कहानी के बाकी भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

अमित और शेफाली रात के समय शिमला पहुंचे थे. रात को ही अमित को जुकाम ने जकड़ लिया था. सारी रात होटल के कमरे में वह छींकता रहा था.

अमित ने दवाई भी ली थी, मगर उस का तत्काल असर नजर नहीं आया.

सुबह शिमला में जैसा मौसम बन गया था, उसे देख कर तो यही लग रहा था कि किसी भी वक्त बर्फ गिरनी शुरू हो सकती थी.

उस समय बर्फबारी देखने के शौकीन लोग बड़ी संख्या में शिमला में जमा थे. होटल ठसाठस भरे हुए थे. अगर आशा के अनुसार शीघ्र बर्फबारी नहीं होती तो शिमला में जमा सैलानियों में मायूसी छा सकती थी. बर्फ की सफेद चादर ओढ़ने के बाद शिमला कितना खूबसूरत दिखता था, यह शेफाली को मालूम था.

शेफाली कई बार शिमला आ चुकी थी. शिमला से उस के अतीत की कई यादें जुड़ी थीं. इस बार शेफाली शिमला नहीं आना चाहती थी. उसे मालूम था कि शिमला में अतीत की यादें उसे ज्यादा परेशान करेंगी.

शेफाली डलहौजी, मसूरी या और किसी भी हिल स्टेशन पर जाने को तैयार थी, लेकिन अमित शिमला जाने की जिद पर अड़ गया था.

दरअसल, अमित न तो पहले कभी शिमला आया था और न ही उस ने कभी स्नोफाल देखा था. इसलिए शिमला में उस के लिए पर्याप्त आकर्षण था.

शेफाली खुल कर अमित को यह नहीं बता सकी थी कि वह शिमला क्यों नहीं जाना चाहती थी? शेफाली कहती तो शायद अमित को ज्यादा अच्छा भी नहीं लगता.

वैसे अमित और शेफाली के पहले पति दीपक के स्वभाव और आदतों में बड़ा फर्क था. कारोबारी इनसान होने के बावजूद अमित के स्वभाव में सरलता और खुलापन था. अमित की आदत न तो बातों को अधिक कुरेदने की और न ही छोटीमोटी बातों को अहमियत देने की थी.

किसी बात को चुपचाप मन में रखने के बजाय वह उसे कह देना ज्यादा पसंद करता था.

पिछले 3 वर्षों में शेफाली अमित को किसी हद तक समझ तो गई थी, मगर अपने कड़वे अनुभवों के चलते वह किसी भी मर्द पर इतनी जल्दी भरोसा करने को तैयार नहीं थी.

शायद यही वजह थी कि शेफाली ने अमित को यह बताने में संकोच से काम लिया था कि उसे शिमला जाने में इतनी दिलचस्पी क्यों नहीं थी?

मालूम नहीं अमित उस समय कैसे रिऐक्ट करता, जब शेफाली उसे यह बताती कि वह अपने पहले पति दीपक के साथ कई बार शिमला आई थी.

अमित को तो यह भी मालूम नहीं था कि वह शेफाली के साथ शिमला के जिस होटल में ठहरा था उसी होटल में कभी शेफाली अपने पहले पति दीपक के साथ हनीमून के लिए ठहरी थी.

कहने को तो शादी के बाद अमित ने शेफाली से साफ शब्दोें में कहा था कि उसे उस के अतीत से कोई भी दिलचस्पी नहीं है. शादी के बाद अमित ने शेफाली को यह भी आश्वासन दिया था कि वह उस के बीते हुए कल के बारे में उस से कभी सवाल नहीं करेगा.

किंतु शेफाली का मानना था कि सब कहने की बातें हैं. यह बात अमित का मूड खराब कर सकती थी कि जिस होटल में वे दोनों ठहरे हुए थे, उसी होटल में उस ने कभी अपने पहले पति के साथ हनीमून मनाया था.

शेफाली इतनी मूर्ख भी नहीं थी कि ऐसी बात का जिक्र अमित से करती.

ज्यादा सर्दी अकसर अमित को जुकाम में जकड़ती थी. जैसा डर था, शिमला आते ही जुकाम की पकड़ में आने से वह बच नहीं सका था.

दोनों ने सुबह का नाश्ता बिस्तर पर ही किया. खिड़की से बाहर देखने पर धुंध की वजह से माल रोड की सड़क भी ठीक से नजर नहीं आ रही थी.

अपनी तबीयत को देखते हुए अमित का

होटल से बाहर निकलने का कोई इरादा फिलहाल नहीं था. मगर अपनी वजह से वह शेफाली को कमरे में बंद नहीं रखना चाहता था. इसलिए शेफाली को देखते हुए उस ने कहा, ‘‘मेरा तो इस हालत में होटल से बाहर निकलना ठीक नहीं होगा. मेरी मानो तो तुम एक छोटा सा राउंड अकेले मार आओ. अगर इस जुकाम से छुटकारा मिला तो दोपहर के बाद साथसाथ निकलेंगे.’’

‘‘नहीं, अकेले कोई मजा नहीं आएगा,’’ शेफाली ने कहा.

‘‘मेरे साथ इस कमरे में बंद रह कर तुम भी बेकार में बोर होगी. हम यहां तफरीह के लिए आए हैं. 1-1 पल को एंजौय करना चाहिए. यह बेवकूफी ही होगी कि मेरे साथ तुम भी इस कमरे में पड़ीपड़ी हिल स्टेशन पर आने का अपना मजा किरकिरा करो.’’

अमित के मजबूर करने पर शेफाली माल रोड पर चक्कर लगाने के लिए निकल पड़ी.

माल रोड की गहरी धुंध और कड़ाके की सर्दी में एकदूसरे से सट कर बांहों में बांहें डाल कर टहलते हुए जोड़े काफी रोमानी नजारा पेश कर रहे थे.

उड़ती धुंध के कोमल किंतु सर्द स्पर्श से शेफाली के गाल एकदम सुन्न से पड़ गए थे.

शेफाली के मन में कुछ कसकने लगा था. वक्त के साथ सब कुछ कैसे बदल गया था. पुराने रिश्तेनाते टूट गए थे और नए बने थे.

अपने पहले पति दीपक के साथ शेफाली जब हनीमून मनाने शिमला आई थी तो उस ने कभी सोचा नहीं था कि जन्मजन्मांतर के संबंधों की डोर इतनी छोटी और कच्ची हो सकती थी.

8-9 वर्ष पहले की ही बात थी. इसी माल रोड पर दीपक का हाथ थाम कर चलते हुए खुशी से शेफाली के कदम जैसे जमीन पर ही नहीं पड़ रहे थे. दीपक जैसा जीवनसाथी पा कर खुद को दुनिया की खुशकिस्मत औरतों में शुमार करते हुए उस ने भविष्य के कई सपने देख डाले थे.

देखने में तो शेफाली को वैसा ही जीवनसाथी मिला था जैसा वह चाहती थी. पढ़ालिखा और देखने में सुंदर, उस में कोई ऐब भी नहीं था. उस पर बैंक की सरकारी नौकरी, जिस में भविष्य के बारे में आर्थिक सुरक्षा की गारंटी थी.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...