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लेखक- राजेश कुमार सिन्हा

आज सुबह उठते ही अनुज ने यह तय कर लिया था कि वह औफिस नहीं जाएगा, बस पूरे दिन आराम करेगा या कोई अच्छी सी साहित्यिक पत्रिका पढ़ेगा. इस से थोड़ा मानसिक तनाव कम हो जाएगा, यही सोच कर उस ने सब से पहले अपने सीनियर और सहकर्मी दोनों को ही मैसेज कर दिया और फिर अनमने मन से चाय बनाने की तैयारी करने लगा.

अनुज को किचन में जाना बिलकुल पसंद नहीं था. जब तक कोमल उस के साथ थी, वह शायद ही कभी किचन में गया था, पर उस के जाने के बाद से उस के पास किचन में न जाने का कोई विकल्प नहीं था.

पिछ्ले 5 महीनों से वह लंच कैंटीन में और डिनर पास के होटल में कर लेता था, पर चाय या कुछ लाइट स्नैक्स के लिए किचन में आना उस की मजबूरी थी.

अनुज जब बहुत छोटा था, तभी उस के मातापिता का देहांत एक सड़क दुर्घटना में हो गया था और उस की परवरिश उस की बूआ ने की थी, जो उसे बहुत प्यार करती थी, इसलिए वहां उस के जिम्मे कोई काम नहीं था. फिर कालेज और आगे की पढ़ाई उस ने होस्टल में रह कर की थी, जहां सारी सुविधाएं उपलब्ध थीं. ऐसे में न तो उसे कोई काम करने का मौका मिला और न ही उस ने कभी ऐसी रुचि दिखाई.

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नौकरी शुरू करने के कुछ ही दिन बाद कोमल उस की जिंदगी में आ गई, फिर तो मानो उस की जिंदगी में पर लग गए…

वह इन्हीं खयालों में डूबा था कि अचानक उस के मोबाइल की घंटी बजी. फोन औफिस से ही था. उस ने फोन उठा लिया और बातें करने लगा. बातचीत लंबी चली और जब बात खत्म हुई, तब तक आधी चाय उबल कर नीचे आ चुकी थी. उसे बहुत गुस्सा आया और चाय पीने का मूड जाता रहा. तभी उसे खयाल आया कि अगर अभी कोमल यहां होती तो अब तक उसे दोबारा चाय मिल चुकी होती…

कोमल का खयाल आते ही वह गुस्से से भर गया. बेमन से उस ने टैलीविजन चालू कर दिया और अपने पसंदीदा चैनल की खोज में फटाफट चैनल बदलने लगा. तभी उसे याद आया कि वह जब भी ऐसा करता था तो कोमल उसे डांट दिया करती थी.

“क्या कर रहे हो, न खुद कुछ देखते हो और न दूसरों को देखने देते हो, मुझे पता है कि तुम गुस्से में हो, पर अपना गुस्सा इस पर क्यों निकाल रहे हो, कुछ खराब हो जाएगा तो बिना मतलब ही खर्च करना पड़ जाएगा. लाओ रिमोट… मुझे दो,” और वह रिमोट उस के हाथ से ले लिया करती थी.

“तुम्हें कैसे पता कि मैं गुस्से में हूं?”

“मुझे सब पता चल जाता है,” यह कह कर वह जोर से हंस दिया करती थी. उस की हंसी में मेरा गुस्सा न जाने कहां चला जाता था.

आज पता नहीं क्यों उसे कोमल की याद बारबार आ रही थी. वह उसे चाह कर भी भूल नहीं पा रहा था. अचानक उस के जेहन में कोमल से हुई उस की पहली मुलाकात का पूरा दृश्य किसी फिल्म की तरह घूमने लगा.

अनुज को एमबीए करते ही मुंबई की एक नामचीन एमएनसी में नौकरी मिल गई थी, और उस की कंपनी ने उसे रहने की सुविधा भी दे रखी थी, इसलिए वह बिलकुल टेंशन फ्री था. उस की बूआ भी यह जान कर बहुत खुश थीं क्योंकि मुंबई में मूल समस्या रहने की ही होती है.

अनुज को फ्लैट अंधेरी में मिला हुआ था और उस का औफिस नरीमन पाइंट में था और दोनों ही लोकेशन ऐसे थे कि उसे आनेजाने में भी ज्यादा दिक्कत नहीं होती थी.

अनुज अपने व्यवहार और कुशल कार्यशैली के कारण कुछ ही समय में अपनी कंपनी में काफी लोकप्रिय हो गया था. उस की बौस उस के परफार्मेंस का उदाहरण दूसरों को दिया करती थीं.

एक दिन उस के बौस ने उसे बताया कि उस की कंपनी एक नया प्रोडक्ट लौंच करने वाली है, जिस की मार्केटिंग टीम को उसे ही लीड करना है. साथ ही, उस ने यह भी कहा कि उसे उस ऐड कंपनी से भी कोआर्डिनेट करना होगा, जिसे उस प्रोडक्ट का विज्ञापन तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि सबकुछ दिए गए टाइम फ्रेम में हो सके.

यह सुन कर अनुज बहुत खुश हुआ और इस ने यह जानकारी अपनी बूआ को भी दी.

अगले दिन ही उसे ऐड कंपनी के औफिस जाने को कहा गया, जो अंधेरी में ही था, जहां उसे टीम लीडर कोमल शर्मा से मिलना था. साथ ही, उस की बौस ने उसे कोमल का नंबर भी दे दिया, ताकि औफिस ढूंढ़ने में अगर कोई परेशानी हो तो वह उस से बात कर सके.

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अनुज लंच के बाद अपने औफिस से निकला और बड़ी आसानी से ऐड कंपनी के औफिस में पहुंच गया. कुछ देर इंतजार करने के बाद औफिस ब्वाय ने उसे मीटिंग रूम तक पहुंचा दिया.

मीटिंग में कोमल के अलावा 2 और लोग थे पारुल और नवनीत, एक आम परिचय के बाद ऐड कैंपेन पर लंबी बातचीत चली. बीचबीच में अनुज अपनी बौस को भी अपडेट करता रहा.

टी ब्रेक में थोड़ी पर्सनल बातचीत भी हुई. अनुज ने अपने बारे में विस्तार से बताया और यह भी कहा कि वह इस प्रोजैक्ट को ले कर काफी उत्साहित है और यह चाहता है कि यह पूरी तरह से सफल हो जाए.

कोमल ने भी उसे एश्योर किया कि उस की पूरी टीम अपना बेस्ट देगी, भले ही हमें शार्ट नोटिस पर ही मिलना क्यों न पड़े.

अनुज ने धीरे से कहा कि वह बैचलर है, इसलिए उसे लेट सीटिंग से भी कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि वह अंधेरी में ही रहता है.

इस पर कोमल ने मुसकराते हुए कहा कि बैचलर तो वह भी है और अंधेरी में ही रहती है. अगर जरूरत पड़ती है तो वह भी लेट सीटिंग को तैयार है.

उस दिन मीटिंग काफी देर तक चली. कोमल भी उस के साथ ही औफिस से निकली. दोनों कुछ दूर तक साथ ही रहे.

कोमल ने उसे बताया कि वह मूल रूप से राजस्थान की है, पर वह बौर्न ऐंड ब्रेट अप यहीं की है. उस के पापा का यहां अपना बिजनेस है.

अनुज ने भी उसे अपने बारे में बताया और फिर दोनों अलगअलग आटो ले कर निकल गए.

घर पहुंच कर अनुज बहुत देर तक इस प्रोजैक्ट के बारे में सोचता रहा. अगर वह इस में सफल हो जाता है तो जाहिर है, उस के कैरियर को अच्छा ग्रोथ मिल सकता है. उसे कोमल भी काफी अच्छी लगी. अपने काम की एक्सपर्ट, सुलझी हुई, मिलनसार और विनम्र भी, ठीक वैसी ही जैसी वह लाइफ पार्टनर चाहता है. उसे खुद पर हंसी भी आ गई, क्याक्या सोच लिया उस ने.

दूसरे दिन औफिस पहुंच कर उस ने अपनी बौस को पूरी जानकारी दी और उन्होंने अनुज के काम की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह बाकी चीजों को छोड़ कर अभी सिर्फ इस प्रोजैक्ट पर ध्यान दे, क्योंकि कंपनी इसे अगले महीने ही बाजार में लाना चाहती है और इस के लिए अगर उसे हफ्तेभर अंधेरी में ही बैठना पड़े तो भी चलेगा, पर काम समय से पहले पूरा हो जाना चाहिए.

अनुज ने उन्हें बड़े ही स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैडम, प्लीज ट्रस्ट मी, आप ने जो ट्रस्ट मेरे ऊपर किया है, उसे कभी टूटने नहीं दूंगा, मेरे लिए भी यह एक चैलेंज की तरह है, जिसे मैं सही तरीके से अंजाम तक पहुंचा के ही कोई दूसरा काम करूंगा.”

“मुझे तुम पर पूरा ट्रस्ट है अनुज, तभी तो मैं ने इस के लिए तुम्हें सेलेक्ट किया है और मुझे पूरा विश्वास है कि तुम मुझे निराश नहीं करोगे.”

“बिलकुल नहीं मैडम, मैं जानता हूं कि मेरे कुछ सीनियर इस बात को ले कर आप से नाराज भी हैं, फिर भी आप मेरे साथ हैं.”

“गौड ब्लेस यू अनुज, डोंट वरी फौर आल सच इसुज, तुम बस इस काम पर ध्यान दो.”

“थैंक्स मैडम,” अनुज ने बहुत संजीदगी से कहा और अपने काम में लग गया.

पूरा एक हफ्ता मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बनाने और मीटिंग में निकल गया और अगला हफ्ता उस ने पूरी तरह से ऐड कंपनी के लिए फ्री रखा था, ताकि इस बार सबकुछ फाइनल कर के सेल्स हेड और सीईओ के लिए प्रेजेंटेशन रखा जा सके.

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उस ने कोमल को पहले से ही फोन कर के अपने 3 दिन का प्रोग्राम बता दिया था और कोमल ने भी उस से वादा किया था कि उस की तरफ से सबकुछ तैयार है और डेडलाइन के पहले ही वह उसे फाइनल कौपी सौंप देगा.

आगे पढ़ें- आखिर सभी की मेहनत रंग लाई और…

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