मैं अपने कमरे में पहुंचा और अपना सामान चैक किया. चंद महंगे कपड़े… पैसे… बस इतना ही… शाम ढलते ही अंधेरा घिरने लगा. मुझे नहीं पता कि मैं कितनी देर तक समुद्र में बैठा रहा और लहरों को लगातार तट से टकराते देखता रहा. आधी रात होनी चाहिए. मैं उस समय का इंतजार कर के बैठा रहा.
बहुत हो गया… यह जीवन… मैं ने अपनेआप से कहा और कुदरत से क्षमायाचना करते हुए चलने लगा.
समुद्र की गहराई उन जगहों पर ज्यादा नहीं होती जहां पैर सामने रखे जाते थे. मैं सागर की ओर चलने लगा. लहरें दौड़ती हुई मेरे पास आ कर मु झे छूने लगीं और मु झे ऐसा लगा जैसे मु झे भीतर आने का निमंत्रण दे रही हों.
पैरों में सीप और पत्थर चुभ गए. छोटीछोटी मछलियों को मैं महसूस कर सकता था. आगेआगे मैं चहलकदमी करने लगी और गरदन तक पानी आ गया.
कुछ पुरानी यादें मु झे उस वक्त घेरने लगीं और मेरे मन में अजीबोगरीब खयाल आने लगे. मगर मैं नहीं रुका, मैं चलता रहा.
खारा पानी मुंह में घुस गया, आंखों में पानी आने लगा. ऐसा लग रहा था जैसे कोई मु झे किसी अवर्णनीय गहराई तक खींच रहा हो.
लहरों की गति अधिक है, एक खींच, एक टक्कर, एक लात, लहरें पानी में मेरे साथ प्रतिस्पर्धा करने लगीं जैसे फुटबौल खिलाड़ी गेंद को लात मार रहे हों.
मेरी स्मृति धूमिल हो रही थी. छाती, नाक, आंखें, कानों, मुंह में खारा पानी भर कर मु झे नीचे और नीचे धकेल रहा था.
अचानक मु झे ऐसा लगा कि कोई मजबूत हाथ मु झे गहराई से ऊपर खींच रहा हो. मेरी याददाश्त रुक गई.
जब मैं उठा तो काले रंग के स्विमसूट में एक बूढ़ी विदेशी महिला मेरी बगल में बैठी थी. उस की बगल में 3 युवा थाई लड़के खड़े थे.
क्या मैं मरा नहीं हूं? मुझे तट पर कौन लाया?
उस ने अपनी आंखें खोलीं. मैं ने विदेशी महिला को अपनी धाराप्रवाह अमेरिकी अंगरेजी में कहते सुना. तब तक, जिस रिजोर्ट में मैं ठहरा था, उस का मालिक और दूसरा आदमी दोनों हमारी ओर दौड़ते हुए आए.
‘‘क्या हुआ? वे होश में आ गए?’’ थाइलैंड आदमियों ने टूटीफूटी अंगरेजी में पूछा तो अमेरिकी महिला ने कहा, ‘‘हां इन्हें होश आ गया.’’
मैं सुन सकता था. उन में से एक डाक्टर जैसा दिख रहा था. उस ने मेरी नब्ज पकड़ी और कहा,‘‘सब ठीक है.’’
बाद में उन्होंने अमेरिकी महिला से कहा, ‘‘तुम ने इस की जान बचा कर एक अच्छा काम किया है.’’
हालांकि मैं बहुत थका हुआ महसूस कर रहा था. मैं चलने लायक नहीं था. उन सभी लोगों ने मिल कर मु झे वहां से उठा कर जिस कमरे में मैं ठहरा हुआ था उस में बिस्तर पर लिटा दिया.
उस महिला ने मुझ से केवल इतना कहा, ‘‘शुभ रात्रि… ठीक से सो जाओ… सुबह मिलेंगे…’’ और दरवाजा बंद कर चली गई.
तो मैं ने जो प्रयास किया वह भी असफल रहा? अपने जीवन में पहली बार मैं आह… जोर से चिल्लाया जैसे मानो मेरे सीने तक दबा हुआ दुख खुल कर बाहर आ गया हो. मु झे नहीं पता कि मैं कब सो गया.
जब मैं उठा तो धूप अच्छी थी. मेरे कमरे के परदों से भोर का उजास आ रहा था. जैसे ही मैं चौंक कर उठा और गीले कपड़ों में बाहर निकला, मैं ने कल जिस थाई युवक को देखा था उस ने कहा, ‘‘सुप्रभात… ठीक हैं?’’ उस ने मुसकराते हुए पूछा.
मैं बरामदे में कुरसी पर बैठ गया और फिर से समुद्र को देखने लगा.
‘‘गुड मौर्निंग…’’ उधर से आवाज आई.
मैं ने पलट कर देखा. कल समुद्र से मु झे बचाने वाली अमेरिकी महिला वहीं खड़ी थी. लगभग एक आदमी जितना कद, सुनहरे बाल, गोरा रंग…
मेरी सामने वाली कुरसी पर उस ने बैठ कर कहा, ‘‘मुझे माफ कर दीजिए,
हम ने एकदूसरे का परिचय तक नहीं किया है. मैं जेनिफर हूं. न्यू औरलियंस, यूएसए से हूं और मैं एक लेखिका हूं,’’ उस ने मुसकराते हुए कहा.
मैं कुछ सैकंड्स के लिए नहीं बोल सका. महिला अपने 40वें वर्ष में होनी चाहिए. लंबीचौड़ी दिखने में बड़ी थी.
‘‘मैं स्नेहन हूं… बिजनैसमैन…’’ मैं ने कहा.
‘‘पहले तो मु झे लगा कि आप समुद्र में तैरने जा रहे हैं. लेकिन मैं ने आप पर ध्यान दिया क्योंकि आप की पोशाक और शैली तैरने लायक नहीं लग रही थी. जैसेजैसे लहरें आप को अंदर खींचने लगीं, मैं सम झ गई कि आप डगमगा रहे हैं. मैं थोड़ी दूर तैर रही थी और तुरंत आप के पास आई और आप को खींच कर ले आई…’’
मुझे बहुत गुस्सा आया. एक विदेशी महिला ने मेरी कायरतापूर्ण जान बचाई है. कितनी शर्मनाक बात है.
कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया. उस ने खुद इस सन्नाटे को भंग किया, ‘‘क्या आप खुदकुशी करने के लिए गए थे? मु झे क्षमा कीजिए… यह एक असभ्य प्रश्न है. हालांकि पूछना है. आप की समस्या क्या है?’’
उस के साथ अपनी समस्याओं और असफलताओं पर चर्चा करने से मु झे क्या लाभ होगा?
‘‘मैं आप को मजबूर नहीं करना चाहती… प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन का निर्णय लेने का अधिकार है. लेकिन आत्महत्या मेरे खयाल से एक बहुत ही कायरतापूर्ण, घृणित निर्णय है…’’ उस ने खुद कहा.
अचानक मेरे अंदर एक गुस्सा पैदा हो गया, ‘‘तुम से किस ने कहा मु झे बचाने के लिए?’’
जेनिफर ने मेरी आंखों में देखा और कहा, ‘‘अपनी आंखों के सामने किसी को मरते हुए देखना इंसानियत नहीं है… इसलिए मैं ने बचाया… आप एक भारतीय की तरह दिखते हैं? भारतीय ही हैं न?’’ उस ने पूछा.
मैं ने हां में बस सिर हिलाया.
‘‘अपना देश, अपनी संस्कृति और तत्त्वज्ञान के लिए पूरे विश्व में जाना जाता और मर्यादा से माना भी जाता है. मैं ने जीवन के अर्थ और अर्थहीन दोनों पर आप के देश के तत्त्वज्ञानियों की किताब से ही जाना है.’’
मैं ने आश्चर्य से उस की ओर देखा, ‘‘आप ने अध्ययन किया है?’’ मैं ने पूछा.
‘‘कुछ हद तक.’’
‘‘आप ने खुद को एक लेखिका कहा?’’
वह हंसी, ‘‘जो लिखते हैं वे ही पढ़ते हैं, जो पढ़ेंगे वे लिखेंगे जरूर.’’
‘‘मैं जीवन की उस मोड़ पर खड़ा हूं जहां से मैं वापस जिंदगी में जा ही नहीं सकता. मेरी मृत्यु ही मेरी सारी समस्याओं का इकलौता समाधान है.’’
‘‘अगर समस्याओं का समाधान मौत ही है तो दुनिया में जीने लायक कोई नहीं होगा,’’ जेनिफर ने कहा.
मैं ने जवाब नहीं दिया.
जेनिफर फिर बोलीं, ‘‘अपने दिल की बात कीजिए. हम दोनों का आपस में कोई पुराना परिचय या जानपहचान नहीं है. इसलिए हम एकदूसरे के बारे में जो भी सोचेंगे उस से हम में किसी को लाभ या नुकसान नहीं होगा. कभीकभी अपनी समस्याओं को दूसरों के साथ सा झा करना मददगार होता है…’’
मैं बैठा समुद्र को निहार रहा था. फिर मैं ने खुद अपनी सफलता की कहानी और कई असफलताओं का वर्णन किया, जिन का मैं आज सामना कर रहा था.