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रुखसार ने सामान पर एक नजर डाली और बोली, ‘‘परेशानी इधर की नहीं इंजीनियर बाबू उधर की है. हमारा घर जिंजीराम नदी के किनारे से 2-3 मील के फासले पर है. कोई कुली या ठेले वाला वहां नहीं मिलता, जो हमारी मदद करे.’’

‘‘एक उपाय है रुखसारजी, आप को अगर हम पर विश्वास हो तो यह सामान आप हमारे क्वार्टर में रखवा दें. शुक्रवार को आइएगा तो ले लीजिएगा.’’

उस रोज के बाद सामान रखने का जो सिलसिला शुरू हुआ, उस के साथ ही शुरुआत हुई उस रिश्ते की जिस ने न सीमा देखी न राष्ट्रीयता. रुखसार और शाहिद एक ऐसी दुनिया में प्रवेश कर चुके थे, जिस में दूर तक सिर्फ अंधेरा ही नजर आता था. शाहिद का बदला रूप और रंगढंग गांव वालों से छिप न सका. मानसी मां ने तो बस एक ही जिद कर रखी थी कि किसी भी तरीके से शाहिद रुखसार को घर ले आए. शाहिद कई दिन तक टालमटोल करता रहा और एक दिन रुखसार से मानसी मां की इच्छा कह दी.

संतरियों से बच कर और सब की आंखों में धूल झोंक कर शाहिद एक दिन रुखसार को घर ले आया. मानसी से मिलवाने के बाद शाहिद रुखसार को वापस ले कर जा ही रहा था कि मिहिर ने आ कर यह खबर दी कि बंगलादेशी गार्ड्स की एक टुकड़ी किसी खास मकसद से कोनेकोने में फैल गई है और बीएसएफ के सिपाहियों के साथ मिल कर किसी आतंकवादी दल की तलाश में जुट गई है. शाहिद असमंजस में पड़ गया. सब ने राय दी कि ऐसे बिगड़े माहौल में रुखसार को ले जाना खतरे से खाली न होगा. अंधेरा बढ़ता जा रहा था और सन्नाटा सारे इलाके में पसर गया था. रुखसार का दिल घबराहट के मारे बैठा जा रहा था, लेकिन उसे अपने प्यार पर पूरा विश्वास था. शाहिद का साथ पाने के लिए वह किसी भी मुसीबत का सामना करने के लिए तैयार थी. बीचबीच में सिपाहियों के बूट की आवाज सन्नाटे को चीर कर गांव वालों के कानों को भेद रही थी. ऐसा लग रहा था कि हर घर की तलाशी ली जा रही हो.

‘‘रुखसार आप के घर में रह सकती है, मगर तभी जब उस का निकाह आप के साथ अभी हो जाए,’’ सभी गांव वालों की यह राय थी. शाहिद के समझानेबुझाने का किसी पर कोई असर नहीं हो रहा था. न ही कोई रुखसार को अपने घर में रखने को तैयार था. मानसी का घर भी 2 गांव छोड़ कर था. लिहाजा वहां भी पहुंचना उन परिस्थितियों में नामुमकिन था. शाहिद बिना समय गंवाए किसी फैसले तक पहुंचना चाहता था. उस ने एक नजर रुखसार पर डाली, जो बुत बनी खड़ी थी. उसे भरोसा था कि शाहिद जो भी करेगा ठीक ही करेगा. अंतत: वही हुआ जो सब ने एक सुर में कहा था, काजी ने दोनों का निकाह करवाया. इस शादी में न बरात थी, न घोड़ी, न बैंड न बाजा बस दिलों का मिलन था.

मानसी ने दिल से कई तरह के पकवान बनाए, जो गांव वालों ने मिलजुल कर मगर छिप कर ऐसे खाए मानो अंधरे में अपराध की किसी घटना को अंजाम दे रहे हों. 4 दिन बाद जब रुखसार की रुखसत का वक्त आया तो उस की आंखों से आंसू बह रहे थे. रुखसार ने रुंधे गले से कहा, ‘‘तुम कहीं मुझे बीच राह में छोड़ तो नहीं दोगे? मैं अनाथ हूं. आगेपीछे मेरा एक चचेरा भाई जमाल है या फिर पड़ोसी. बस इतनी सी है मेरी दुनिया.’’ ‘‘कुदरत को शायद हमें मिलाना ही था और शायद उसे यही तरीका मंजूर होगा. अब तुम हाट में जा कर अपने लोगों में यों घुलमिल जाओ मानो तुम आज ही उन के साथ आई हो. किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि तुम 4 दिन यहां रही हो,’’ शाहिद उस से बोला.

रुखसार फुरती से चल कर हाट तक पहुंच गई और अपनी झोंपड़ीनुमा दुकान पर जा कर ही दम लिया. मिहिर ने पहले ही वहां सामान रख दिया था. रुखसार ने सामान सजाना शुरू किया और स्वयं को संयत रखने का प्रयत्न कर ही रही थी कि किसी के आने की आहट ने उसे चौंका दिया. देखा तो सामने जमाल था. वह बोला, ‘‘मैं जानता हूं कि तुम 4 दिन कहां थीं. तुम भूल गई हो रुखसार कि तुम एक बंगलादेशी हो और वह एक हिंदुस्तानी. कैसे तुम उस के प्यार के चक्कर में पड़ गईं? अपनेआप को संभालो रुखसार. अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है. वापस लौट चलो.’’

‘‘मैं बहुत दूर निकल आई हूं जमाल. अब तो सिर्फ मौत ही मुझे उस से जुदा कर सकती है. सिर्फ मौत,’’ रुखसार का जवाब था.

शाहिद अपने प्रोजैक्ट की प्रगति के बारे में कप्तान मंजीत और दिल्ली से आए मंत्रालय के अफसरों से मीटिंग कर के घर लौटा तो परेशान था. मंत्रालय ने 1 साल से ज्यादा समयसीमा बढ़ाने की अर्जी नामंजूर कर दी थी. मानसी ने शाहिद को परेशान देख कर सवाल दागे तो उसे बताना ही पड़ा, ‘‘लगता है मां कि अब दिनरात काम करना पड़ेगा, रोशनी का पूरा इंतजाम होने के बाद हो सकता है मैं रात को भी वहीं रहूं.’’

‘‘क्या ऐसा नहीं हो सकता कि रुखसार भी मेरे साथ वहीं रह जाए, उसी जगह?’’

शाहिद मानसी मां की मासूमियत पर मुसकरा दिया, ‘‘कोशिश करूंगा कि रुखसार को भारत की नागरिकता जल्दी ही मिल जाए.’’

शाहिद सारी रात सो नहीं पाया. अगले दिन उसे काम के सिलसिले में पैसों व अन्य साजोसामान के इंतजाम के लिए शिलौंग, अगरतला और कोलकाता जाना था. सारे रास्ते वह रुखसार के बारे में ही सोचता रहा. उस ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिंदगी उसे कभी ऐसे मुकाम पर भी ला कर खड़ा कर देगी. शाहिद जब वापस लौटा तो इलाका फिर बरसात की गिरफ्त में था. जीरो लाइन की तरफ जाते हुए उसे रास्ते में कप्तान मंजीत मिल गए और बोले, ‘‘क्या बात है शाहिद, आजकल तू कम ही नजर आता है,’’ काम की वजह है या कोई और चक्कर है?

‘‘आप भी सरदारजी खिंचाई करने का कोई मौका हाथ से गंवाते नहीं हो. एक तो उबड़खाबड़ जमीन, उस पर भयानक जंगल, जंगली जानवरों का खौफ, कयामत ढाती बरसात और उड़ाने को तैयार हवाएं, ऐसे हालात में रह कर भी आप देश की रक्षा करते हो, यह काबिलेतारिफ है.’’

‘‘एक काम कर शाहिद, यहां कोई चंगी सी कुड़ी देख कर उस से ब्याह कर ले. खबर है कि ऐसे और भी कई छोटेबड़े हाटबाजार खुलने वाले हैं. फिर तो बड़े आराम से जिंदगी गुजरेगी यहां.’’ शाहिद कप्तान की बात पर झेंप गया.

‘‘हां, शाहिद एक बात और. खबर है कि इस बौर्डर के रास्ते पाकिस्तानी आईएसआई भारत में आतंकवादी गतिविधियां करने की फिराक में है, इसलिए सावधान रहना. और कोई ऐसीवैसी बात नजर आए तो फौरन खबर देना,’’ मंजीत ने जातेजाते कहा. शाहिद जब हाट पहुंचा तो उस ने रुखसार को बेकरारी से इंतजार करते हुए पाया. चाह कर भी वे दोनों वहां मिल नहीं पाए. दफ्तर में जब मिले तो रुखसार को एहसास हो गया कि शाहिद की तबीयत बहुत खराब है. बड़ी मुश्किल से दोनों शाहिद के छोटे से घर में पहुंचे और वहां रुखसार ने उसे जबरदस्ती दवा खिला कर सुला दिया. शाहिद की जब आंख खुली तो बहुत देर हो चुकी थी. आखिरी नाव भी जा चुकी थी और दोनों ही तरफ के लोग अपनीअपनी सीमाओं की तरफ जा चुके थे. अंधेरे और सन्नाटे ने पूरा इलाका घेर लिया था. मिहिर को आता देख रुखसार की जान में जान आई. रुखसार ने जमाल से हुई सारी बात मिहिर को बताई. रुखसार की घबराहट भांप कर मिहिर भी सोच में पड़ गया. उस पर दोनों तरफ ही गार्ड किसी वजह से ज्यादा ही सख्ती दिखा रहे थे. ऐसे में रुखसार का वहां से निकलना बहुत मुश्किल था. लिहाजा वहां रहने के अलावा रुखसार के पास कोई चारा नहीं था.

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