लेखक- अरुण गौड़
रोहन ने एक नशे में यह सब कह तो दिया लेकिन नैना का गुस्से से भरा रिऐक्शन देख कर उस का सारा नशा उड़ गया. अब उसे लगा कि नैना को पाने के चक्कर में उस की दोस्ती भी खत्म हो गई, और हो सकता है कि वे मम्मी को यह सब बोल दें. क्या बेवकूफी कर दी उस ने. उस ने एकदो बार सोचा कि वह कौल कर के नैना से माफी मांग ले, लेकिन इस सब के बाद उस की हिम्मत न हुई कि वह कौल करे. उस का मन बहुत परेशान था. परेशानी में वह इधरउधर करवट बदलता रहा. पर पूरी रात उसे नींद न आई. वह रातभर अपनी इस बेवकूफी पर खुद पर गुस्सा करता रहा.
अगले दिन वह घर पर ही था. रात की घटना को ले कर उस का मन परेशान था. वह उदास सा अपने कमरे में पड़ा था. तभी उसे घर में किसी के आने की आवाज सुनाई दी. उस ने ध्यान से देखा, ये तो नैना हैं. ओह्ह गौड, ये रात वाली बात मम्मी को बोलने आई होंगी. इन के फोन में मेरे मैसेज भी होंगे. अब क्या होगा… सोच कर रोहन घबराने लगा.
खुद को कैसे भी कर के बचाने के इरादे से वह बाहर आया. नैना ने उसे देखा. लेकिन रोहन की हिम्मत न हुई कि वह उस से नजर मिला सके. उस ने नजरें चुरा लीं.
“अरे रोहन, नैना आंटी आई हैं, तुम ने हैलो भी नहीं बोला उन्हें,” रोहन की मम्मी ने कहा.
आंटी, ओह मेरी मम्मा, मेरे लिए ये आंटी नहीं हैं, रोहन ने मन में यह सोचा लेकिन कुछ कहा नहीं. बस, नजरें नीचे किए हुए ही बोला, “हैलो.”
“हैलो रोहन, कैसे हो,” नैना ने चेहरे पर गंभीरता ओढ़े हुए कहा.
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“जी, ठीक हूं,” रोहन ने कहा और उस ने डरी सी आंखों से नैना को उस के मोबाइल की तरफ इशारा किया और अपने रूम में चला गया. रूम में जाते ही रोहन ने मैसेज टाइप किया, “सौरी नैनाजी, मुझ से गलती हो गई. प्लीज, मम्मी से मत कहना. आज के बाद ऐसा कभी नहीं होगा. आप ने मुझे अपना दोस्त कहा था, प्लीज एक बार मुझे दोस्त समझ कर माफ कर दो.”
अगले ही पल नैना के फोन पर मैसेज था. उस ने मैसेज पढ़ा और कुछ पल में ही उस के चेहरे पर गंभीरता की जगह मुसकान आ गई. रोहन उस की मुसकान देख रहा था, लेकिन आज उसे नैना की मुसकान से ज्यादा उस के रिप्लाई का इंतजार था. नैना ने कोई रिप्लाई नहीं किया. बस, वह संध्या के साथ बैठ कर बातें करती रही.
रोहन के कान लगातार उन की बातों पर लगे थे. लेकिन नैना ने उस के बारे में कुछ नहीं कहा. और थोड़ी देर गपशप करने के बाद वह वापस अपने घर चली गई. हमेशा नैना के आने का इंतजार करने वाले रोहन ने आज उस के जाने पर थोड़ी राहत की सांस ली.
नैना गुस्से से भरी रोहन के घर गई थी लेकिन मन में हलकी सी मुसकान ले कर वापस आई. सच तो यह है कि वह सोच कर गई थी कि कल रात जो हुआ, वह पूरा तो नहीं लेकिन थोड़ाबहुत तो रोहन की मम्मी को बताएगी ताकि वह उसे डांटे और उस के बिगड़ते कदमों को कुछ लगाम लगे. लेकिन रोहन की मुरझाई शक्ल, आंखों में डर और उस का इस तरह मैसेज कर के माफी मांगना… नैना का सारा गुस्सा खत्म हो गया. उसे लगा कि वह बच्चा है, यह सब बचपना है, एक बच्चे की तरह डर रहा है वह. इसलिए उस ने इस बचपने को खुद ही माफ कर दिया.
नैना ने रोहन की पिछले एक महीने की चैट पढ़ी. उसे महसूस हुआ कि रोहन की हर बात, हर तारीफ में उस के मन में क्या है, यह दिख रहा था. बस, मैं ही अनजान थी. और शायद उस के साथ मैं भी अपने पुराने समय का लुत्फ ले रही थी.
शाम को नैना बाथरूम से नहा कर बहार आई. वह टौवल में आईने के सामने खड़ी थी. अचानक से उसे रोहन की रात वाली पंक्तिया याद आईं जो रोहन ने उस की तारीफ में लिखी थीं. नैना आईने में खुद को देखने लगी, और बोली, ‘क्या सच में इतनी हसीन हूं मैं, एक एक जवान लड़का मेरे लिए शायरी करता है, मुझे अपनी आगोश में लेना चाहता है… कुछ तो बात है नैना तुझ में,’ उस ने खुद से कहा और खिलखिला कर हंसने लगी.
वह आ कर बैड पर लेट गई. उस ने रोहन की खिलखिलाती मुसकान वाली पिक देखी और फिर आंखें बंद कर के उस का उदास चेहरा याद किया. उसे लगा कि एक मुसकराते लड़के के चेहरे पर उस ने बिना मतलब उदासी के रंग भर दिए हैं. चलो, उसे फिर से खुश करते हैं.
नैना ने रोहन को अनब्लौक कर दिया और उसे मैसेज दिया, “हैलो रोहन.”
रोहन ने कोई रिप्लाई नहीं दिया, वह औनलाइन भी नहीं था.
नैना ने फिर कहा, “हैलो, कहां हो रोहन?”
लेकिन फिर कोई रिप्लाई नहीं था. नैना को लगा कि शायद कहीं बिजी होगा, इसलिए औनलाइन नहीं है, फ्री हो कर औनलाइन आ जाएगा. नैना अपना काम करने लगी. थोड़ी देर बाद उस ने फिर से मोबाइल चैक किया. रोहन अभी तक औनलाइन नहीं था. नैना अपने दोस्तों से बातें करने लगी. बीचबीच में वह रोहन का अकाउंट भी चैक करती रही. लेकिन रोहन आज औनलाइन ही नहीं आया.
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अब नैना को थोड़ा खालीपन सा महसूस होने लगा. उस का मन चाह रहा था किसी से भी बात करने का. उस का मन किया कि रोहन को कौल करें. लेकिन फिर उस के बढ़ते हाथ रुक जाते थे. अपने अलावा किसी और के लिए न सोचने वाली नैना को पता नहीं क्या हो रहा था. वह बेचैन सी होने लगी.
आधी रात यानी 12 बजे के आसपास का समय था. आखिर उस ने रोहन को कौल किया. कौलरिंग जा रही थी. लेकिन रोहन ने कौल रिसीव नहीं की. नैना ने फिर से ट्राई किया. लेकिन फिर ऐसा ही हुआ. आखिर में उस ने अपना फोन साइड में रख दिया. अब वह न जाने क्याक्या सोचने लगी और न जाने कब उस की आंखें लग गईं, उसे पता ही न चला.
अगले दिन वह सुबह अपना काम खत्म कर के तैयार हुई. अधिकतर दोस्तों के यहां वह फौर्मल कपड़ों में जाती थी. लेकिन आज उस ने कुछ अगल कपड़े पहने. ब्लैक शौर्ट मिडी जो उस के घुटनों तक थी और पूरी तरह बाडीफिट थी, को पहना. उस ड्रैस में वह बहुत हौट लगती थी. ऐसा लगता कि वह ड्रैस उस के लिए ही बनी है. उस के बाल खुले थे, क्योंकि उसे याद था एक बार रोहन ने कहा था, ‘मैम, आप खुलेबालों में ज्यादा अच्छी लगती हैं.’
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