मिस्टर निनाद, आप और आपकी वाइफ कोरोना पोजिटिव आए हैं, लेकिन आपके सिम्टम्स बहुत माइल्ड हैं. इसलिए आप दोनों को अपने घर पर ही सेल्फ क्वॉरेंटाइन में रहना होगा. यह रही शहर की कोरोनावायरस हैल्प लाइन का नंबर. अगर आपकी तबीयत खराब लगे तो आप इस नंबर पर फोन करिएगा.आपको हॉस्पिल ले जाने का पूरा इंतजाम हो जाएगा. अभी आपको हौस्पिटलाइजेशन की कोई जरूरत नहीं. अब आप घर जा सकते हैं. गुड लक.”
निनाद और अम्बा डॉक्टर की बातें सुनकर सदमे में थे.कोरोना और उनको? दोनों के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी. करोना के खौफ से दोनों के चेहरों से मानो रक्त निचुड़ सा गया था.उन्हें लग रहा था, मानो उनके पांव तले जमीन न रही थी.
हॉस्पिटल से बाहर निकल कर निनाद ने अपनी पत्नी अम्बा से कहा ,”प्लीज़ अम्बा, घर चलो, तुम्हारी भी तबीयत ठीक नहीं है. कोरोना का नाम सुन कर मैं हिल गया हूं. कोरोना से मौत की इतनी कहानियाँ सुन सुन कर मुझे दहशत सी हो रही है. बहुत घबराहट हो रही है. तुम साथ होगी तो मेरी हिम्मत बनी रहेगी. प्लीज अम्बा, ना मत करना. फिर घर जाओगी तो मां को भी तुमसे बीमारी लगने का डर होगा.”
निनाद के मुंह से प्लीज और घर जाने की रिक्वेस्ट सुन अम्बा बुरी तरह से चौंक गई थी. वह मन ही मन सोच रही थी, “इस बदज़ुबान और हेकड़ निनाद को क्या हुआ? शायद तीन महीने मुझसे अलग रहकर आटे दाल का भाव पता चल गया है इन्हें. इस बीमारी की स्थिति में किसी और परिचित या रिश्तेदार के घर जाना भी ठीक नहीं. कोई घर ऐसा नहीं जहां मैं इस मर्ज के साथ एकांत में रह सकूं. इस बीमारी में माँ के पास भी जा सकती. फिर निनाद की उसे अपने घर ले जाने की रट देख कर मन में कौतुहल जगा था, देखूं, आखिर माजरा क्या है जो ज़नाब इतनी मिन्नतें कर रहें हैं मुझे घर ले जाने के लिए. मन में दुविधा का भाव था, निनाद के घर जाये या नहीं. उससे तलाक की बात भी चल रही है. कि तभी हॉस्पिटल की ऐम्बुलेंस आगई और निनाद ने ऐम्बुलेंस का दरवाज़ा उसके लिए खोलते हुए उसे कंधों से उसकी ओर लगभग धकेलते से हुए उससे कहा, “बैठो अम्बा, क्या सोच रही हो,’’ और वह विवश ऐम्बुलेंस में बैठ गई.’’
घर पहुंचकर निनाद अम्बा से बोला, “मैं पास की दुकान को दूध सब्जी की होम डिलीवरी के लिए फोन करता हूं.”
“ओके.”
दुकान को फोन कर निनाद नहा धोकर अपने बेडरूम में लेट गया और अम्बा घर के दूसरे बेडरूम में. अम्बा को तनिक थकान हो आई थी और उसने आंखें बंद कर लीं. उसकी बंद पलकों में बरबस निनाद के साथ गुज़रा समय मानो सिनेमाई रील की मानिंद ठिठकते ठहरते चलने लगा और वह बीते दिनों की भूल भुलैया में अटकती भटकती खो गई.
वह सोच रही थी, जीवन कितना अनिश्चित होता है. निनाद से विवाह कर वह कितनी खुश थी, मानो सातवें आसमान में हो. लेकिन उसे क्या पता था, निनाद से शादी उसके जीवन की सबसे बड़ी भूल होगी.
एक सरकारी प्रतिष्ठान में वैज्ञानिक अम्बा और एक बहुराष्ट्रीय प्रतिष्ठान में वैज्ञानिक निनाद का तीन वर्षों पहले विवाह हुआ था. निनाद ने उस दिन अपने शहर की किसी कॉन्फ्रेंस में अपूर्व लावण्यमयी अम्बा को बेहद आत्मविश्वास से एक प्रेजेंटेशन देते सुना था, और वह उसका मुरीद हो गया. शुष्क, स्वाभाव के निनाद को अम्बा को देखकर शायद पहली बार प्यार जैसे रेशमी, मुलायम जज़्बे का एहसास हुआ था. कॉन्फ्रेंस से घर लौट कर भी अम्बा और उसका ओजस्वी धाराप्रवाह भाषण उसके चेतना मंडल पर अनवरत छाया रहा. उसके कशिश भरे, धीर गंभीर सौंदर्य ने सीधे उसके हृदय पर दस्तक दी थी और उसने लिंकडिन पर उसका प्रोफाइल ढूंढ उसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की थी. उसके माता पिता की बहुत पहले मृत्यु हो चुकी थी.इसलिए उसने स्वयं उसे फोन कर और फ़िर उससे मिलकर उसे विवाह का प्रस्ताव दिया था.
अम्बा की विवाह योग्य उम्र हो आई थी. सो मित्रों परिचितों से निनाद की नौकरी, घर परिवार और चाल चलन की तहकीकात कर उसने निनाद से विवाह करने की हामी भर दी.
अम्बा की मात्र मां जीवित थी. वह बेहद गरीब परिवार से थी. पिता एक पोस्टमैन थे. उनकी मृत्यु उसके बचपन में ही हो गई थी. तो प्रतिष्ठित पदधारी निनाद का विवाह प्रस्ताव अम्बा और उसकी मां को बेहद पसंद आया.शुभ मुहूर्त में दोनों का परिणय संस्कार संपन्न हुआ .
विवाह के उपरांत सुर्ख लाल जोड़े में सजी, पायल छनकाती अम्बा निनाद के घर आ गई, लेकिन यह विवाह उसके जीवन में खुशियों के फूल कतई न खिला सका. निनाद एक बेहद कठोर स्वाभाव का कलह प्रिय इंसान था. बात-बात पर क्लेश करना उसका मानो जन्म सिद्ध अधिकार था. फूल सी कोमल तन्वंगी अम्बा महीने भर में ही समझ गई कि यह विवाह कर उसने जीवन की सबसे गुरुतर भूल की है. दिनों दिन पति के क्लेश से उसका खिलती कली सा मासूम मन और सौंदर्य कुम्हलाने लगा.
निनाद बात बात पर उसे अपने से कम हैसियत के परिवार का तायना देता.गाहे बगाहे वह मां से मिलने जाती तो उस से लड़ता. मामूली बातों पर उससे उलझ पड़ता. बात बात पर उसे झिड़कता.
अम्बा एक बेहद सुलझी हुई, समझदार और मैच्योर युवती थी. वह भरसक निनाद को अपनी ओर से कोई मौका नहीं देती कि वह क्रुद्ध हो लेकिन दुष्ट निनाद किसी न किसी बात पर उससे रार कर ही बैठता.
निनाद अम्बा के विवाह को तीन वर्ष बीत चले.पति के खुराफ़ाती स्वभाव से त्रस्त अम्बा कभी-कभी सोचती, पति से अलग होकर उसे इस यातना से मुक्ति मिल जाएगी.जिस दिन गले तक निनाद के दुर्व्यवहार से भर जाती, मां से अपनी व्यथा कथा साझा करती.उससे अलग होने की मंशा जताती. लेकिन पुरातनपंथी मां हर बार उसे धीरज रखने की सलाह देकर चुप करा कर वापस अपने घर भेज देती.