इन का परिवार पहाड़ी था, परंतु ईसाई धर्म अपना लिया था. उन की बिरादरी में बहुत से परिवार थे, जिन्होंने पाखंडों और रूढि़वादिता से तंग आ कर अपनी इच्छा से इस धर्म को अपनाया था. अगले दिन जब अमन वार्ड में मरीजों को देखने गया तो नीरा उसी वार्ड में थी. उस के मातापिता भी वहीं खड़े थे. डा. अमन ने जब नीरा का हालचाल पूछा तो उस ने अपनी लंबीलंबी पलकें झपका कर ठीक महसूस करने का इशारा कर दिया. उस के पिता उतावले से हो कर पूछने लगे, ‘‘डाक्टर हड्डी जुड़ने में कितना समय लगेगा? ठीक तो हो जाएगी न?’’
अमन ने उन्हें धीरज बंधाते हुए कहा, ‘‘हड्डी जुड़ने में थोड़ा समय लगेगा. आप चिंता न करें, आप की बेटी बिलकुल ठीक हो जाएगी.’’
यह सुन कर उन दोनों के चेहरे पर गहरी चिंता झलकने लगी. यह देख कर अमन को हैरानी हुई. उस ने नीरा के पिता से कहा, ‘‘आप की बेटी ठीक है. फिर यह चिंता किसलिए कर रहे हैं?’’
इस पर नीरा के पिता ने झिझकते हुए बताया, ‘‘डाक्टर साहब, नीरा की परीक्षा खत्म होने के बाद सगाई होने वाली है. हमारी बिरादरी के एक आईएएस लड़के से इस की शादी की बात पक्की हो रखी है. 3 दिन बाद लड़का सगाई की रस्म के लिए आने वाला है. उस के मातापिता यहीं रहते हैं.’’
अमन ने कहा, ‘‘देखिए, आप पहले बेटी की सेहत पर ध्यान दीजिए. सगाई बाद में होती रहेगी,’’ कह अमन अन्य मरीजों का मुआयना कर वार्ड से बाहर जाने से पहले नीरा से बोला, ‘‘मेरे पास कुछ किताबें हैं, आप को भिजवाता हूं, पढ़ती रहेंगी तो मन लगा रहेगा.’’
आज नीरा के होने वाले पति व उस के परिवार वालों की आने की उम्मीद में उस के मम्मीपापा जल्दी आ गए. वे नीरा के लिए गुलाबी रंग का सलवारकुरता लाए थे. नीरा के चेहरे पर भी खुशी झलक रही थी. जल्दी से नर्स को बुला कर हाथमुंह धो कर कपड़े बदल वह बेसब्री से इंतजार करने लगी.
सुबह से शाम हो गई पर लड़के के परिवार का कहीं दूरदूर तक अतापता न था. अमन जब शाम को वार्ड में आया तो देखा नीरा के मातापिता चेहरे लटकाए जा रहे थे, नीरा को यह कह कर कि चर्च में जा कर पता करते हैं. शाम को वे वहां आएंगे ही… सब ठीकठाक हो. नीरा भी थकावट और चिंता से बेहाल थी. चुपचाप चादर ओढ़ कर सो गई.
अगले दिन नीरा के मातापिता आए तो उन के चेहरों पर उदासी छाई थी. जैसे अरसे से बीमार हों.
अमन वार्ड के अन्य मरीजों को देख रहा था. नीरा की मां आते ही रोष भरी आवाज में बोल उठीं, ‘‘मैं कहती थी न कि दाल में कुछ काला है. चर्च में लड़के का परिवार आया था पर परायों जैसा व्यवहार था. औपचारिक हायहैलो का जवाब दे कर चर्च से निकल गए. तुम्हारा रिश्ता करवाने वाली महिला आशा भी नजरें चुरा रही थी. मैं ने पास जा कर पूछा तो बोली, ‘‘लड़के का परिवार बहुत नीच निकला. जब मैं ने नीरा के संग सगाई के प्रोग्राम के बारे में पूछा तो नीरा के बारे में उलटासीधा बोलने लगे कि नीरा हाथ छोड़ कर साइकिल चला रही थी…कुछ लड़कों के साथ रेसिंग कर रही थी. ऐक्सिडैंट इसी कारण हुआ..
‘‘न भई न मेरे लड़के ने तो साफ मना कर दिया कि नहीं करता सगाई. कहीं नीरा की टांग में फर्क रह गया तो उस की जिंदगी बरबाद हो जाएगी. उसे तो आएदिन क्लब व पार्टियों में जाना पड़ता है.
‘‘भई हम ने तो वही किया जो बेटे ने कहा. अच्छा हुआ अभी बातचीत ही हुई थी, कोई रस्म नहीं हुई थी.’’
सारी बात सुन कर नीरा की मां पस्त हो कर स्टूल पर बैठ गईं और सिसकने लगीं. पिता भी सिर झुकाए पलंग पर बैठ गए. ये सब सुन कर नीरा गुस्से से कांपने लगी. फिर चिल्ला कर बोली, ‘‘उन की इतनी हिम्मत… मेरे लिए ऐसा बोला. उस दिन तो लड़के की मां तारीफों के पुल बांध रही थीं, नीरा के हाथ में चाय का गिलास था. उस ने उसे जोर से पटक दिया. वार्ड के अन्य मरीज उसे देखने लगे. डा. अमन और उस के सहयोगी नीरा को शांत करने की कोशिश करने लगे. नीरा के पिता नीरा की मां को डांटते हुए बोले, ‘‘अभी सबकुछ बताना था?’’
नीरा की मां भी भरी बैठी थीं. गुस्से में जोर से बोलीं, ‘‘तो क्या बताने के लिए मुहूर्त निकलवाती?’’
बड़ी मुश्किल से उन्हें बाहर भेज कर नीरा को नींद का इंजैक्शन लगाया गया. पल भर में ही सब कुछ घटित हो गया.
अमन सोचने लगा वास्तव में नीरा के साथ अन्याय हुआ है. यदि यह ऐक्सिडैंट शादी के बाद होता तो क्या होता? उसे समाज के ऐसे मतलबी लोगों से नफरत होने लगी. उसे नीरा से सहानुभूति सी होने लगी कि अच्छीभली लड़की के जीवन में जहर घोल दिया.
नीरा अभी इस घटना से उबर भी नहीं पाई थी कि एक और घटना हो गई, जिस ने नीरा की जीवनधारा को उलटी दिशा में मोड़ दिया.
2 दिन बाद ही नीरा की मां जब नीरा से मिलने आईं तो बहुत ही गुस्से में थीं. आते ही आवदेखा न ताव नीरा पर बरस पड़ीं. बोलीं, ‘‘नीरा सचसच बताओ तुम सचमुच हाथ छोड़ कर साइकिल चला रही थी? लड़कों के साथ रेसिंग कर रही थी? सारी कालोनी में तुम्हारे ही चर्चे हैं.’’
नीरा का दिल पहले ही चोट खाया था. यह बातें उसे नश्तर की तरह चुभने लगीं. मां और बेटी के बीच बहस ने खतरनाक रूप ले लिया. नीरा पलंग से उठने की कोशिश में गिर गई. डाक्टर ने उसे प्राइवेट रूम में शिफ्ट कर दिया. सीनियर डाक्टर ने नीरा के घर वालों पर नीरा से मिलने की पाबंदी लगा दी क्योंकि इस का नीरा की सेहत पर गलत असर पड़ रहा था और अस्पताल का माहौल भी बिगड़ रहा था. हां, वे नीरा का हाल डाक्टरों से फोन से पूछ सकते थे.
शारीरिक और मानसिक चोट ने नीरा को बुरी तरह तोड़ दिया था. वह न तो किसी से बातचीत करती और न ही दवा व भोजन समय पर लेती. सभी डाक्टरों ने उसे समझाया पर वह टस से मस न हुई.
आगे पढ़ें- नीरा अमन को अपना मित्र समझने लगी. वह…