‘‘मैं भी मजबूर हूं, इहा.’’
‘‘भाड़ में जाए तुम्हारी मर्दानगी और मजबूरी,’’ बोल कर इहा ने गुस्से में फोन काट दिया.
फिर उस ने मम्मी से कहा, ‘‘मम्मी, मैं किसी तरह से मैडिकल इमरजैंसी के तहत अबौर्शन की कोशिश करती हूं.’’
उस की मम्मी ने कहा, ‘‘बेटा, हमारा समाज अबौर्शन की इजाजत नहीं देता है. यह अपराध है, मैं ऐसा नहीं करने दूंगी.’’
‘‘तब क्या करें? मु झे हैदराबाद के अस्पताल से जौब औफर भी मिला है. मु झे 6 महीने बाद नौकरी जौइन करनी है.’’
‘‘तुम उन से और 3-4 महीने की मोहलत ले लो. तुम कोवलम के निकट अपनी बड़ी मौसी के पास चली जाओगी. वे भी रिटायर्ड नर्स हैं. वे जैसा कहें करना.’’
इहा कोवलम चली गई. उस की मौसी ने भी उसे अबौर्शन की अनुमति नहीं दी. उस ने इहा की मां से बात कर उसे कोवलम में रोक लिया. उन्होंने इहा से कहा, ‘‘तुम घबराओ मत. बस, तुम्हें जौइनिंग की एक्सटैंशन मिल जाए, उस के बाद धीरेधीरे सब ठीक हो जाएगा.’’
2 सप्ताह बाद इहा को जौइनिंग की एक्सटैंशन मिल गई. अब 6 महीने के बजाय उसे 9 महीने बाद जौइन करना था. दरअसल, उसे 6 महीने की ट्रेनिंग लेनी थी तो अस्पताल ने उसे अगले बैच के लोगों के साथ ट्रेनिंग लेने की अनुमति दी. उस ने मौसी को जब यह खबर दी तो उन्होंने कहा, ‘‘तू बच्चे को जन्म देगी और मैं उसे पालने में तेरी पूरी मदद करूंगी.’’
‘‘और जमाना उसे नाजायज बच्चा कह कर सारी उम्र ताने मारेगा.’’
‘‘हो सकता है तेरे बच्चे को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े.’’
‘‘वह कैसे संभव है?’’
‘‘वक्त के साथ सब ठीक हो जाएगा. बस, तू हिम्मत न हार. मेरे जेठ का बेटा जेम्स दुबई में नौकरी कर रहा है. एक पैथोलौजिकल लैब में अच्छी पोस्ट पर है. शादी के 6 महीने के अंदर ही उस की पत्नी की वहीं कार ऐक्सिडैंट में मौत हो गई थी. हम लोग उस के लिए एक लड़की ढूंढ़ रहे हैं?’’ मौसी बोलीं.
‘‘और वह मेरे बेटे को स्वीकार करेगा? मु झे अब मर्दों पर भरोसा नहीं है,’’ इहा ने कहा.
‘‘सभी मर्द एक से नहीं होते हैं और सुन, तू जहां तक सोचती है तेरी मौसी उस से चार कदम आगे की सोचती है. मैं ने उस से तेरी चर्चा कर रखी है. उसे तेरे बारे में सब बता भी दिया है.’’
‘‘और वह मु झे बच्चे के साथ स्वीकार करेगा? मु झे तो शक है.’’
‘‘वह हंस कर स्वीकार करेगा, इतनी अच्छी लड़की उसे कहां मिलने वाली है. वह भी तो विधुर है, उस का भी एक वीक पौइंट है.’’
इहा के प्रसव का समय नजदीक आ रहा था. इसी बीच एक बार धरम इहा की मम्मी से मिलने गया और बोला, ‘‘आंटी, इहा कैसी है और आजकल कहां है?’’
‘‘तुम ने शादी कर ली न, अब उसे भूल जाओ. उस की शादी हो गई है और वह खुश है. तुम तो बुजदिल निकले. जीवनसाथी की सही पहचान तभी होती है जब वह जीवन की अग्निपरीक्षा से गुजरता है.’’
‘‘सौरी आंटी, मैं ने कभी भी इहा को धोखा नहीं देना चाहा है. वैसे मैं ने अभी तक शादी नहीं की है. खैर, खुशी की बात है कि उस की शादी हो गई है, वह जहां रहे, खुश रहे. वैसे उस का बच्चा?’’
‘‘उसे मैडिकल इमरजैंसी हुई और अबौर्शन कराना पड़ा था.’’
‘‘ओह, सौरी. मेरे कारण उसे बहुत दुख हुआ.’’
धरम चला गया. इहा की मम्मी ने उस से दो झूठ बोले. इहा की शादी के बारे में और अबौर्शन के बारे. उन्होंने एक तीसरा झूठ इहा के पापा से कहा था इहा और जेम्स के बारे में. जेम्स इंडिया आया था तब दोनों में प्यार हो गया था और दोनों की सगाई भी हो गई है. इस बात के लिए उन्होंने अपनी बड़ी बहन इहा की मौसी को भी विश्वास में ले लिया था. इस बात से आश्वत हो कर दोनों से एक भूल हो गई. इसलिए उन दोनों की शादी जल्द करनी है और आजकल जेम्स भी इंडिया आया हुआ है.
इहा के पापा ने कहा, ‘‘मेरा पासपोर्ट तो कंपनी के पास जमा है और 2 महीनों से मु झे पगार नहीं मिली है. कंपनी बोल रही है कि अब तो जल्द ही मेरा कौंट्रैक्ट खत्म होने वाला है. एक ही साथ फाइनल कर देंगे. तुम लोग इहा और जेम्स की शादी करा दो. मेरा प्यार कहना.’’
इहा की मां और मौसी दोनों ने मिल कर झूठ का सहारा तो लिया था, पर यह सिर्फ इसलिए कि इहा अपने जीवन में आए भूचाल का सामना कर सके. और इस झूठ से किसी का बुरा भी नहीं हो रहा था.
इहा ने एक बच्चे को जन्म दिया. जेम्स भी दुबई से आया था. उस ने बेटे का नाम डैनी रखा. इहा, उस की मम्मी, मौसी और जेम्स सभी खुश थे. 2 महीने बाद इहा के पापा भी कुवैत से लौट आए. पूरा परिवार जश्न मना रहा था.
इहा की ट्रेनिंग शुरू होने वाली थी. अब उस के सामने समस्या थी डैनी की परवरिश की. डैनी इतना छोटा था कि उसे मां की जरूरत थी. उसी समय इहा को खबर मिली कि ट्रेनिंग के लिए उसे त्रिवेंद्रम के ही एक अस्पताल में रिपोर्ट करना है. इस खबर से सभी को राहत मिली. कोवलम त्रिवेंद्रम के निकट ही है, इहा को कोई परेशानी नहीं होगी और उस की ट्रेनिंग खत्म होतेहोते डैनी भी कुछ बड़ा हो जाएगा. फिर तो मौसी और मां मिल कर उस की देखभाल कर लेंगी.
इधर धरम को चेन्नई में दवा बनाने वाली कंपनी में नौकरी मिली. उस की मां ठीक हो चली थी, अब वे वौकर के सहारे आराम से चल लेती थीं. डाक्टर ने कहा कि अपनी थेरैपी जारी रखें तो एक महीने के अंदर ही वे स्वयं अपने पैरों पर चल सकेंगी. जब से धरम इहा के घर से लौटा था उस की मां उसे जल्द ही शादी करने पर जोर दे रही थीं. उन्होंने एक लड़की भी देख रखी थी. लड़की सुंदर भी थी और अपनी बिरादरी की थी. उन्हें तो इहा की शादी के बारे में सुन कर बहुत संतोष हुआ क्योंकि धरम उस के लिए उदास रहने लगा था. एक दिन वे बोलीं, ‘‘बेटे, अब तो उस लड़की की शादी भी हो गई है, वह अपने परिवार में खुश है. अब तुम्हें उस को ले कर चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं है और अब अपनी गृहस्थी बसाने की सोच. मु झे भी तो दादी बनने का शौक है. आखिर शादी तो करनी है तु झे एक न एक दिन.’’
कुछ माह बाद धरम की शादी अपनी जाति की एक लड़की सुधा से हुई. वह अपनी पत्नी और मां के साथ चेन्नई में रहने लगा था. सुधा उस समय एमए कर रही थी. दोनों ने मिल कर फैसला लिया कि जब तक सुधा की पढ़ाई समाप्त नहीं होती वह मां नहीं बनेगी. 2 साल के बाद सुधा ने एमए किया. फिर उस ने बीएड करना चाहा तो धरम ने कोई एतराज नहीं किया. पर उस की मां बोलीं, ‘‘जिंदगीभर पढ़ती ही रहेगी तो मैं दादी कब बनूंगी?’’
‘‘मां, घबराओ नहीं, उस के लिए अभी बहुत समय है.’’
सुधा बीएड करने के बाद एक स्कूल में टीचर बनी. कुछ समय बाद जब दोनों बच्चे के लिए तैयार हुए तो सुधा का लगातार 2 बार मिसकैरिज हुआ और वह मां न बन सकी. इस बीच 2 साल और बीत गए.
एक दिन सुधा और धरम दोनों डाक्टर से मिलने गए तो डाक्टर ने कहा, ‘‘आप दोनों के कुछ टैस्ट करने होंगे.’’
‘‘मेरे टैस्ट की कोई जरूरत नहीं है. सुधा के लिए जो भी टैस्ट्स जरूरी हों, आप करा लें,’’ धरम ने कहा.
‘‘खराबी दोनों में से किसी को भी हो सकती है या फिर दोनों को भी. आप इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकते हैं?’’ डाक्टर बोला.
‘‘आप पहले सुधा के सभी टैस्ट्स कर लें. बाद में जरूरी हुआ तो मैं भी करा लूंगा.’’
सुधा ने कहा, ‘‘एक साथ दोनों के टैस्ट्स हो जाएं तो बेहतर है. कहीं आप के टैस्ट्स की जरूरत हुई और तब बेवजह हम समय बरबाद कर देंगे.’’
‘‘मैं ने कहा न. जरूरत पड़ने पर मैं बाद में करा लूंगा.’’
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