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युवान से सहानुभूति तो रखी जा सकती है पर प्रेम और विवाह नहीं किया जा सकता और फिर धीरेधीरे नीमा ने युवान से किनारा कर लिया. हालांकि  युवान को ऐसे रूखे व्यवहार की आशा नहीं थी नीमा से पर उस दिन मोबाइल पर आए हुए व्हाट्सऐप संदेश ने युवान को नीमा की बेरुखी से परिचित करा ही दिया.

‘‘यू नो युवान… मेरे घर वाले मेरी मरजी के खिलाफ मेरी शादी कहीं और करना चाह रहे हैं और मेरे मना करने पर भी मु   झ पर दबाव बना रहे हैं. इसीलिए मैं अब तुम से शादी नहीं कर सकती. मु   झे लगता है तुम मेरी मजबूरी सम   झोगे, चाहो तो मु   झे सोशल मीडिया से भी ब्लौक और अन्फ्रैंड कर सकते हो पर मैं तुम्हें एक दोस्त के रूप में हमेशा याद रखूंगी… बाय.

यह संदेश पढ़ कर युवान के मन में बहुत कुछ टूट गया पर बदले में एक डूबती हुई फीकी सी मुसकराहट उस के चेहरे पर फैल गई जिस का साथ उस के छलके आंसुओं ने भी दे दिया.

नीमा एक अत्यंत महात्त्वाकांक्षी लड़की थी और ऐशोआराम का जीवन चाहती थी. अब जबकि उस के जीवन से युवान का चैप्टर क्लोज हो चुका था इसलिए उस ने अपने घर वालों की मदद से अपने लिए एक ऐसे जीवनसाथी की खोज करनी शुरू कर दी जो पैसे वाला हो और इस के लिए रिश्तेदारों, दोस्तों और मैट्रीमोनीयल साइट्स की मदद ली जाने लगी और कुछेक महीनों के बाद नीमा की तलाश पूरी हुई जब उसे विवाह डौटकौम पर एक 35 साल के 1 युवक का प्रोफाइल दिखा जो रोबीला होने के साथसाथ पैसे वाला भी था. शामक नाम था उस का. शामक आर्मी से ऐच्छिक रिटायरमैंट ले चुका था और अब एक सिक्यूरिटी एजेंसी चला रहा था. शामक की यह एजेंसी फैक्टरी में, मौल्स में और ओहदे और पैसे वाले लोगों को सुरक्षा प्रदान करने का काम करती थी. नीमा उस के मातापिता और भाई शामक से मिले. उस का लाइफस्टाइल देख कर ही इंप्रैस हो गए. उन्हें ऐसा लग कि शामक ने उन से कुछ भी छिपाया नहीं था. उस ने यह बताया कि उस के मातापिता की मौत के बाद उस के चाचा ने ही उसे पढ़ायालिखाया और उस का पूरा ध्यान रखा बदले में शामक ने भी मन से  पढ़ाई करी और कई प्रतियोगिताओं में अव्वल रहा और बाद में अपने मजबूत शरीर और फिटनैस के दम पर सेना में नौकरी हासिल कर ली. शामक भी अपने चाचा के लिए हर महीने अपनी सैलरी का आधा हिस्सा भेजना नहीं भूलता था.

शामक की उम्र बढ़ने पर चाचा ने कई बार उस से शादी करने को कहा पर शामक हर बार टालता ही गया पर अब जब वह फौज से बाहर की दुनिया में आया तब उसे शादी कर लेने की जरूरत महसूस हुई और इसीलिए उस ने भी इन साइट्स का सहारा लिया जिस के द्वारा उस की मुलाकात नीमा और उस के परिवार से हुई.

शामक के परिवार में सिर्फ उस के चाचा की रजामंदी चाहिए थी और इधर नीमा का परिवार इस बात से खुश था कि पैसे वाला शामक एक अच्छा पति साबित होगा और यही सोच कर उन लोगों ने नीमा की शादी शामक के साथ कर दी.

शामक और नीमा शादी के तुरंत बाद मालदीव अपने हनीमून के लिए चले गए, जहां उन्हें विबग्योर वर्ल्ड रिजोर्टमें रुकना था. रिजोर्ट के चारों ओर खूबसूरती फैली हुई थी. समुंदर का नीलानीला पानी नीमा को एक अलग ही दुनिया का एहसास कराता. नीमा और शामक पूरा दिन घूमते और पूरी रातभर बिस्तर पर जम कर एकदूसरे से प्यार करते. ऐसा लगता कि उन के जीवन में किसी और  के लिए कोई स्थान नहीं है.

अगले दिन दोपहर को जब नीमा की आंख लग गई तब शामक होटल से बाहर गया और जब लौटा तो उस के हाथ में जूट का बना हुआ एक बहुत सुंदर थैला था जिस पर मूंगे और मोती से बारीक कढ़ाई करी गई थी. उस थैले को शामक ने नीमा को भेंट कर दिया. नीमा ने आंखें मलते हुए देखा कि उस में मालदीव का पारंपरिक लिबास था जिसे धिवेही कहते हैं  जो एक लंबी पोशाक सी होती है और साथ में एक स्कार्फ सा होता है, इस ड्रैस के चटकीले इंद्रधनुषी रंगों को देख कर नीमा बहुत खुश हो गई. उसे लगने लगा कि अब उस के पास सिर्फ खुशियों के लिए ही जगह है पर यह सोचना नीमा के लिए जल्दबाजी थी क्योंकि शामक शक्की स्वभाव का था और वह नीमा के आसपास किसी मर्द की मौजूदगी पसंद नहीं करता था. नीमा का किसी पुरुष से बात करना भी उसे नहीं भाता था जबकि शामक खुद अपने हनीमून पर आने के बाद भी मालदीव में पैसे खर्च कर के वहां की औरतों के साथ मजे मारने से बाज नहीं आ रहा था. वह समुद्रतट पर अपनी नईनवेली पत्नी के साथ जाता पर उस की नजर हमेशा दूसरी औरतों पर होती जिस की शिकायत भी दबे शब्दों में नीमा ने उस से करी तो शामक ने लापरवाही वाले अंदाज में हंसते हुए बात को घुमा दिया.

हनीमून खत्म होने के बाद दोनों भारत आ गए और शामक ने अपना काम

संभाल लिया. नीमा ने घर की जिम्मेदारी. कुछ दिनों बाद नीमा ने शामक के व्यवहार में अजीब परिवर्तन देखा. वह चिड़चिड़ा कर बात करता और बिस्तर पर और भी आक्रामक हो गया था. पूछने पर उस ने बताया कि उसे नीमा का उस के ही चाचा के साथ बात करना अच्छा नहीं लगता.

‘‘उन बुजुर्ग चाचा से बात करना ठीक नहीं लगता पर वे तो मेरे और आप के पिता समान हैं,’’ नीमा हैरान थी.

अभी उस का वाक्य पूरा हुआ ही था कि शामक का हाथ चटाक की आवाज के साथ नीमा के कोमल गाल पर पड़ गया. अपना गाल पकड़ कर रह गई नीमा. उसे कुछ सम   झ नहीं आया कि क्या हुआ? सिर्फ सिसकती रह गई वह.

उस दिन के बाद से शामक आएदिन नीमा को शराब पी कर मारता और गंदी गालियां देता. नीमा के लिए यह सब असहनीय हो रहा था पर फिर भी उसे लग रहा था कि शामक एक दिन सुधर जाएगा पर हालात बद से बदतर हो गए. जब शामक ने एक शाम को खूब शराब पी कर लातघूंसों से नीमा को मारा तो उस का सिर फूट गया और खून निकल रहा था. उस के दोनों घुटनों में भी चोट आई थी. लिहाजा, उसे अस्पताल में भरती कराना पड़ा. अस्पताल लाए जाने पर वह बेहोश थी जहां पर उसे तुरंत गहन चिकित्सा कक्ष में भरती कराया गया.

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