाली है. उसे पुत्री मोह के आगे कुछ नहीं सू झेगा,’’ श्याम ने पत्नी को दोटूक शब्दों में बताया.
‘‘मिल आईं अपने भाईभाभी से?’’ घर पहुंचते ही गौरिका ने प्रश्न किया.
‘‘मिल आई और खरीखरी भी सुना आई. वे होते कौन हैं मेरी बेटी पर आरोप लगाने वाले?’’ श्यामला गुस्से से भरे स्वर में बोलीं.
‘‘मैं कहती तो थी कि वे हम से ईर्ष्या करते हैं,’’ गौरिका को मां श्यामला की बात सुन कर बड़ी खुशी हुई.
‘‘चिंता न कर बेटी. ऐसा जवाब दे कर आई हूं कि भविष्य में कभी तेरी बुराई करने का साहस नहीं जुटा सकेंगे.’’
‘‘ऐसा क्या कह आईं आप?’’
‘‘जो मन में आया सुना दिया. भैया तो लगे हाथ जोड़ कर माफी मांगने. मैं तो यह सोच कर चुप रह जाती थी कि बड़े भाई हैं और कई बार सहायता करते रहे हैं पर हर बात की एक सीमा होती है.’’
‘‘मम्मी, अब गुस्सा थूक भी दो और तैयार हो जाओ. आज डिनर बाहर ही करेंगे,’’ गौरिका की खुशी उस के चेहरे पर साफ झलक रही थी.
‘‘अब तो बस एक ही इच्छा है कि तेरे लिए ऐसा घरवर ढूंढ़ूं कि सभी मित्रों, संबंधियों की आंखें चौंधियां जाएं.’’
‘‘आप ऐसा कुछ नहीं करेंगी मां. अपने जीवनसाथी का चुनाव मैं स्वयं करूंगी और वह भी पूरी तरह जांचनेपरखने के बाद.’’
‘‘क्या कह रही है? कहीं किसी को पसंद तो नहीं कर लिया?’’ मन की बात तुरंत ही शब्दों में ढल गई.
‘‘नहीं मां ऐसा कुछ नहीं है. जांचनेपरखने में समय लगता है. अभी तो खोज शुरू हुई है,’’ गौरिका ने हंसी में बात टालनी चाही पर श्यामला का दिल दहल गया.
गौरिका डिनर के लिए उन्हें एक क्लब में ले गई. वहां उपस्थित युवकयुवतियों से वह ऐसे घुलमिल रही थी मानो उन्हें सदियों से जानती हो. गौरिका उन्हें जूस का गिलास थमा कर अपने मित्रों के साथ व्यस्त हो गई, जो तेज संगीत की धुन पर एकदूसरे में डूबे थिरक रहे थे.
खापी कर घर लौटते रात के 12 बज रहे
थे. तभी कार में अजीब गंध ने श्यामला को
चौंका दिया, ‘‘यह क्या है गौरिका? तुम ने पी रखी है क्या?’’
‘‘उफ मां, अपनी मध्यवर्गीय मानसिकता से बाहर निकलो. उच्चवर्ग में साथ देने के लिए थोड़ीबहुत पीने को बुरा नहीं मानते… यह तो आधुनिकता की निशानी है.’’
‘‘भाड़ में जाए ऐसी आधुनिकता… हमारे समाज में तो लड़कों का भी पीना अच्छा नहीं सम झा जाता लड़कियों की बात तो दूर रही.’’
‘‘आप तो श्याम मामा और मामीजी की तरह बात करने लगीं. थोड़ी सी पीने से कोई शराबी नहीं हो जाता. अगली बार मैं आप को क्लब के पब में ले जाऊंगी. वहां देखिएगा कितनी लड़कियां बैठी रहती हैं.’’
‘‘मु झे नहीं देखना कुछ भी. अच्छा हुआ कि तुम्हारा असली चेहरा सामने आ गया. मैं भी कितनी मूर्ख हूं. तुम्हारी बातों में आ कर मैं श्याम भैया से भी झगड़ा कर बैठी,’’ और श्यामला रो पड़ीं.
अगले कुछ दिन श्यामला ने अपने अकेलेपन से जू झते हुए बिताए. वे गौरिका का एक नया ही रूप देख रही थीं. उस के काम पर जाने के बाद नभेश से बात कर के वे मन हलका कर लेती थीं.
सप्ताहांत में गौरिका अकसर आधी रात को घर लौटती. वे कुछ कहतीं
तो उस का यही घिसापिटा उत्तर होता कि वह उन की तरह चौकेचूल्हे में अपना जीवन नहीं गंवा सकती.