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कहती रही सुमन कि राजन झूठ बोल रहा है, बल्कि वही उस पर गंदी नजर रखता था और आज उस ने ही उस के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की है. भरोसा करे उस पर, उस ने कुछ नहीं किया है. मगर मीता ने उस की एक भी बात पर भरोसा नहीं किया और रात को ही उसे अपने घर से निकल जाने का हुक्म सुना दिया. इतना तक कह दिया कि वह ‘आस्तीन की सांप’ निकली। गलती हो गई उसे अपने घर में लाकर. मगर मीता ने एक बार भी यह नहीं सोचा कि गलत उस का पति की भी हो सकता है.

रोतेरोते कहती रही सुमन की इतनी रात को वह कहां जाएगी। सुबह तक की मोहलत दे दे. लेकिन मीता ने धक्के मार कर उसे अपने घर से बाहर निकाल दिया.

इस कुप्प अंधेरी रात में कहां जाती वह? न तो उस के लिए पति के घर का दरवाजा खुला था और ना ही मां का. मीता ने भी उस पर अविश्वास कर उसे अपने घर से निकाल दिया, तो अब उस के पास एक ही रास्ता बचता था, मौत का. वैसे भी अब उस के पास जीने के लिए रखा ही क्या था. वह पागलों की तरह सड़क पर चली जा रही थी मरने के लिए, मगर उसे नहीं पता था कि कुछ गुंडे उस का पीछा कर रहे हैं। मौका मिलते ही सुनसान गली में उन तीनों ने सुमन को धरदबोचा और उसके साथ जबरदस्ती करने लगे. सुमन जोरजोर से चिल्लाने लगी. मगर इतनी रात गए सुनसान गली में कौन सुनता उस की आवाज? लेकिन तभी तेज रफ्तार से एक गाड़ी आ कर उस के सामने रुकी. गाड़ी की तेज रोशनी से उन गुंडों की आंखें चौंधिया गई. चिल्लाया,“कौन है बे? हिम्मत है तो सामने आ.“

“रात के अंधेरे में कुत्ते की तरह भौंकने वाले, हिम्मत है तो तू मेरे सामने आ कर भौंक,”एक गरजती आवाज सुन तीनों चौंक पड़े. लेकिन सामने एक महिला को देख उन की हंसी छूट पड़ी, क्योंकि उन्हें लगा एक अकेली औरत क्या बिगाड़ लेगी उन का?

पुरुषों की मानसिकता आज भी यही है कि औरत कमजोर, अबला नारी होती है, जिसे वह जब चाहे अपने पैरों के नीचे रौंद सकता है. लेकिन उस महिला ने उन गुंडों पर लातघूंसों की बारिश शुरू कर दी। ऐसा पस्त कर दिया तीनों को मारमार कर कि वे वहां से भागने के लायक भी नहीं बचे. तब तक पुलिस भी वहां पहुंच गई और तीनों गुंडों को घसीटते हुए गाड़ी में बैठाषकर ले गई.

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35-36 साल की उस महिला की स्फूर्ति और निडरता देख कर सुमन भी दंग रह गई थी।
“घर से भाग रही थी या किसी नदीनाले में कूद कर मरने जा रही थी?“ ऊपर से नीचे तक सुमन को घूरते हुए जब उस महिला ने पूछा, तो वह सहम उठी.

“इस का मतलब मैं सही हूं. चलो बैठो गाड़ी में,” उस ने इशारा किया. लेकिन सुमन अब भी वैसे ही अपनेआप में सिमटी खड़ी थी. उसे डर लग रहा था कि पता नहीं यह औरत कौन है और उसे कहां ले जाएगी. अब किसी पर उसे भरोसा नहीं रह गया था.

“डरो मत, बैठो गाड़ी में,” जब उस ने फिर कहा तो सुमन को गाड़ी में बैठना ही पड़ा, क्योंकि चारा भी क्या था उस के पास. कुछ ही देर में गाड़ी एक टावर के पास आ कर रुकी. गाड़ी की हौर्न सुनते ही दौड़ कर वाचमैन ने गेट खोला और अदब से उस महिला को नमस्ते किया. उस का घर 7वें फ्लोर पर था. घबराई सी सुमन यहां तक तो आ गई, पर उस का दिल जोरजोर से धड़क रहा था कि जाने आगे क्या होगा? कहीं उस के साथ फिर कुछ गलत हो गया तो? लेकिन घर में प्रवेश करते ही उसे एक अजीब सा एहसास हुआ. वह इधरउधर देखने लगी. घर बहुत बड़ा नहीं था, पर बहुत ही करीने से सजा हुआ था. दीवारों पर तसवीरें, खिड़कियोंदरवाजों पर लहराते परदे, एक कोने में बिस्तर और एक कोने में दीवान। टीवी के सामने फर्श पर गद्दा व तकिए. स्टूल पर लैंप. मेज के पास किताबों का रैक. वह कमरा ऐसा लग रहा था जैसे एक रंगीन पत्रिका.

“कौफी पीओगी?” गैस पर बरतन चढ़ाते हुए जब उस महिला ने पूछा तो सुमन अकचका कर उस की तरफ देखने लगी.

“जानती हो, चाहे कितनी भी देर हो जाए मुझे घर लौटने में, जब तक 1 कप कौफी बना कर न पी लूं, मजा नहीं आता. पीती तो हो न कौफी?”

“हां, पीती हूं,” सूखते गले से बोल कर सुमन धीरे से कुरसी पर बैठ गई. कुछ ही देर में वह 2 कप कौफी और सैंडविच बना कर ले आई. सुमन को कौफी पकड़ाते हुए वह अपनी भी कौफी उठा कर चुसकियां भरने लगी.

“मैं ने तुम्हारा नाम तो पूछा ही नहीं. क्या नाम है तुम्हारा?” उस महिला ने पूछा तो धीरे से सुमन ने कहा,”सुमन।”

“अच्छा नाम है, और मैं किरण हूं,” बोल कर वह हंसी.

“वैसे, सुमन का मतलब पता है तुम्हें? हंसमुख, हमेशा प्रसन्न रहने वाला. मगर तुम तो कितनी दुखी नजर आ रही हो? क्या कोई समस्या है जिंदगी में? मरने क्यों जा रही थी?”सुबह की चाय पीते हुए जब किरण ने पूछा तो सुमन की आंखों से आंसू बहने लगे. किरण ने उसे रोने से इसलिए नहीं रोका, क्योंकि रोने से इंसान का मन हलका हो जाता है. कुछ देर रो लेने के बाद जब उस का मन जरा हलका हुआ तो सुमन बताने लगी…

ग्रैजुएशन करने के बाद वह आगे और पढ़ना चाहती थी. उसका शुरू से एमबीए करने का मन था. उस की कई सहेलियों ने भी गैजुएशन के बाद एमबीए करने का सोच रखा था. इसलिए वह चाहती थी उन के साथ वह भी उसी कालेज में ऐडमिशन ले ले। मगर सुमन के मातापिता उस की शादी कर देना चाहते थे. कितना कहा सुमन ने कि उसे आगे और पढ़ने दें. पर उन की सोच कि ‘वक्त के साथ लड़कियों की शादी हो जाए वही अच्छा होता है’ के आगे सुमन की एक न चली. बेटी मांबाप के लिए एक बोझ से कम नहीं होती, जिसे वह जितनी जल्दी हो सके उतार कर अपना माथा हलका कर लेना चाहते हैं.

अच्छा घरवर मिलते ही सुमन के मातापिता ने उस की शादी सूरज से तय कर दी जो एक सरकारी विभाग में अच्छे पद पर कार्यरत था. शहर में उस ने अपना घर भी बना लिया था तो और क्या चाहिए था उन्हें. लगा बेटी सुख करेगी वहां जा कर. लेकिन उन की सोच गलत थी. अच्छी नौकरी और बड़ा घर होने से लोगों के विचार भी अच्छे और दिल बड़ा नहीं हो जाता.

ससुराल में कुछ दिन रहने के बाद ही सुमन को पता चल गया कि सूरज अच्छा आदमी नहीं है. शराबी तो वह है ही, कई औरतों के साथ भी उस के नाजायज संबंध हैं. शराब पीना, औरतों के साथ रातें गुजारना उस की आदतों में शामिल है.

उस के किस्से सिर्फ घर वालों को ही नहीं, बल्कि मोहल्लेभर में भी सब जानते थे.

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यह जानते हुए कि सूरज एक नंबर का ऐयाश इंसान है, उस की शादी करा दी गई.

एक दिन जब सुमन ने इस बात पर लड़ाई की और कहा कि जब बाहर के औरतों के साथ ही संबंध रखना था, तो फिर उस से शादी क्यों की? इस बात पर सूरज ने उसे बहुत मारा, यह कह कर कि वह मर्द है जो चाहे कर सकता है. गुस्से में सुमन ने अपनी सास से कहा भी कि जब उन्हें पता था कि उस का बेटा शराबी है, कई औरतों से उस के संबंध हैं,तो फिर क्यों उस ने उस की जिंदगी बरबाद की? क्यों नहीं बताया सब कुछ? क्यों अपने बेटे की गंदी आदतों को छिपाया?

आगे पढ़ें- सास के पास कोई जवाब नहीं था. बेटे…

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