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‘‘लाइफ,ओ मेरी लाइफ,’’ कहता हुआ अनुभव मेरे पीछे दौड़ता आ रहा था.

मैं ने उसे आंखें दिखाईं तो उस ने कान पकड़ने का दिखावा करते हुए कहा, ‘‘ओके बाबा, लाइफ नहीं जिंदगी. अब तो ठीक है न?’’

‘‘ठीक क्या है? भला कोई किसी को लाइफ या जिंदगी जैसे नामों से पुकारता है क्या? मेरा इतना खूबसूरत सा नाम है सुनैना. फिर जिंदगी क्यों कहते हो?’’

‘‘क्योंकि तुम मेरी जिंदगी हो. जब मैं जिंदगी बोलता हूं न तब महसूस होता है जैसे तुम सिर्फ मेरी हो. सुनैना तो सब के लिए हो पर जिंदगी सिर्फ मेरे लिए,’’ मेरी आंखों में एकटक देखते हुए अनुभव ने कहा तो मैं शरमा गई. मु झे एहसास हो गया कि अनुभव मु झे बहुत चाहता है.

वैसे अनुभव से मिले हुए मु झे ज्यादा समय नहीं हुआ था. जब मैं ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था और फर्स्ट डे कालेज आई तब पहली दफा मैं ने उसे सीनियर्स को रैगिंग देते देखा था. वह सीनियर्स के आगे अलगअलग जानवरों के ऐक्सप्रैशंस दे रहा था. उसे देख कर मु झे भी हंसी आ गई थी. तब उन सीनियर लड़कों में से एक ने मु झे देख लिया और तुरंत बुला भेजा.

मु झे अनुभव के सामने खड़ा किया गया और फिर उन में से एक दादा टाइप लड़के ने मु झ से कहा, ‘‘बहुत हंसी आ रही है न, चलो इस लड़के को हमारे सामने प्रोपोज करो. लेकिन प्रोपोजल एक अलग अंदाज में होना चाहिए,’’

मैं घबरा गई थी. मैं ने सवालिया नजरों से उस की तरफ देखा तो उस ने कहा, ‘‘बिना कुछ बोले बस डांस करते हुए उसे प्रोपोज करो.’’

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मैं अकसर डांस करती रहती थी. इसलिए बहुत सहजता से डांस की मुद्राओं द्वारा मैं ने उसे प्रोपोज किया. इस तरह अपनी जिंदगी में पहली बार मैं ने किसी को प्रोपोज किया था और वह भी इतने लोगों के बीच और इतने अलग अंदाज में. अनुभव तो मु झे देखता ही रह गया था. उस दिन के बाद से हमारी बातचीत होने लगी और हम अच्छे दोस्त बन गए.

रैगिंग पीरियड गुजरने के बाद एक दिन अनुभव मेरे पास आया और कहने

लगा, ‘‘यार, उस दिन तुम ने मु झे प्रोपोज किया पर मैं ने कोई जवाब नहीं दिया. इस बात को

भी 2 महीने बीत गए हैं. मु झे लगता है कि खूबसूरत लड़कियों से ज्यादा इंतजार नहीं कराना चाहिए. इसलिए आज मैं भी अपने प्यार का इजहार करता हूं.’’

‘‘सुनो, ज्यादा ड्रामेबाजी मु झे पसंद नहीं है,’’ मैं ने उसे  िझड़कते हुए कहा.

तब उस ने मेरा हाथ पकड़ लिया और एकदम से सीरियस हो कर बोला, ‘‘ड्रामेबाजी नहीं हकीकत है. तुम ही मेरी जिंदगी हो. मेरी हर धड़कन अब तुम्हारे नाम है. तुम भले ही कभी मु झे भूल भी जाओ, मगर मैं सारी उम्र तुम से ही प्यार करूंगा. भला अपनी जिंदगी से जुदा हो कर भी कोई जी पाता है?’’

उस की आंखों में सचाई थी. बस उस

दिन से हम दोनों एकदूसरे के हो गए और मैं उस की जिंदगी बन गई. उस ने मेरा नाम ही जिंदगी रख दिया.

अनुभव अकसर मु झ से कहता कि मैं उसे आई लव यू कहूं, पर मैं ऐसा नहीं करती. एक दिन उस के बहुत जिद करने पर मैं ने कहा था, ‘‘देखो अनुभव मेरी नजर में जब 2 इंसान एकदूसरे के करीब होते हैं और उन के दिल में प्यार होता है तो अपने एहसासों को सम झाने के लिए लफ्जों की जरूरत नहीं पड़ती. लफ्जों की जरूरत तब पड़ती है जब वे मजबूर हों और एकदूसरे से दूर हों, चाह कर भी वे पास नहीं आ सकते हों, पर याद आ रही हो, ऐसे में लफ्जों से काम चलाना जरूरी हो जाता है.’’

‘‘फिर तो मैं यही चाहूंगा कि तुम मु झे कभी भी आई लव यू न बोलो यानी तुम कभी भी मु झ से दूर रहने को मजबूर न रहो,’’ कह कर वह

हंस पड़ा.

कालेज के दिन पंख लगा कर उड़ने लगे. मु झे अनुभव के साथ वक्त बिताना बहुत पसंद था. इस बीच मेरा निफ्ट में चयन हो गया. मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गई. निफ्ट से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करना मेरा सपना था और अनुभव मेरे सपने को हकीकत बनते देखना चाहता था. अब हम दूर जरूर हो गए थे, मगर दिल से बहुत गरीब थे. कभी वह दिल्ली आ जाता और कभी छुट्टियों में मैं बनारस पहुंच जाती.

इधर अनुभव ने बनारस में बीएचयू से ही पढ़ाई जारी रखी थी. मैं उसे अपने

इंस्टिट्यूट की मजेदार घटनाएं सुनाती थी और वह मु झे अपने कालेज की बातें बताया करता था.

एक दिन मैं ने अनुभव को सरप्राइज देते हुए बताया, ‘‘इन गरमी की छुट्टियों में हमें संस्था की तरफ से मनाली ले जाया जा रहा है.’’

मैं जानती थी कि मनाली से 2 घंटे की दूरी पर अनुभव का गांव था. वह खुद छुट्टियों में अकसर मनाली में रहता था.

‘‘क्या बात है यार, तब तो हमारा मिलना कन्फर्म है,’’ खुश हो कर अनुभव ने कहा.

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‘‘मगर हमारा प्रोग्राम 2 दिन बाद का ही है जबकि तुम तो अभी बनारस में ही हो.’’

‘‘तो क्या हुआ, मैं 1 सप्ताह की छुट्टी

ले कर अभी निकलता हूं,’’ अनुभव ने सहजता

से कहा.

‘‘ज्यादा मजनू न बनो. पहले देखो कि तुम्हारी पढ़ाई में हरज तो नहीं होगा?’’ मैं ने टोका.

‘‘बिलकुल नहीं यार. ऐग्जाम खत्म हो चुके हैं. वैसे भी घर ही जा रहा था और फिर अपनी जिंदगी से मिलने का मौका मिल रहा हो तब तो मैं 7 समंदर पार कर के भी पहुंच जाऊं.’’

‘‘इतने उतावले भी न बनो. कभी मेरे बगैर जीना पड़ जाए तो क्या करोगे?’’ मैं ने गंभीर स्वर में कहा.

‘‘सांसें चल रही होंगी, मगर तुम्हारे बिना जिंदगी का कोई अर्थ नहीं होगा.’’

‘‘हाय इतनी इमोशनल बातें मत किया करो. चलो फिर मिलते हैं,’’ मैं ने उस से मिलने का वादा किया.

मनाली में बिताए उन दिनों को मैं कभी नहीं भूल सकती. कालेज की सहेलियों के ग्रुप को छोड़ मैं अनुभव के पास आ जाती और फिर अनुभव मु झे अपनी बाइक पर बैठा कर पूरी मनाली की सैर कराता. हम हवाओं के साथ बहते, नएनए सपने बुनते. लगता जैसे मेरे और अनुभव के सिवा दुनिया में कोई नहीं.

एक दिन शाम में हम यों ही खुली वादियों में घूम रहे थे. एक तरफ ऊंचीऊंची पहाडि़यां थीं तो दूसरी तरफ हरियाली के साए में छिपी गहरी घाटियां. अनुभव उस वक्त अपनी बाइक बहुत तेज चला रहा था. उस पर एक अलग ही नशा छाया हुआ था. बारबार मना करने के बावजूद वह उस खतरनाक रास्ते पर बाइक तेज रफ्तार से भगाता रहा.

आगे बढ़ें- अनुभव ने नीचे  झांका और…

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