Sad Love Story: अभिनव के घर से जाते ही अनन्या चुपचाप बैड पर लेट गई. 1 सप्ताह के लिए औफिस के काम से लखनऊ जा रहा था अभिनव पर जाते हुए रोज की तरह बस वही रूखा सा बाय. कितनी याद आई थी उसे अभिनव की जब वह पिछले माह गोवा गया था. अनन्या उस का बेसब्री से इंतजार करते हुए उस के दिल में जगह बनाने के तरीके ढूंढ़ती रहती थी. तभी तो इंटरनैट पर वीडियो देख कर खाने की कुछ चीजें बनानी भी सीख ली थीं.
जिस दिन अभिनव लौटा उस दिन मेड से खाना न बनवा कर अपने हाथों से कोफ्ते और लच्छेदार परांठे बनाए. अभिनव ने खाना खाने के बाद हलके से मुसकरा कर जब थैंक्स बोला तो अनन्या गद्गद हो गई.
इस बार उसे पूरी उम्मीद थी कि अभिनव खूब हिदायतें दे कर जाएगा. जैसेकि इस बार ज्यादा याद मत करना… अपने लिए बढि़या खाना बनवा कर खा लिया करना… रात में देर तक जागती मत रहना वगैरहवगैरह. मगर अभिनव तो हमेशा की तरह सिर्फ बाय बोल टैक्सी में जा बैठा और फिर मुड़ कर भी नहीं देखा. ये सब सोचते हुए अनन्या को नींद आ गई. उस की नींद मोबाइल की रिंग बजने से टूटी.
‘‘अभीअभी लैंड हुई है फ्लाइट,’’ अभिनव का फोन था.
‘‘ओके… अभी तो कुछ देर लगेगी न एअरपोर्ट से बाहर निकलने में? फिर औफिस के गैस्टहाउस तक पहुंचने में 1 घंटा और लगेगा… आप ने औफिस में इन्फौर्म कर के गाड़ी तो मंगवा ली थी न? रात को टैक्सी से जाना रिस्की होता है… ध्यान रखना अपना,’’ अनन्या हमेश की तरह अभिनव को ले कर चिंतित हुई जा रही थी. वह दूर गए अभिनव से बातचीत का कोई न कोई बहाना तलाशती रहती थी.
‘‘हां ठीक है,’’ कह अभिनव ने फोन
काट दिया.
अनन्या की रुलाई फूट पड़ी. वह सोचने लगी कि अभिनव थोड़ी देर और बात कर सकता था… अभी उन की शादी को 6 महीने ही तो हुए हैं. पर अभिनव तो लगता है मुझ से बोर हो गया… दिव्या की शादी भी तो हमारी शादी के साथसाथ ही हुई थी. वे तो जैसे अभी तक हनीमून पीरियड पर हैं. उस दिन बाजार में कैसे अपने मियांजी के हाथ में हाथ डाले घूम रही थी… और एक मैं हूं कि अभिनव को खुश करने में लगी रहती हूं दिनरात. मगर वह चुपचाप अपनी धुन में मग्न घर पर भी लैपटौप लिए औफिस के काम में व्यस्त रहता.
अंधेरा घिरते ही अनन्या को उदासी ने पूरी तरह घेर लिया. उस ने अपना ध्यान दूसरी ओर करने के उद्देश्य से व्हाट्सऐप पर जा कर पुराने दोस्तों के गु्रप की चैट खोली.
‘अरे वाह, कल सब ने इंडिया गेट पर मिलने का कार्यक्रम बनाया है… कितने दिन बाद सब इकट्ठे होंगे… मस्ती से बीतेगा कल का दिन,’ अनन्या यह सोच कर खुशी से उछल पड़ी.
‘‘मैं भी आऊंगी,’’ लिख कर वह अगले दिन पहनने के लिए वार्डरोब से कपड़े निकालने चल दी. मैचिंग ऐक्सैसरीज भी निकाल कर ड्रैसिंगटेबल पर रख वह खुशीखुशी सो गई.
सुबह कामवाली से जल्दीजल्दी काम करवा कर प्रफुल्लित हो तैयार होने लगी. ग्रे पैंट के साथ गुलाबी रंग का क्रौप टौप और रूबी का चोकर पहन जब वह लिपस्टिक लगाने लगी तो आईने में दपदप करते अपने रूप पर खुद ही फिदा हो गई. मुसकराते हुए हाथ में मैचिंग पर्स लिए इंडिया गेट रवाना हो गई.
वहां पहुंची तो संजना, मनीष, निवेदिता, सारांश और कार्तिक पहले से ही पहुंचे हुए थे.
‘‘हाय ब्यूटीफुल,’’ मनीष हमेशा की तरह उसे देख कर हाथ हिलाते हुए बोला.
‘‘वाह, कौन कहेगा कि तुम मैरिड हो,’’ सारांश उसे ऊपर से नीचे तक निहारते हुए बोला.
तभी किसी ने पीछे से आ कर अपने हाथों से अनन्या की आंखें बंद कर दीं.
‘‘साक्षी… पहचान लिया मैं ने,’’ साक्षी के हाथों को अपनी आंखों से हटाती हुई अनन्या खुशी से चहक उठी.
साक्षी आंखें फाड़ अनन्या को देखे जा रही थी, ‘‘अरे यार, मैं ने तो शादी के 2 महीने बाद ही वेट पुट औन कर लिया… तू कैसे अब तक…?’’
संजना भी पीछे नहीं रही. अनन्या की तारीफ में बोली, ‘‘यह तो कालेज में भी बिजलियां गिराती थी… पता है सारे होस्टल में चर्चा होती थी उत्तराखंड से आई इस लड़की की… हम सब तो इसे डौल बुलाते थे… मेरी प्यारी सी…’’
‘‘कुछ भी कह कर पुकारो तुम सब इसे पर मैं तो चुनचुन ही कहता था और वही कहूंगा…’’ संजना की बात पूरी होने से पहले ही नमन आ गया और हमेशा की तरह अनन्या पर दुलार बरसाने लगा.
‘‘चुनचुन… हां यार कहता तो था तू पर यह चुनचुन नाम क्यों रख दिया था तूने इस डौल का?’’ संजना उत्सुकता से मुसकराती हुई बोली.
‘‘अरे वह गाना है न प्यारा सा ‘चुनचुन करती आई चिडि़या…’ और यह थी न छुटकी सी चुनचुन करती चिडि़या,’’ नमन अनन्या का गाल खींचते हुए बोला.
‘‘हा…हा… हर बात पर गाना सुनाने का तुम्हारा अंदाज याद है मुझे अभी तक… पर यह आज ही पता लगा कि चुनचुन नाम भी गाने से चुराया था तुम ने…’’ हंसते हुए अनन्या ने नमन की ओर देख कर कहा. फिर अचानक उसे
स्वाति की याद आ गई जो अनन्या के इस नाम से जल कर खूब मजाक उड़ाती थी. दोस्तों को अनन्या के पीछेपीछे घूमते देख कर भी वह जलभुन जाती थी.
‘‘स्वाति अब तक नहीं आई… कल गु्रप
में तो लिखा था कि जरूर आएगी आज,’’
अनन्या बोली.
‘‘अरे, लो आ गई वह… साथ में शायद पतिदेव हैं,’’ दूर से आती स्वाति को देख
मनीष बोला.
स्वाति ने आ कर सब को ‘हाय’ किया. इस से पहले कि वह सब से अपने
पति की जानपहचान करवाती, स्वाति की ओर इशारा कर वह खुद ही बोल उठा, ‘‘बिना मैम के हमारा मन ही नहीं लगता, इसलिए इन का पल्लू पकड़ कर पीछेपीछे आ गया.’’
स्वाति के पति को इस तरह मजाक करते और स्वाति के साथ दोस्तों के बीच आया देख कर अनन्या को ईर्ष्या हो रही थी.
सभी दोस्त एकदूसरे के साथ मौजमस्ती करते हुए अभी भी कालेज के स्टूडैंट्स ही लग रहे थे. इसी तरह हंसतेखेलते, खातेपीते पूरा दिन बीत गया. अंधेरा हुआ तो फिर से मिलने का वादा कर सब ने एकदूसरे से विदा ले ली.
अनन्या को घर लौटते रात हो गई. चाय बना कर 2 बिस्कुट खा वह व्हाट्सऐप खोल कर बैठ गई. गु्रप में सभी अपनीअपनी खींची तसवीरें एकदूसरे से शेयर कर रहे थे. नमन ने गु्रप में तसवीरें डालने के साथ ही अनन्या के नंबर पर उसे उस का ही एक फोटो भेजा और नीचे उस ने हिंदी फिल्म के एक गाने की लाइन लिखी, ‘‘लड़की ब्यूटीफुल कर गई चुल…’’
अनन्या के चेहरे पर मुसकान फैल गई. हिंदी फिल्मों और गानों के शौकीन नमन की बातबात पर फिल्मी डायलौग और गीतों की पंक्तियां कह देने की आदत से तो वह परिचित थी.
नमन हमेशा उस की तारीफ भी करता था. मगर आज उस के शरारती अंदाज में अनन्या को इस तरह खूबसूरत कहना उस पर असर छोड़ गया. उस ने अभिनव के मुंह से कभी खुल कर अपनी प्रशंसा नहीं सुनी थी.
रिप्लाई में उस ने जब नमन को थैंक्स लिखा तो उस का जवाब आया, ‘‘दोस्ती का उसूल है मैडम कि नो सौरी नो थैंक यू…‘मैं ने प्यार किया’ फिल्म में अपने सलमान भाई का कहना तो कुछ ऐसा ही है,’’ ये पंक्तियां लिखने के बाद नमन ने चुंबन की इमोजी भी सैंड कर दी.
‘‘हा… हा… दोस्ती तो ठीक है पर यह किस किसे भेजा है?’’
‘‘तुम्हें ही यार… जब दोस्त तुम सी प्यारी हो तो प्यार आ ही जाता है उस पर.’’
बात को वहीं समाप्त करने के उद्देश्य से अनन्या ने लिखा, ‘‘चलो, और पिक्स भेजो… तुम तो गु्रप के सब से अच्छे फोटोग्राफर हो… आज तुम ने भी खूब फोटो खींचे थे.’’
नमन ने ढेर सारे फोटो भेज दिए, पर वे सभी अनन्या के थे. अनन्या के दिल को ये सब अच्छा लग रहा था, पर दिमाग बारबार याद दिला रहा था कि एक शादीशुदा स्त्री को खुल कर पुरुष मित्र से पेश नहीं आना चाहिए.
मुसकराती स्माइली के साथ अनन्या ने लिखा, ‘‘अरे वाह, मेरी इतनी सारी पिक्स? जनाब, क्यों टाइम वेस्ट कर रहे हो अपना? अब ऐसा करो कि शादी कर लो तुम… फिर तुम्हारी वह दिनरात गाना गाएगी, ‘तू खींच मेरा फोटो पिया…’ और फिर लेना उस की खूब सारी पिक्स.’’
नमन का जवाब आया, ‘‘है
कोई तुम्हारे जैसी तो बता दो… कर लेता हूं शादी… ‘जग घूमेया थारे जैसा न कोई…’’’
अनन्या को नमन के शब्द ऐसे लगे जैसे मन के तपते रेगिस्तान में न जाने कहां से पानी की धारा फूट पड़ी हो. अभिनव के रूखे व्यवहार और चुप्पी साधे रखने से क्षुब्ध अनन्या को नमन की बातें अपनी ओर खींच रही थीं. वह अपने मन को वश में किए थी पर वह तो जैसे उस के हाथों से छूटा जा रहा था.
रात देर तक अनन्या नमन के साथ चैटिंग करती रही. वह कोई भी बात शुरू करती तो नमन घुमाफिरा कर उस की सुंदरता पर ले आता. एकदूसरे को ‘गुड नाइट’ भेजने के बाद जब अनन्या सोने के लिए बैड पर लेटी तो नमन के रंग में रंग कर ‘भागे रे मन कहीं…’ गाना गुनगुनाते हुए मुसकरा दी.
अगले 2-3 दिन भी नमन और अनन्या ने खूब चैटिंग की. कालेज के दिनों को याद करते हुए नमन ने उसे बताया कि एक बार उस के बचपन का एक दोस्त कालेज में उसे मिलने आया था. तब नमन ने अनन्या को अपनी गर्लफ्रैंड बता दिया था.
अनन्या ने यह पढ़ कर आंखों से आंसू बहाते हुए हंसने वाली 3 इमोजी भेजीं.
‘‘क्या यार… हंस क्यों रही हो…? मैं तो चाहता हूं कि सच में ही तुम बन जाओ मेरी गर्लफ्रैंड… लाइफ बन जाएगी अपुन की.’’
‘‘अरे…अरे… क्या कह रहे हो? एक मैरिड को प्रोपोज कर रहे हो?’’
‘‘मैं कब कह रहा हूं कि तुम अपने पति से रिश्ता तोड़ कर मुझे गाना सुनाओ कि ‘मेरे सैयांजी से आज मैं ने बे्रकअप कर लिया…’ गर्लफ्रैंड बनने को ही तो कह रहा हूं.’’
‘‘कालेज समय में यह रिक्वैस्ट क्यों नहीं की तुम ने?’’
‘‘बस… बस… कल 1 महीने की ट्रेनिंग पर अहमदाबाद जा रहा हूं… लौट कर आते ही तुम्हें लंच पर ले कर जाऊंगा. और हां मैं रिक्वैस्ट नहीं करता. एक ही बार बोलता हूं और वह फुल ऐंड फाइनल हो जाता है.’’
‘‘वाह क्या बात है… ‘तेरे नाम’ फिल्म के सलमान खान… फुल ऐंड फाइनल है लंच तो और बाकी बातें वहीं करेंगे,’’ अनन्या ने लिखा और फिर दोनों ने कुछ दिनों के लिए एकदूसरे को बाय कर दिया.
नमन के जाने के बाद अनन्या अकेलापन सा महसूस कर रही थी. फेसबुक पर दोस्तों के स्टेटस और तसवीरों को देखते और उन पर कमैंट्स करते 2 दिन किसी तरह बीत ही गए और अभिनव के लौटने का दिन आ गया.
अभिनव ने आते ही जो खबर सुनाई उसे सुन कर अनन्या खुश होने के साथ ही मायूस भी हो गई. मीटिंग के दौरान ही अभिनव के काम से प्रभावित हो कर उसे प्रमोशन दे दी गई थी. अभिनव ने बताया कि उन्हें 15 दिनों के अंदर ही दिल्ली से हैदराबाद शिफ्ट होना पड़ेगा.
नमन की दोस्ती के रोमांच में रोमांचित अनन्या निराश थी, पर कोई चारा नहीं था उस के पास. अगले ही दिन से वह जाने की तैयारी में जुट गई.
हैदराबाद पहुंच कर अभिनव नई जिम्मेदारियां संभालते हुए बेहद व्यस्त हो गया. अनन्या सुबह से शाम तक नए मकान की सैटिंग करते हुए थक जाती. कामवाली रोजमर्रा का काम तो निबटा देती थी, पर अन्य कामों में अनन्या उस की मदद नहीं ले पा रही थी. अनन्या तेलुगु नहीं जानती थी और वह हिंदी ठीक से नहीं समझ पाती थी. अत: अनन्या के लिए बताना संभव नहीं हो पा रहा था कि वह किस काम में बाई की मदद चाहती है.
कुछ दिनों बाद अनन्या को कमजोरी महसूस होने के साथसाथ नींद भी बहुत आने लगी. दोपहर में जब वह कोई पत्रिका ले कर पढ़ने बैठती तो नींद के झोंके कुछ पढ़ने ही नहीं देते. सुबह भी उसे उठने में देरी हो रही थी. उस का मौर्निंग वाक भी छूट गया था. खुद को काम में लगाए हुए वह नींद और सुस्ती से दूर रहने का भरसक प्रयास करती, पर ऐसा हो नहीं पा रहा था. अपने में हो रहे इस परिवर्तन को ले कर वह बेहद परेशान थी. बस कभीकभी जब नमन से चैटिंग होती तभी वह कुछ पलों के लिए प्रसन्न होती थी.
उन लोगों को हैदराबाद आए
3 महीने हो चुके थे. उस दिन दोनों को पड़ोस में एक बच्चे के जन्मदिन की पार्टी में शामिल होना था. अनन्या ने पहनने के लिए ड्रैस निकाली, पर यह क्या. वह ड्रैस तो अनन्या को बहुत टाइट आ रही थी. उस ने सोचा ड्रैस धोने से सिकुड़ गई होगी, इसलिए 3-4 और ड्रैस निकाल कर पहनने की कोशिश की, पर कोई भी ड्रैस ठीक से नहीं पहनी जा रही थी. इन दिनों घर के काम में व्यस्त होने के कारण वह ढीली कुरती और गाउन ही पहन रही थी. अत: उसे पता ही नहीं लग पाया कि उस का वजन बढ़ रहा है.
अब अनन्या ने सुबहसुबह फिर से टहलना शुरू कर दिया और साथ ही व्यायाम करना भी. मगर वजन नियंत्रण में नहीं आ रहा था. थकान हो रही थी सो अलग. चेहरा भी निस्तेज पड़ गया था. जब उसे पैरों में सूजन दिखाई देने लगी तो अभिनव के साथ डाक्टर के पास गई.
डाक्टर ने उसे ब्लड टैस्ट करवाने को कहा. रिपोर्ट आने पर पता लगा
कि अनन्या को हाइपोथायराइडिज्म हो गया है. गले में पाई जाने वाली थायराइड नामक ग्लैंड जब अधिक सक्रिय नहीं रह पाती तो यह बीमारी हो जाती है, जिस कारण शरीर को आवश्यक हारमोंस नहीं मिल पाते.
डाक्टर ने रोज खाने के लिए दवा लिख दी और कुछ समय बाद फिर टैस्ट करवाने को कहा ताकि दवा की सही मात्रा निर्धारित की जा सके. साथ ही उसे यह भी बता दिया कि एक बार यह ग्रंथि निष्क्रिय हो जाती है, तो दोबारा सक्रिय होना लगभग असंभव है. लेकिन अभी घबराने वाली बात नहीं है.
कुछ दिनों बाद अभिनव को एक कौन्फ्रैंस के सिलसिले में दिल्ली जाना था. अनन्या ने भी साथ चलने की इच्छा जताई. अपने दोस्तों खासकर नमन से मिलने का यह अच्छा मौका था. नमन उस से अकसर शिकायत करता था कि वह उस के ट्रेनिंग से लौटने से पहले ही हैदराबाद आ गई. उन का मिलना नहीं हो पाया.
दिल्ली पहुंच कर वे एक होटल में ठहरे. वहां पहुंचने के अगले दिन ही अनन्या ने अपने दोस्तों को लंच पर बुलाने का कार्यक्रम रखा. जिस होटल में वह ठहरी हुई थी, उस का पता सब को बता कर उस ने वहां के डाइनिंग हौल में ही टेबल्स बुक करवा दीं. अपनी मनपसंद ड्रैस पहन अनन्या बेसब्री से दोस्तों का इंतजार करने लगी.
मनीष ने सब से पहले आ कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. अनन्या उसे देखते ही खिल उठी. पर मनीष ने उसे देख मुंह बना कर आंखें सिकोड़ते हुए कहा, ‘‘अरे, यह क्या? तू… तू इतनी मोटी? क्या कर लिया?’’
इस से पहले कि अनन्या कोई जवाब देती, नमन भी आ पहुंचा. फिर 1-1 कर के सब आ गए.
‘‘मैं अनन्या से मिल रहा हूं या किसी बहनजी से… कैसी थुलथुल हो गई इतने दिनों में… आलसियों की तरह पड़ी रह कर खूब खाती है क्या सारा दिन?’’ नमन हंसते हुए बोला.
अनन्या रोंआसी हो गई, ‘‘अरे, नहीं. न मैं आलसी हूं और न ही कोई डाइटवाइट बढ़ी है मेरी… हाइपोथायरायडिज्म की प्रौब्लम हो गई है… बताया तो था नमन तुम्हें कुछ दिन पहले.’’
‘‘यह मेरी भाभी को भी है, पर तू तो कुछ ज्यादा ही…’’ अपने गालों को फुला कर दोनों हाथों से मोटापे का इशारा करती हुई स्वाति ठहाका लगा कर हंस पड़ी.
सब की बातों से उदास अनन्या ने वेटर को खाना लगाने को कहा. खाना खाते हुए भी दोस्त ‘मोटी और कितना खाएगी’ जैसी बातें करते हुए उस का मजाक उड़ाने से बाज नहीं आ रहे थे. नमन भी उन का साथ देते हुए ‘बसबस… बहुत खा लिया’ कह कर बारबार उस की प्लेट उस के सामने से हटा रहा था. खाना खाने के बाद अनन्या बाहर तक छोड़ने आई.
‘‘ओके… बाय चुनचुन… नहीं टुनटुन…’’ नमन के कहते ही सब जाते हुए खूब हंसे, पर अनन्या का मन छलनी हुआ जा रहा था. उदास मन से वह अपने कमरे में आ कर बैठ गई.
घर पहुंच कर नमन ने उसे कोई मैसेज
नहीं किया और न ही उस के किसी मैसेज का जवाब दिया.
अगले दिन दोपहर में जब अनन्या ने उसे फोन किया तो ‘बहुत बिजी हूं आजकल… टाइम मिलेगा तो खुद कर लूंगा कौल,’ कह कर उस ने फोन काट दिया.
अनन्या रोज प्रतीक्षा करती, लेकिन न फोन और न ही मैसेज आया नमन का और फिर वापस जाने का दिन भी करीब आ गया.
अनन्या ने लौटने से 1 दिन पहले नमन को शिकायत भरा मैसेज भेजा.
कुछ देर बाद नमन का जवाब भी आ गया, ‘इतना गुस्सा क्यों दिखा रही हो? तुम्हारा मैसेज देख कर तो ‘जवानीदीवानी’ फिल्म का गाना याद आ रहा है- ‘खल गई, तुझे खल गई, मेरी बेपरवाही खल गई… मुहतरमा तू किस खेत की मूली है जरा बता?’ और इसे मजाक का रूप देने के लिए जीभ निकाल कर एक आंख बंद किए चेहरे वाली इमोजी जोड़ दी साथ में.
जवाब देख कर अनन्या को बहुत गुस्सा आया कि कहां तो नमन मेरे दिल्ली पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था और अब बात करना तो दूर… किस तरह मुझे बेइज्जत कर
रहा है. मैं तो वही हूं न जो पहले थी… क्या
बाहर की खूबसूरती नमन के लिए इतनी अहमियत रखती है कि उस के लिए अनन्या मतलब गोरे रंग की 5 फुट 1 इंच की स्लिम सी लड़की थी बस… वह लुक नहीं रहा तो अनन्या, अनन्या नहीं…
रात को सोने के लिए जब वह बैड पर लेटी तो अभिनव के करीब जा कर उस के सीने में अपना मुंह छिपाए चुपचाप लेट गई.
‘‘क्या हुआ? तबीयत तो ठीक है? कल वापस जा रहे हैं, इसलिए उदास हो शायद?’’ अभिनव उस की पीठ पर हाथ रख कर बोला.
अनन्या कुछ देर यों ही रहने के बाद अभिनव की ओर देखते हुए बोली, ‘‘एक बात पूछूं अभिनव? क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता कि मैं इतनी मोटी हो गई हूं? फेस भी सूजा सा, कुछ बदलाबदला सा लग रहा है… तुम ने तो एक स्लिमट्रिम, गोरी लड़की से शादी की थी, पर वह क्या से क्या हो गई.’’
‘‘हा… हा…’’ पहले तो अभिनव ने एक जोरदार ठहाका लगाया. फिर मुसकरा कर अनन्या की ओर देखते हुए बोला, ‘‘उफ, अनन्या कैसा सवाल है यह? यह सच है कि तुम्हें एक बीमारी हो गई है और उस में वेट कंट्रोल करना मुश्किल होता है… पर यह बताओ कि क्या हम हमेशा वैसे ही दिखते रहेंगे जैसे शादी के वक्त थे? मेरे बाल अकसर झड़ते रहते हैं. अगर मैं गंजा हो जाऊंगा या फिर बुढ़ापे में जब मेरे दांत टूट जाएंगे तो मैं तुम्हें खराब लगने लगूंगा?’’
‘‘तुम मुझे प्यार तो करते हो न?’’ अनन्या के चेहरे पर निराशा अभी भी झलक रही थी.
अभिनव एक बार फिर खिलखिला कर हंस पड़ा, ‘‘अनन्या सुनो, तुम इतनी समझदार हो कि मैं कब तुम से पूरी तरह जुड़ गया मैं समझ ही नहीं पाया. तुम मेरी केयर तो करती ही हो, मुझ से हर बात शेयर करती हो, बिना वजह कभी झगड़ा नहीं करती… मैं औफिस के काम में इतना बिजी रहता हूं फिर भी झेलती हो मुझे. तुम सच में अपने नाम की तरह ही सब से बिलकुल अलग, बहुत खास हो.
‘‘पर इस से पहले तो आप ने कभी ऐसा कुछ नहीं कहा?’’ अभिनव की प्रेममयी बातें सुन भावविभोर हो अनन्या बोली.
‘‘मैं हूं ही ऐसा… बोलना कम और सुनना बहुत कुछ चाहता हूं… अनन्या यकीन करो, मुझे बिलकुल तुम जैसी लाइफपार्टनर की जरूरत थी.’’
अनन्या मंत्रमुग्ध हुए जा रही थी.
‘‘एक बात और कहूंगा… अपने शरीर का ध्यान रखना हम सब के लिए जरूरी
है पर तन की सुंदरता कभी मन की सुंदरता पर हावी नहीं होनी चाहिए… तुम जब भी मेरे इस मन में झांक कर अपनी सूरत देखोगी, तुम्हें अपनी वही सूरत दिखाई देगी जो कल थी, आज भी वही और आने वाले कल भी…’’
‘ओह, अभिनव… और कुछ नहीं चाहिए अब… कोई मुझे कुछ भी कहता रहे परवाह नहीं… बस तुम्हारे दिल के आईने में मेरा अक्स यों ही चमकता रहे,’ सोचती हुई अनन्या नम आंखों को मूंद कर अभिनव से लिपट गई. अभिनव के प्रेम की लौ में पिघल कर वह बहुत हलका महसूस कर रही थी.