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पति आकाश की असमय मौत के बाद जब महेश ने नीला के सामने शादी का प्रस्ताव रखा तो वह किस नतीजे तक नहीं पहुंच पा  रही थी. एक तरफ महेश था तो दूसरी तरफ अबोध बेटा रूद्र. क्या महेश उस के साथ उस के बेटे को अपना पाएगा… नीला,वैसे तो औफिस से शाम 7 बजे तक घर आ जाती है, लेकिन कभी मीटिंग वगैरह हो तो बोल कर जाती है कि आज उसे घर आने में थोड़ी देर जाएगी. मगर आज तो 9 बजने को थे और अब तक वह औफिस से घर नहीं आई.

सुबह कुछ बोल कर भी नहीं गई थी कि आज उसे घर आने में देर हो जाएगी. जब उस की मेड मंजु ने उसे फोन लगाया, तो नीला का फोन बिजी आ रहा था. इसलिए उस ने उसे मैसेज किया कि रुद्र, नीला का 4 साल का बेटा, बहुत रो रहा है. चुप ही नहीं हो रहा है और उसे भी तो अपने घर जाना है. उस पर नीला ने उसे मैसेज से ही जवाब दिया कि वह एक जरूरी मीटिंग में बिजी है, आने में देर लगेगी.

इसलिए वह मालती (नीला की मां) को बुला ले. मंजु ने जब मालती को फोन कर के कहा कि आज नीला को औफिस से आने में देर लगेगी. इसलिए वे आ कर कुछ देर के लिए रुद्र को संभाल लें. मालती आ तो गईं लेकिन उन्होंने मंजु को कस कर ?ाड़ लगाते हुए कहा, ‘‘पैसे किस बात की लेती हो, जब बच्चे की ठीक से देखभाल नहीं कर सकती हो और यह नीला पता नहीं क्या सम?ा रखा है मु?ो? अरे, मैं क्या कोई फालतू बैठी हूं, जो उस के बच्चे को संभालती रहूं?’’ मंजु ने उन की बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि उसे पता है कि मालती से मुंह लगाने का मतलब है खुद ही पत्थर पर सिर मारना.

दरअसल, नीला एक सिंगल मदर है. साथ में वह बैंक में जौब भी करती है. इसलिए रुद्र की देखभाल के लिए उस ने मंजु को रखा हुआ है. मंजु सुबह 9 बजे से ले कर रात 8 बजे तक रुद्र को संभालती है. उस के बाद तो नीला औफिस से आ ही जाती है. वैसे तो नीला का बैंक 6 बजे तक ही होता है, लेकिन कभी मीटिंग की वजह से या बैंक में औडिट चल रहा हो, तब नीला को घर आने में देर हो जाती है. रात के करीब 10 बजे नीला घर आई. धीरे से दरवाजा खोल कर जब वह अंदर कमरे में गई, तो देखा रुद्र मालती अपनी नानी के सीने से लग कर आराम से सो रहा है. ‘‘आ गई तू?’’ नीला के आने की आहट सुन कर मालती तुरंत उठ बैठीं. ‘‘हां, आ गई मां, लेकिन बहुत थक गई आज तो,’’ बैड पर एक तरफ पर्स रखते हुए नीला ने नजर भर कर रुद्र की तरफ देखते हुए कहा, ‘‘वह अचानक मीटिंग रख दी, इसलिए मैं ने ही मंजु से कहा था कि वह आप को बुला ले. वैसे रुद्र ने आप को ज्यादा परेशान तो नहीं किया न?’’

मालती ने तलखी से कहा, ‘‘यह बता कि ऐसा कब तक चलता रहेगा? आखिर मैं भी कब तक तुम्हारा साथ दे पाऊंगी? उम्र हो चुकी है मेरी भी. थक जाती हूं यहांवहां करतेकरते,’’ बोलते हुए मालती का चेहरा रूखा हो आया. ‘‘पता है मां, लेकिन मैं ने कहा न अचानक मीटिंग आ गई… अब जौब तो छोड़ नहीं सकती मैं,’’ नीला ने अपनी मजबूरी बताई. ‘‘भले तू अपनी नौकरी नहीं छोड़ सकती, लेकिन मेरी परिस्थिति भी तो सम?ा. मैं खुद बेटेबहू पर आश्रित हूं. मुझे  उन के हिसाब से चलना पड़ता है. इसलिए कह रही हूं रुद्र को इस की दादी के पास छोड़ आ. लेकिन तू सुनती ही कहां है मेरी.’’ ‘‘आप की बात सही है मां. लेकिन रुद्र अभी बहुत छोटा है. उसे मेरी जरूरत है और फिर कौन सा आप को रोजरोज कष्ट उठाना पड़ता है जो आप इतना सुना रही हो,’’

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