हौर्न की आवाज़ सुनते ही मानसी सैंडविच का एक टुकड़ा हाथों में ले, अपने मम्मीपापा को गले लगाती हुई, डायनिंग चेयर पर टंगा अपना बैग कांधे पे लटका कर बाहर की तरफ दौड़ी. मानसी की मां अमिता भी उस के पीछे भागी. गेट के बाहर तापस अपनी स्टाइलिश बाइक पर मानसी का इंतजार कर रहा था.
मानसी को खुले स्ट्रेट बाल, ब्लैक ट्राउजर, व्हाइट शर्ट और उस पर ब्लैक ब्लैजर में देखते ही अपनी आंखों में चढ़ा गौगल उतार मानसी को ऊपर से नीचे शरारती अंदाज में देखते हुए बोला- “लगता है आज तुम मेरे साथसाथ पूरे मैनेजमैंट का होश उड़ाने वाली हो.”
यह सुन मानसी बड़ी अदा से मुसकराती हुई अपने हाथों से बाल पीछे की ओर झटकती हुई बोली, “मिस्टर तापस, यह फ्लर्ट करने का समय नहीं है, जल्दी चलो, आई एम गैंटिंग लेट.” यह कहती हुई मानसी बाइक पर बैठ गई और अपनी मम्मी को हाथ हिला कर बाय करने लगी. तापस ने अपनी बाइक की स्पीड बढ़ा ली और बाइक सरसराते हुए वहां से निकल गई.
मानसी के जाने के बाद मानसी की मां अमिता अंदर आ कर अपने पति रजत से बोली, “आज कैंपस सेलैक्शन में मानसी का सेलैक्शन हो या न, उसे जौब मिले या न लेकिन मैं इतना कहे देती हूं इस साल उस के एमबीए कंपलीट करते ही उस की शादी जरूर होगी चाहे कुछ भी हो जाए. वैसे भी, तापस की तो अच्छीखासी नौकरी है, शादी के बाद भी मानसी नौकरी कर सकती है. यह जरूरी नहीं है कि जौब मिलने के बाद ही मानसी की शादी हो.”
मानसी के पिता अखबार पर नजरें गड़ाए मुसकराते हुए बोले, “शादी भी हो जाएगी तुम काहे इतना परेशान होती हो, तापस जैसा अच्छा और वैल सैटल्ड लड़का मानसी का जीवनसाथी बनने वाला है, तुम्हें और क्या चाहिए.”
“बात वह नहीं है, सगाई के बाद शादी में ज्यादा देर करना ठीक नहीं है,” अमिता चिंता व्यक्त करती हुई बोली.
“हां, तुम ठीक ही कह रही हो लेकिन यह निर्णय तो स्वयं मानसी का ही है कि उस के एमबीए कंपलीट होने और उसे जौब मिलने के बाद ही वह शादी करना चाहती है और फिर तापस भी तो हमारी मानसी के इस फैसले में उस के साथ है. ये आजकल के बच्चे हैं अमिता, अपना भलाबुरा खूब समझते हैं. हमें चिंता करने की जरूरत नहीं. लेकिन फिर भी हम तापस के मातापिता से इस बारे में बात करते हैं.”
आज मानसी के कालेज में कैंपस सेलैक्शन था और मानसी इस के लिए पूरी तरह से तैयार थी. तापस की सरपट दौड़ती बाइक और बीचबीच में आते स्पीड ब्रेकर्स पर अचानक लगते ब्रेक से तापस और मानसी का एकदूसरे से होता स्पर्श दोनों के दिल में एक हलचल पैदा कर रहा था. तापस के शरीर से हलके से होते स्पर्श से मानसी के गाल सुर्ख हो जाते और वह अपनेआप से शरमा जाती. तापस यह सब अपने बाइक में लगे मिरर से देख रहा था. मानसी का हाल ए दिल तापस से छिपा नहीं था.
कालेज कैंपस के बाहर पहुंचते ही मानसी को गले लगा कर तापस बोला, “औल द बेस्ट, तुम अपना इंटरव्यू दो, तब तक मैं अपने औफिस के कुछ जरूरी काम निबटा कर आता हूं.” इतना कह कर मानसी को ड्रौप करने के बाद तापस वहां से चला गया.
तापस बैंगलुरु की एक आईटी कंपनी में था. उस की कंपनी नागपुर में भी अपना एक नई ब्रांच लौंच कर रही थी जिसे तापस लीड कर रहा था, इसलिए तापस को महीने में एकदो चक्कर नागपुर के लगाने ही पड़ते. वैसे भी नागपुर में तापस का अपना घर था, उस के मातापिता यहीं रहते थे और फिर जब से उस की सगाई मानसी से हुई थी तब से तापस को जब भी मौका मिलता वह बैंगलुरु से नागपुर आ जाता. जिस से एक पंथ दो काज हो जाता, औफिस के काम के साथसाथ तापस का मानसी से मिलना भी हो जाता.
अभी 2 महीने पहले ही तापस और मानसी की सगाई दोनों परिवारों की रजामंदी से हुई थी. तापस ने मानसी को पहली बार अपने दोस्त सुभाष की शादी में देखा था और देखते ही उसे अपना दिल दे बैठा. मानसी की खूबसूरती और उस की अदाओं पर वह कुछ इस तरह फिदा हुआ कि पूरी शादी में बस वह मानसी के आगेपीछे भौंरे की भांति मंडराता रहा और मानसी…जैसे परवाना को देख शमा धीरेधीरे पिघलने लगती है वैसे ही मानसी भी बारबार तापस को अपने सामने देख पिघल रही थी.
क्रीम कलर के लंहगे पर खूबसूरत डिजाइनर चोली और उस पर लहराती हुई चुनरी तापस के होश उड़ाने के लिए काफी थी. मानसी का गोरा रंग क्रीम कलर में और अधिक निखर आया था. पूरी शादी में तापस का ध्यान बस मानसी पर ही रहा. मानसी यह बात जान कर भी अनजान बनी रही. जब भी तापस से उस की नजर मिलती, वह सिहर उठती.
खाने के वक्त जब मानसी अपनी सहेलियों के संग फूड कौर्नर में बर्फ़ के गोले की चुस्कियां लेने लगी, मानसी के होंठ उस के गोरे चेहरे पर लाल गुलाब की तरह खिल उठे जिसे देख तापस की निगाहें मानसी के होंठों पर ही जा कर ठहर गईं. उस की यह छवि सीधे तापस की निगाहों से होते हुए दिल में उतर गई.
तापस के बहुत प्रयत्नों के बाद भी कोई बात न बनी. वह मानसी को शीशे में उतारने में असफल रहा. मानसी उस से किसी भी प्रकार से बात करने को तैयार न थी. ऐसा पहली बार था जब तापस के लाख प्रयासों के बावजूद कोई लड़की उस से बात करने को तैयार नहीं थी वरना तापस के आकर्षक व्यक्तिव के आगे लड़कियां स्वयं खिंची चली आती थीं. तापस केवल इतना जान पाया था कि वह जिस लड़की के लिए बावरा हुआ जा रहा है उस का नाम मानसी है.
तापस के दोस्त सुभाष की शादी तो हो गई लेकिन तापस की रातों की नींद उड़ चुकी थी. मानसी की तसवीर उस के दिल में कुछ इस तरह बस गई थी कि वह उसे भुला ही नहीं पा रहा था. अब उस के पास सुभाष से सारी बातें कहने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था. अखिरकार, उसे मानसी तक पहुंचने के लिए सुभाष का सहारा लेना ही पड़ा और सुभाष ने भी अपने दोस्त का हाल ए दिल जान कर मानसी का पता लगा ही लिया. वह सुभाष की बहन रमा की सहेली थी. यह जानने के बाद तापस जब भी बैंगलुरु से नागपुर आता, मानसी के घर और कालेज के चक्कर काटने लगा लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगी.