लूनर मिशन का मतलब था चंद्रमा तक जाने का मिशन. राजेश बोला, “और सर, जहां तक मेरी जानकारी है, एलएलवी की डिजाइन सिर्फ कागजी है. उस के सभी सिस्टम्स की पूरी तरह से टेस्टिंग नहीं हुई है. अभी तो कम से कम एक साल और लगेगा एलएलवी को पूरी तरह से आपरेशनल होने में.”
सतजीत ने हामी भरी, “बिलकुल सही कहा. एलएलवी तो अभी लांच के लिए कतई तैयार नहीं है.”कांफ्रेंस में, कोने में, जहां अंधेरा था, वहां कुरसी लगा कर टाईकोट पहने हुए एक व्यक्ति बैठा था. उस ने हस्तक्षेप किया, “आप लोग भूल रहे हो कि हम लोग चंद्रयान मिशन द्वारा चंद्रमा तक जा चुके हैं.”
राजेश ने तुरंत कहा, “लेकिन, हमारे सभी चंद्रयान मिशन बिना किसी अंतरिक्ष यात्री को ले कर चंद्रमा तक गए हैं. इस बार हम अंतरिक्ष यात्री वाले मिशन की बात कर रहे हैं, जो हिंदुस्तान का सब से पहला ऐसा मिशन होगा. इस के लिए हम उसी राकेट का इस्तेमाल नहीं कर सकते, जो बिना किसी इनसान के मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.”
टाईकोट वाले व्यक्ति ने सरलता से कहा, “बिलकुल कर सकते हैं. उसी राकेट में बहुत सारे परिवर्तन कर के,” फिर एक क्षण रुक कर वे बोले, “लेकिन, एलएलवी तो पूरी तरह से नया डिजाइन है. उस के लिए आप लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है.”
पद्मनाभन और भी परेशान था, “लेकिन सर, धरती से सिर्फ 300 किलोमीटर ऊपर जाने के लिए हम इतने भारी एलएलवी का इस्तेमाल क्यों करना चाहते हैं? एलएलवी तो चंद्रमा तक जाने के लिए है, जो धरती से 4 लाख किलोमीटर की दूरी पर है. हमारे 300 किलोमीटर की दूरी के लिए लोअर्थ राकेट ही उपयुक्त है. 4 लाख किलोमीटर वाली शक्ति वाला राकेट तो वैसे भी हमारे लिए बहुत बड़ा और वजनी हो जाएगा.”
निदेशक रामादुंडी ने सकुचाते हुए कहा, “हमारा मिशन चंद्रमा तक जाने का ही है…”राजेश चिढ़ कर खड़ा हो गया, “सर, कैसी बात कर रहे हैं आप? हमारा मिशन तो शून्यकोर मिशन है, जो धरती से सिर्फ 300 किलोमीटर ऊपर जा कर वापस आने वाला मिशन है. हम लोग तो सब से पहले सिर्फ यही देखना चाहते हैं न कि हिंदुस्तान में, और भारतीय अंतरिक्ष संस्था में, स्वयं से ही बनाए गए उपकरणों द्वारा हम सिर्फ धरती के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकल कर इनसानों को वापस ला सकते हैं या नहीं. इस में चंद्रमा तक जाने की बात कहां आ गई?”
मंजिशी, जो अब तक शांत रह कर सब सुन रही थी, ने कहा, “जिस तकनीक का इस्तेमाल हम शून्यकोर मिशन के लिए कर रहे थे, वही सबसिस्टम्स चंद्रमा के मानव मिशन में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं और सभी सुचारु रूप से काम कर रहे हैं. मैं ने खुद भी उन का निरीक्षण कर लिया है.”
राजेश का मानो सैलाब फूट पड़ा, “आप ने क्या खाक निरीक्षण कर लिया है. किसी रेलगाड़ी से 300 किलोमीटर सफर करना और 4 लाख किलोमीटर की दूरी तय करना, क्या ये दोनों बातें आप को एकजैसी लगती हैं…?”अगर दोनों बातें आप को एकजैसी लगती हैं, तो आप के जैसे इनसान को अंतरिक्ष वैज्ञानिक तो क्या, साधारण वैज्ञानिक भी नहीं होना चाहिए.”
मंजिशी ने बिना रोष प्रकट किए हुए कहा, “लेकिन, एक पैसेंजर रेलगाड़ी और एक सुपरफास्ट एक्सप्रेस, दोनों के अंजरपंजर एक ही समान रहते हैं, और दोनों की तकनीक व बनने की विधि भी एक ही रहती है.”राजेश ने गुस्से से अपने हाथ हिला दिए, “मुझे आप से बहस नहीं करनी. 300 किलोमीटर के शून्यकोर मिशन में अंतरिक्ष यात्रा कुछ घंटों में ही समाप्त हो जाएगी, जबकि चंद्रमा तक जाने में ही 4 दिन लग जाएंगे, और वापस आने में भी 4 दिन. इस के अलावा वहां पर बिताया गया समय. इस पूरी अवधि के लिए पता नहीं कितनी और किसकिस प्रकार की सामग्री लगेगी. इस की पूरी स्टडी करनी पड़ेगी. अमेरिका के चंद्रमा तक अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाले अपोलो मिशन का गहराई से अध्ययन करना पड़ेगा. उन से तकनीकी सहायता मांगनी पड़ेगी. शून्यकोर मिशन से काफी अलग मिशन होगा यह.”
टाईकोट वाला व्यक्ति उठ खड़ा हुआ. उस ने मुसकरा कर राजेश को संबोधित किया, “तुम उस की चिंता मत करो. पिछले एक साल से तकरीबन सौ वैज्ञानिकों की टीम दिनरात एक कर के इसी पर काम कर रही है, मजिशी के नेतृत्व में. मंजिशी को इस टीम और उन के कामों के बारे में समस्त जानकारी है.”
दोरंजे ने हिम्मत से टाईकोट पहने महत्वपूर्ण से दिखने वाले व्यक्ति से कहा, “सर, लेकिन मास्को के गागरिन अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र में हमारा प्रशिक्षण सिर्फ चंद घंटों की अंतरिक्ष यात्रा के लिए हुआ है. हम 4 लोगों की यह टीम, 10 दिन की अंतरिक्ष यात्रा तो क्या, 24 घंटे की अंतरिक्ष यात्रा तक करने में बिलकुल असक्षम है.”
टाईकोट वाले व्यक्ति ने कहा, “मंजिशी के नेतृत्व में सब सफल हो जाएगा. रास्ते में क्या कैसे करना है, सब मंजिशी समझा देगी. उस को पूरा प्रशिक्षण है.”पद्मनाभन ने मजाक उड़ाने के लहजे में कहा, “सर, जब हिंदुस्तान में रह कर ही चंद्रमा तक जाने का अंतरिक्ष प्रशिक्षण मिल सकता है, तो मात्र 300 किलोमीटर के अंतरिक्ष प्रशिक्षण के लिए हमें रूस भेजने की क्या आवश्यकता थी?”
दोरंजे को भी यह बात गलत लगी, “हिंदुस्तान में ऐसी कौन सी जगह है, जहां गागरिन अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र जैसा कोई प्रशिक्षण केंद्र है? मेरी नजर में तो ऐसा प्रशिक्षण केंद्र पूरे देश में कहीं नहीं है.”
प्रोजैक्ट लीडर उन्नाकीर्ती ने चारों का गुस्सा होना जायज समझा और शांत किंतु दृढ़ आवाज में कहा, “मंजिशी का चंद्रमा तक जाने का प्रशिक्षण अनुकारी पर हुआ है.”
अनुकारी प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहन, विमान और अन्य जटिल प्रणाली के संचालन की यथार्थवादी नकल प्रदान करने के लिए डिजाइन किए गए नियंत्रणों के समान सेट वाली एक मशीन थी.
राजेश ने उपहास किया, “वाह, मशीन पर प्रशिक्षण प्राप्त अनुकारी अंतरिक्ष यात्री के नेतृत्व में हम चंद्रमा तक जाएंगे.”राजेश ने अपने तीनों साथियों को संबोधित करते हुए कहा, “लो भई, अब तो वाकई पहुंच गए हम चंद्रमा तक.”
उन्नाकीर्ती ने बात बिगड़ते देख तुरंत कहा, “अनुकारी पर जितने प्रकार की परिस्थितियों को हल करने का प्रशिक्षण मंजिशी ने प्राप्त किया है, आप चारों ने कुल मिला कर उस का एक प्रतिशत भी नहीं किया है.”
मंजिशी ने हंस कर कहा, “किस बात का डर है तुम चारों को? ज्यादा से ज्यादा क्या होगा?”टाईकोट वाले व्यक्ति ने देशभक्ति की भावना से राजेश और उस की टीम के सदस्यों से पूछा, “सिर्फ प्रश्न यह है कि क्या तुम हिंदुस्तान के अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए अपनी जान की कुर्बानी दे सकते हो?”