लेखिका- दिव्या विजय
अनन्याने अपने कपड़ों की ओर देखा. सिर से पांव तक ढकी हुई थी वह. इन का चयन उस ने जानबूझ कर किया था ताकि वह अपनी ओर से किसी को आमंत्रित देती न लगे. फिर उसे अपनी इस सोच पर क्रोध आया कि दुनिया की कौन सी लड़की इस बात के लिए किसी को आमंत्रण देती होगी.
अनन्या ने कार का शीशा कुछ नीचे कर लिया. इतना भर कि कांच में एक पतली लकीर दिखने लगी. उस पतली लकीर से आती हवा नश्तर की तरह उस का चेहरा चीरने लगी. वह ठंड से कांप उठी.
‘‘मैडम, खिड़की बंद कर दीजिए,’’ टैक्सी ड्राइवर की आवाज आई.
‘‘क्यों?’’ अनन्या अपनी आवाज जबरन कड़क कर बोली.
‘‘मैडम, ठंडी हवा आ रही है.’’
ड्राइवर की बात ठीक थी. लेकिन उस ने यह सोच कर अनसुना कर दिया कि अचानक चिल्लाने की जरूरत पड़ गई तो आवाज बाहर जा सकेगी. वह पतली लकीर डूबते को तिनके का सहारा साबित होगा.
थोड़ी देर बाद अनन्या की नजर बैक व्यू मिरर पर गई. ड्राइवर उसे ही देख रहा था. अनन्या ने अपना स्टोल गरदन में कस कर लपेट लिया. उसे क्यों देख रहा है? उस की आंखें उसे अजीब लगीं. बहुत अजीब. लाल डोरों से अटी हुईं. क्या उस ने शराब पी रखी है? उस ने गहरी सांस ली. भीतर की हवा नशीली थी, लेकिन उस के अपने परफ्यूम में सनी हुई. शराब की गंध का ओरछोर वह नहीं पा सकी थी.
ये भी पढ़ें- फैसला: अवंतिका और आदित्य के बीच ऐसा क्या हुआ था?
वह सोच में डूबी थी कि ड्राइवर की आवाज फिर आई, ‘‘मैडम, खिड़की बंद कर लीजिए प्लीज.’’
ड्राइवर ने स्वैटर के नाम पर पतली सी स्वैटशर्ट पहन रखी थी. उस की आवाज में कंपकंपी भर गई थी. खाली सड़क पर 80 की स्पीड से भागती गाड़ी और जनवरी महीने की कड़ाके की ठंड. वह खिड़की बंद करने लगी कि उस की नजर एक बार फिर ड्राइवर पर गई. वह मुसकरा रहा था. हो सकता है यह उस के प्रोफैशन का हिस्सा हो, लेकिन उसे मुसकराते देख अनन्या उखड़ गई. आवाज में तेजी ला कर बोली, ‘‘खिड़की बंद नहीं होगी. मेरा दम घुटता है बंद गाड़ी में.’’
इस के बाद ड्राइवर कुछ नहीं बोला. उस की मुसकराहट भी बुझ गई. अब वह चुपचाप गाड़ी चला रहा था.
‘‘और कितनी दूर है?’’ अनन्या ने पूछा.
ड्राइवर ने सुना नहीं या सुन कर भी चुप रह गया, ये 2 बातें थीं और दोनों का अलगअलग अर्थ था. अनन्या का दिमाग अब अधिक सक्रिय हो चला था. मान लो उस ने सुन ही लिया तो जवाब क्यों नहीं दिया? हो सकता है उस के खिड़की खोलने से गुस्से में हो या वह बताना ही न चाहता हो. न बताने के भी बहुत कारण हो सकते थे जैसे वह वहां जा ही न रहा हो जहां उसे जाना है. यह खयाल उसे परेशान करने के लिए काफी था. उसे मालूम करना होगा कि वह सही रास्ते पर है या नहीं.
अनन्या सड़क को देखते हुए कोई पहचान खोज ही रही थी कि उसे झट से याद आया. फिर अपने ऊपर क्रोध भी आया कि यह विचार उस के मन में पहले क्यों नहीं आया. उस ने मोबाइल निकाला और गूगल मैप में अपना डैस्टिनेशन डाल दिया. उफ, अभी आधे घंटे का रास्ता और बचा है.
तभी उस की नजर सामने मैप पर भागती गाड़ी पर पड़ी. यह क्या? जो रास्ता मैप दिखा रहा है यह उस से क्यों उतर रहा है. मैप में तो 10 मिनट सीधे चलने के बाद बाएं मुड़ना है.
‘‘ऐ सुनो, यह किस रास्ते से ले जा रहे हो?’’
‘‘मैडम, दूसरे रास्ते पर काम चल रहा है,’’ कहते हुए उस ने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी.
अनन्या ने मोबाइल की ओर देखा. मैप खुद को रीएडजस्ट कर रहा था, ‘‘गो स्ट्रेट फौर फाइव हंड्रेड मीटर देन टर्न राइट,’’ आवाज गूंजी तो अनन्या हड़बड़ा गई कि ड्राइवर ने सुना तो उसे मालूम हो जाएगा कि वह रास्ते से अनजान है और डरी हुई है. उस ने झट आवाज कम कर दी.
‘‘गूगल मैप चला रखा है मैडम आप ने?’’ ड्राइवर आवाज सुन चुका था.
अनन्या मोबाइल की आवाज कम कर चुपचाप बाहर देखती रही.
‘‘मैडम, इस गूगल से ज्यादा रास्ते हमें याद रहते हैं. अपना शहर है. गूगल तो फिर भी बहुत बार गलत जगह पहुंचा देता है, लेकिन मजाल है जो हम से कभी गलती हो जाए.’’
ड्राइवर बोलता जा रहा था, लेकिन अनन्या को इस बात में बिलकुल
दिलचस्पी नहीं थी. वह जल्द से जल्द होटल पहुंच जाना चाहती थी. वह कभी बाहर, कभी गूगल मैप पर तो कभी कनखियों से ड्राइवर पर नजर रखे थी.
ड्राइवर ने म्यूजिक की आवाज बढ़ा दी, ‘वक्त है कम और लंबा है सफर, तू रफ्तार बढ़ा दे, मंजिल पर हमें पहुंचा दे…’ पुराने जमाने का गीत बज रहा था.
द्विअर्थी बोल गाड़ी का सन्नाटा तोड़ रहे थे. गाने के अश्लील बोलों ने अनन्या को खिजा दिया. बरसों पहले उस ने यह फिल्म टीवी पर देखी थी. अनिल कपूर और जूही चावला बेतुके गाने पर भद्दे तरीके से थिरक रहे थे. पापा ने अचानक आ कर टीवी बंद कर दिया. वह गुस्से में थे. आज वही गुस्सा उस के चेहरे पर परछाईं बन कर तैर रहा था.
ये भी पढ़ें- मेहंदी लगी मेरे हाथ: अविनाश से शादी न होने के बाद भी उसे क्यों चाहती थी दीपा?
‘‘म्यूजिक बंद करो,’’ उस के क्रोध को शायद ड्राइवर भांप गया था. इसलिए बिना कुछ कहे गाना बंद कर दिया.
अनन्या ने खिड़की से झांका. मुख्य सड़क को गाड़ी छोड़ चुकी थी. दूसरी कारें जो वहां उसे सुरक्षा देती लग रही थीं, वे भी इस सुनसान सड़क पर मौजूद नहीं थीं. लैंप पोस्ट थे पर या तो उन के बल्ब फ्यूज थे या फिर इस इलाके में बिजली नहीं थी. दूरदूर तक अंधेरा पसरा था. वहां मौजूद घर भी अंधेरे में सिमटे थे. नाइट बल्ब की क्षीण रोशनी की आशा भी किसी मकान से नहीं झांक रही थी.
अनन्या ने सोचा अपनी लोकेशन घर वालों और दोस्तों को भेज दे. लेकिन वे लोग तो दूसरे शहर में हैं. कोई मुसीबत आन पड़ी तो वे लोग भला क्या कर सकेंगे? फिर सोचा कि भेज देती हूं. कम से कम उन्हें मालूम तो होगा कि मैं कहां हूं. फिर उस ने मोबाइल उठाया, लेकिन मोबाइल में नैटवर्क नहीं था. इस नैटवर्क को भी अभी जाना था या यहां नैटवर्क रहता ही नहीं, सोचते हुए अनन्या की घबराहट और बढ़ गई.
अब उसे सचमुच हवा की जरूरत महसूस हुई. उस ने खिड़की का कांच नीचे खिसकाना चाहा पर शायद ड्राइवर लौक लगा चुका था. कई बार बटन दबाने पर भी कांच नीचे नहीं हुआ. उस ने लौक क्यों किया होगा? उस ने ड्राइवर को देखा. ड्राइवर का एक हाथ गियर पर था और एक स्टीयरिंग संभाले था. उस के बाएं हाथ में स्टील का कड़ा था जो स्वैटशर्ट की आस्तीन से झांक रहा था. वह कोई धुन गुनगुना रहा था.
क्या ड्राइवर को कहना चाहिए कि लौक खोल दे. नहीं, अब वह ड्राइवर से कुछ नहीं कहेगी. जरूरत पड़ने पर सीधे कांच तोड़ देगी. पर किस चीज से?
उस ने कार में इधरउधर नजर घुमाई. कोई चीज दिखाई नहीं दी. सीट की जेब में हाथ डाला. उस में भी कुछ नहीं था. दूसरी सीट की जेब में हाथ डाला तो वहां कुछ था. एक छोटा बौक्स. क्या हो सकता है? क्या टूल बौक्स? सोचते हुए उस ने बौक्स बाहर निकाला. चमड़े का छोटा सा बौक्स.
उस ने ठहर कर ड्राइवर को देखने की कोशिश की. वह उसे देख तो नहीं रहा? नहीं, उस की नजरें सामने थीं. उसे जल्दी इसे खोल कर देख लेना चाहिए. क्या पता कुछ काम का मिल जाए. अत: उस ने मोबाइल की स्क्रीन की रोशनी में धीरे से बौक्स खोला तो देख कर झटका खा गई. उस की नसें झनझना उठीं. अंदर कंडोम के पैकेट थे. यह कितनी असंगत बात थी. पैसेंजर सीट के आगे कंडोम. अपना निजी सामान तो ड्राइवर आगे रखता है. कहीं किसी और सवारी का तो नहीं? हो भी सकता है और नहीं भी. वह फिर होने न होने के दोराहे पर खड़ी थी.
उस का मन हुआ अभी टैक्सी से उतर जाए, लेकिन बाहर का सन्नाटा देख कर वह सिहर उठी. कार की हैडलाइट की रोशनी छोड़ कर अब भी वहां अंधेरा था. दूर कहीं कुत्ते भूंक रहे थे.
आगे पढ़ें- अनन्या ने कुछ नहीं कहा पर अंदर से वह…
ये भी पढ़ें- मेरा पिया घर आया: रवि के मन में नीरजा ने कैसे अपने प्रेम की अलख जगा दी?